- बीजेपी के चीफ नितिन नवीन अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार बंगाल दौरे पर जाने वाले हैं
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले नवीन का ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है
- बीजेपी चीफ इस दौरे में पार्टी की बंगाल रणनीति को मजबूती देंगे
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कमान संभालने के बाद नितिन नवीन अपना पहला दौरा पश्चिम बंगाल का कर सकते हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार नवीन इस महीने 27-28 तारीख को पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वे विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं. साथ ही, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं. पिछले महीने कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से वे चुनावी राज्यों पुड्डुचेरी, असम, तमिलनाडु और केरल का दौरा कर चुके हैं.
पश्चिम बंगाल का किया था खास जिक्र
पश्चिम बंगाल को लेकर अपने तेवरों का परिचय मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष का कामकाज संभालते समय उन्होंने दे दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में उनके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने 20 मिनट के संबोधन में उन्होंने पश्चिम बंगाल का खासतौर से जिक्र किया था. उन्होंने जनसंख्या परिवर्तन का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि कार्यकर्ताओं की शक्ति के बूते बीजेपी पश्चिम बंगाल समेत सभी पांच चुनावी राज्यों में सत्ता आएगी. गौरतलब है कि नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बीजेपी के दांव को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. वे कायस्थ समुदाय से आते हैं जो बंगाल में भद्र लोक का हिस्सा है और करीब 15 प्रतिशत आबादी है.
बूथ मैनेजमेंट पर होगा ध्यान
नवीन के राज्य के दौरे से पहले बंगाल को लेकर बीजेपी ने संगठन को दुरुस्त करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है. पार्टी ने राज्य के 82 हजार बूथ में से 71 हजार पर बूथ पर संरचना मज़बूत की है. वैसे एसआईआर के बाद बूथों की संख्या बढ़ कर 93 हजार हो सकती है. पार्टी इसी हिसाब से आगे बढ़ रही है.
हिंसा पीड़ितों से मिलेंगे कार्यकर्ता
बीजेपी ने चुनावी हिंसा से पीड़ित अपने कार्यकर्ताओं की व्यथा को भी बड़ा मुद्दा बनाने का फैसला किया है. पार्टी के बड़े नेता पुराने कार्यकर्ताओं के घरों में जाएंगे. हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं के परिवारवालों से मिलेंगे. पार्टी ने पूर्वांचली, बिहार, मारवाड़ी तथा देश के अन्य हिस्सों से आए लोगों से संपर्क साधने का भी फैसला किया है. राज्यों में उनके परिजनों से संपर्क साधा जाएगा ताकि वे उन्हें बीजेपी के पक्ष में वोट देने के लिए तैयार कर सकें.
यात्राओं पर है बीजेपी की नजर
पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य बीजेपी नेताओं के आपसी मतभेदों को दूर करने का प्रयास किया है और राज्य ईकाई में अनुशासन कायम किया गया है. राज्य नेताओं को बेवजह की बयानबाजी से बचने को कहा गया है. उनसे कहा गया है कि वे टीएमसी के जाल में न उलझें और अपना नैरिटेव बनाएं ताकि राज्य की जनता को साथ लिया जा सके. एकजुटता का संदेश देने के लिए राज्य के अलग-अलग इलाकों से यात्राएं निकालने पर विचार हो रहा है जिनकी अगुवाई प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता करेंगे.
महिला सम्मान
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के अनुसार इस विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा होगा. महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद आए दिन महिलाओं पर अत्याचार, आरजी कर कांड और दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा का गैंगरेप और ध्वस्त कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा. बीजेपी के नेताओं के अनुसार जनता राज्य की बिगड़ी कानून व्यवस्था से इस कदर तंग आ चुकी है कि उन्हें लगने लगा है कि टीएमसी सरकार का जाना जरूरी है. इसीलिए जनता से कहा जाएगा कि जीना है तो बीजेपी को वोट दो, सम्मान से रहना है तो बीजेपी को वोट दो. इसी तरह रोजगार भी एक बड़ा मुद्दा रहेगा. राज्य में औद्योगिककरण का अभाव, पलायन और खस्ता अर्थव्यवस्था भी बड़े मुद्दे बनाए जाएंगे. राज्य की महिलाओं को टीएमसी सरकार की ओर से दी जाने वाली लक्ष्मी भंडार योजना पर सवाल उठाए जा रहे हैं. बीजेपी शासित राज्यों में महिलाओं को इसी तरह दी जाने वाले अधिक आर्थिक मदद का उदाहरण दिया जाएगा. बिहार में एनडीए की ओर से महिला रोजगार के लिए डेढ़ करोड़ महिलाओं को दस हजार रुपए देने का उदाहरण बढ़-चढ़ कर पेश किया जाएगा.
बीजेपी की स्थिति
पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी ने 121 सीटें किसी न किसी रूप में जीती हैं. यह जीत बताती है कि इन सीटों पर बीजेपी मज़बूत स्थिति में है. पार्टी का लक्ष्य यहां पर पूरी ताकत झोंकना है. साथ ही इनके अलावा अन्य चालीस से पचास सीटों पर ताकत लगाई जाएगी. बीजेपी का लक्ष्य 160-170 सीटों को अपने पाले में लाना है. इसके लिए उम्मीदवारों के चयन में सावधानी रखी जाएगी.














