बिहार बीजेपी के विधायकों ने सम्राट चौधरी को अपना नया नेता चुन लिया है. वो नीतीश कुमार की जगह नए मुख्यमंत्री होंगे. वो बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री होंगे. बीजेपी बिहार में पहली बार अपने नेतृत्व में सरकार बनाने जा रही है. मुख्यमंत्री के रूप में उसने पिछड़ी जाति के एक नेता का चयन किया है. चौधरी कोइरी जाति से आते हैं.आबादी के मामले में कोइरी बिहार में यादवों के बाद दूसरी बड़ी जाति है. बिहार में 2023 में हुए जाति सर्वेक्षण में यादवों की आबादी 14 फीसदी और कोइरी की आबादी 4.21 फीसदी पाई गई थी. बिहार में अब तक उपेंद्र कुशवाहा को कोइरी जाति का सबसे बड़ा नेता माना जाता था. लेकिन क्या बीजेपी ने सम्राट चौधरी को सीएम बनाकर क्या उपेंद्र कुशवाहा का कद छोटा करने की कोशिश की है. उपेंद्र का राष्ट्रीय लोक मोर्चा बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा है.
सम्राट बनाम उपेंद्र
उपेंद्र कुशवाहा का राजनीतिक करियर कई दशकों में फैला हुआ है. वहीं सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन 25 साल पुराना है. लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए हैं. वहीं 1980 के दशक में राजनीति शुरू करने वाले उपेंद्र कुशवाहा कई दलों में रहने के अलावा तीन राजनीतिक दल बना चुके हैं. इस समय वो राष्ट्रीय लोकमोर्चा के प्रमुख हैं. इसका गठन उन्होंने 2023 में नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड से निकलने के बाद किया था. इससे पहले वो उन्होंने राष्ट्रीय समता पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का भी गठन किया था.इन दोनों राजनीतिक दलों का उन्होंने जनता दल यूनाइटेड में विलय कर लिया था.उपेंद्र कुशवाहा बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाले सभी नीतीश कुमार और लालू यादव समेत समाजवादी राजनीति करने वाले सभी नेताओं के साथ काम कर चुके हैं.
लोकसभा और विधानसभा का चुनाव उपेंद्र ने दो बार जीता है और तीन बार हारे हैं. वे बीजेपी की मदद से वो दो बार राज्य सभा का चुनाव भी जीते हैं. उपेंद्र कुशवाहा की मदद का फायदा बीजेपी को मिलता रहा, खासकर बिहार के शाहाबाद और मगध के इलाके में. साल 2020 के चुनाव में जब कुशवाहा बीजेपी के साथ नहीं थे तो उसे इन इलाकों में भारी नुकसान उठाना पड़ा था. लेकिन 2025 के चुनाव में जब वो बीजेपी के साथ आ गए तो बीजेपी को इन इलाकों में शानदार सफलता मिली.यहां देखने वाली बात यह होगी कि नवबंर 2025 के चुनाव के समय सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान थे. उस समय भी कोइरी समाज ने उपेंद्र कुशवाहा के चेहरे पर विश्वास कर बीजेपी और एनडीए में शामिल दूसरे दलों के लिए वोट किया था.
उपेंद्र और सम्राट की राजनीतिक शैली में अंतर
नीरज कुमार वैशाली की एक यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र पढ़ाते हैं. हमने उनसे पूछा कि क्या सम्राट चौधरी अब कोइरी जाति के सर्वमान्य नेता होंगे. इस सवाल पर नीरज कहते हैं,''सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार में नीतीश युग का अंत हो गया. सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने का बीजेपी का फैसला एक ओर जहां बिहार सरकार कि स्थिरता को मजबूती देगा, वहीं दूसरी ओर पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग में यह मैसेज देगा कि मंडल राजनीति से उसका कोई अंतर्विरोध नहीं है.'' वो कहते हैं,'' सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने से बीजेपी को कुशवाहा समाज पर अपनी पकड़ को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी, इस जाति को एकजुट करने में उपेंद्र कुशवाहा कि भूमिका अहम रही है. लेकिन बीजेपी के इस कदम से उपेंद्र कुशवाहा की अब अपनी ही जाति पर पकड़ ढीली पड़ सकती है. वो कहते हैं कि एक समय कुशवाहा समुदाय उपेंद्र कुशवाहा में अपना मुख्यमंत्री देखता था.नीरज कहते हैं कि उपेंद्र कुशवाहा कि राजनीतिक शैली में ना तो आक्रामकता है और ना ही विश्वसनीयता.इसी को भुनाते हुए बीजेपी ने सम्राट चौधरी को एक नए कोइरी नेता के रूप में उभारा है. उनकी राजनीतिक शैली में एक ओर हिन्दुत्व कि राजनीति वाला आक्रामकता है तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद की तरह तीखा प्रहार करने कला.
बिहार में कोइरी जाति का वोट बैंक
बिहार में कोइरी जाति का आबादी करीब सवा चार फीसदी है. बिहार में कोइरी जाति की आबादी मगध-शाहाबाद के अलावा सीवान, भागलपुर-बांका और दोनों चंपारण में अच्छी-खासी है. माना जाता है कि इन इलाकों की करीब 45 सीटों पर कोइरी जाति निर्णायक भूमिका में होती है.बिहार में कोइरी और कुर्मी के गठजोड़ को लव-कुश के नाम से जाना जाता है. नीतीश कुमार ने इसे साध लिया था. वो करीब तीन फीसदी कुर्मी और सवा चार फीसदी कोइरी को साधकर बिहार पर 20 साल तक शासन करते रहे. इसमें उन्हें अति पिछड़ी जातियों का साथ मिला. बीजेपी भी अब उसी दिशा में बढ़ने की कोशिश कर रही है.
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