ट्विशा शर्मा केस में बड़ा मोड़, 10 दिन बाद पुलिस गिरफ्त में समर्थ, कोर्ट परिसर में ‘VIP ट्रीटमेंट’ पर उठ रहे सवाल

Twisha Sharma Case: शुक्रवार शाम जब समर्थ सिंह कथित तौर पर सरेंडर करने के लिए जबलपुर जिला अदालत पहुंचा, तो अदालत परिसर में करीब एक घंटे तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चला.समर्थ फेस मास्क लगाकर आया था और मीडिया के सवालों पर पूरी तरह खामोश रहा.

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  • ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह को पुलिस ने करीब 10 दिन बाद जबलपुर में हिरासत में लिया गया
  • समर्थ सिंह को पहले जबलपुर जिला अदालत परिसर में विशेष वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने का आरोप
  • समर्थ सिंह की गिरफ्तारी से पहले कोर्ट रूम नंबर 32 में दरवाजे बंद करके उसे रखा गया था
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नई दिल्ली/भोपाल:

ट्विशा शर्मा मौत मामले में शुक्रवार शाम बड़ा मोड़ आया, जब मृतक मॉडल ट्विशा शर्मा के पति और मामले के मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को जबलपुर पुलिस ने हिरासत में ले लिया.समर्थ पर आरोप है कि वह करीब 10 दिनों से पुलिस से बच रहा था.बाद में उसे भोपाल पुलिस के हवाले किया गया और रात करीब 2 बजे भोपाल लाया गया.फिलहाल समर्थ को कटारा हिल्स थाने में रखा गया है और शनिवार सुबह 10 बजे के बाद उसे भोपाल कोर्ट में पेश किया जाएगा.

समर्थ को क्यों मिल रहा वीआईपी ट्रीटमेंट?

समर्थ की गिरफ्तारी के साथ ही अब एक नया और विस्फोटक सवाल खड़ा हो गया है क्या हिरासत में लिए जाने से पहले समर्थ सिंह को संरक्षण और विशेष सुविधा दी जा रही थी? ट्विशा शर्मा के परिवारजन लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि समर्थ सिंह और उसकी मां, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई को प्रभावित किया. अब परिवार के वकीलों ने इन आरोपों को और गंभीर बनाते हुए दावा किया है कि गिरफ्तारी से पहले जबलपुर जिला अदालत परिसर में समर्थ को कथित तौर पर “VIP ट्रीटमेंट” दिया गया.

जब सभी जज जा चुके थे, तब वह सरेंडर करने पहुंचा था समर्थ 

ट्विशा शर्मा के पिता की ओर से पैरवी कर रहे वकील अनुराग श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि मीडिया के सामने आने से ठीक पहले समर्थ सिंह कोर्ट रूम नंबर 32 में बैठा था.यह जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कोर्ट रूम है. श्रीवास्तव के मुताबिक, जिस कमरे में समर्थ बैठा था, उसके दरवाजे बंद रखे गए थे. अनुराग श्रीवास्तव ने सवाल उठाया, “किस अधिकार से उसे उस कमरे में बैठने दिया गया? यह साफ दिखाता है कि न्यायपालिका किस हद तक उसका साथ दे रही है. वह यहां सरेंडर करने आया था, लेकिन तब तक सभी जज जा चुके थे.वह जिला जज के चैंबर में दरवाजा बंद कर बैठा था.जब मैंने दरवाजा खुलवाने पर जोर दिया, तो वह वहां से भागकर बार एसोसिएशन के चैंबर में जाकर बैठ गया.”

ये आरोप इसलिए और गंभीर हो जाते हैं क्योंकि समर्थ के खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था और उसकी गिरफ्तारी पर ₹30,000 का इनाम घोषित किया गया था. ट्विशा के परिवार के वकील का आरोप है कि इसके बावजूद समर्थ खुले तौर पर घूम रहा था और उसके साथ वैसा व्यवहार नहीं किया गया जैसा पुलिस को एक वांछित आरोपी के साथ करना चाहिए था.

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एक घंटे तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा

शुक्रवार शाम जब समर्थ सिंह कथित तौर पर सरेंडर करने के लिए जबलपुर जिला अदालत पहुंचा, तो अदालत परिसर में करीब एक घंटे तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चला.समर्थ फेस मास्क लगाकर आया था और मीडिया के सवालों पर पूरी तरह खामोश रहा. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, जब मीडिया ने उससे सवाल पूछने की कोशिश की, तो उसके साथ आए कुछ लोगों ने हंगामा किया.

समर्थ के वकील सौरभ सुंदर ने मीडिया से कहा कि उनके मुवक्किल ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है और अब वह कोर्ट में सरेंडर करने आए हैं.उन्होंने कहा, “मुझे पांच मिनट दीजिए, वह यहीं मौजूद है सरेंडर करने के लिए.वह सरेंडर करेगा. हम CJM के सामने याचिका दाखिल कर रहे हैं. याचिका दाखिल करेंगे और जो भी परिणाम होगा, आपको बताएंगे. बस पांच मिनट इंतजार कीजिए.”

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सरेंडर की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जबलपुर पुलिस ने समर्थ सिंह को हिरासत में ले लिया. इसके बाद उसे भोपाल पुलिस को सौंप दिया गया.भोपाल पुलिस उसे कटारा हिल्स थाने लेकर आई, जहां इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मध्य प्रदेश सरकार खुद रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कराने के लिए कोर्ट पहुंची है.ट्विशा शर्मा का परिवार शुरुआत से आरोप लगाता रहा है कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली है और इसी कारण जांच की रफ्तार और दिशा प्रभावित हुई.

इस बीच, कोर्ट में एक और अहम घटनाक्रम हुआ.बताया गया कि समर्थ सिंह की कानूनी टीम ने हिंदू रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए ट्विशा शर्मा का शव उसके पति को सौंपे जाने की मांग की. हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया. वहीं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने समर्थ सिंह का लाइसेंस निलंबित कर दिया है.निलंबन की अवधि के दौरान समर्थ अपने नाम के आगे “एडवोकेट” शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.

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