West Bengal: चुनाव ड्यूटी लगी बसें, वोट डालने घर जा रहे यात्री घंटों फंसे; टर्मिनस पर तोड़फोड़

पश्चिम बंगाल में बुधवार को बसों की भारी कमी के कारण सैकड़ों यात्री फंस गए, जिनमें कई अपने गृहनगर जाकर वोट डालने की कोशिश कर रहे थे. सिलीगुड़ी में गुस्साए यात्रियों ने बस टर्मिनस के बुकिंग काउंटरों में तोड़फोड़ की. रिपोर्ट- संचिता आइच बाग

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पश्चिम बंगाल में बुधवार को बसों की भारी कमी के कारण सैकड़ों यात्री फंस गए

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में चुनावी दिनों में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. बुधवार को सरकारी बसों की भारी कमी के चलते सैकड़ों यात्री फंस गए. इनमें ज्यादातर लोग उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों में अपने घर जाकर वोट डालने की तैयारी में थे. सुबह से यात्री सरकारी नॉर्थ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बसों में चढ़ने के लिए लंबी कतारों में इंतजार कर रहे थे. वे जलपाईगुड़ी अलीपुरद्वार कूच बिहार समेत उत्तर बंगाल के जिलों में पहुंचना चाहते थे. घंटों गुजर गए लेकिन कोई बस नहीं आई और अधिकारियों की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिली. 

गस्सा फूटा टर्मिनस पर तोड़फोड़

आखिरकार यात्रियों का गुस्सा भड़क उठा और कुछ लोगों ने तेनजिंग नोर्गे बस टर्मिनस के अंदर बुकिंग काउंटरों में तोड़फोड़ कर दी. कंप्यूटर और दूसरे उपकरण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. कुछ समय तक टर्मिनस में अफरा-तफरी का माहौल छा गया.

जल्द ही पुलिस और केंद्रीय बल मौके पर पहुंच गए. उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में ले लिया. अब पूरे बस टर्मिनस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अधिकारियों ने व्यवस्था बहाल करने में कामयाबी हासिल की है. हालांकि यात्रियों का असंतोष अब भी जारी है.

गुरुवार के चुनाव को लेकर चिंता

गुरुवार को चुनाव के पहले चरण का मतदान होने वाला है. इसलिए कई लोग घर वापस जाने के लिए बसें पकड़ने जल्दी पहुंच गए थे. अब परिवहन संकट की वजह से वे वोट डालने का मौका गंवा सकते हैं. यह उनकी बड़ी चिंता बन गई है.

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कई यात्रियों ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि अपर्याप्त योजना के कारण जनता को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. एक यात्री ने कहा हम घर जाकर वोट डालने आए थे लेकिन यहां कोई बसें नहीं हैं. हम अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कैसे करेंगे.

चुनाव ड्यूटी के लिए गई बस

बस टर्मिनस के उप प्रभारी रंजीत दासगुप्ता ने स्पष्ट किया कि बसों की यह कमी इसलिए हुई क्योंकि चुनाव ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में बसों को अधिग्रहित कर लिया गया था. इसके चलते पूरे दिन यात्रियों की सेवा के लिए केवल 15 से 20 बसें ही उपलब्ध थीं जो भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. हमारा कंप्यूटर भी क्षतिग्रस्त हो गया है. हमें समझ नहीं आ रहा कि इस स्थिति को कैसे संभाला जाए.

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सरकारी बसों की कमी के अलावा निजी बसों और वाहनों की संख्या भी काफी कम थी. कई यात्रियों को बसों के अंदर ठसाठस भरी स्थिति में यात्रा करते देखा गया. यहां तक कि कुछ बसों की छतों पर भी लोग सवार थे.

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