मेरठ में पिछले दिनों जाट समुदाय का एक बड़ा सम्मेलन हुआ. मौका था जाटों के प्लूटो कहे जाने वाले और मुगलों को हराने वाले प्रतापी राजा महाराजा सूरजमल की मूर्ति के अनावरण का. अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के झंडे तले हुए इस समारोह में अलग-अलग पार्टी के जाट नेताओं ने शिरकत की, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और राजस्थान में नागौर लोकसभा सीट से सांसद हनुमान बेनीवाल शामिल थे. इसी सम्मलेन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कुछ बिंदु चौंकाने वाले हैं.
11 बिंदुओं वाला प्रस्ताव लाया गया
11 बिंदुओं वाले इस प्रस्ताव में जाट समाज को एकजुट करने, युवाओं को नशा से बचाने, उनमें अनुशासन की भावना पैदा करने, जाट महापुरुषों के इतिहास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में जाटों को ओबीसी आरक्षण दिलवाने जैसे संकल्प शामिल किए गए. मगर इनमें दो बिंदु ऐसे थे जिन्होंने सहसा सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.
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जाटों को अंतरजातीय विवाह करने की मनाही
इनमें एक प्रस्ताव में कहा गया है कि जाटों को अंतरजातीय विवाह नहीं करना चाहिए और इसपर पूरी तरह विराम लगना चाहिए. इस बारे में अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी 'दांतल' से जब एनडीटीवी ने बात की तो उनका तर्क था कि ये जाटों की पहचान से जुड़ा मामला है. उन्होंने कहा कि जाटों का DNA एक विशेष DNA है और जाट लड़के-लड़कियों की एक विशिष्ट पहचान होती है. ऐसे में अगर जाट लड़के और लड़कियां अंतरजातीय विवाह करेंगे तो जाटों की विशिष्ट पहचान खत्म हो जाएगी.
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23 की उम्र में हो जाए शादी
एक और बिंदु में ये प्रस्ताव दिया गया है कि जाट लड़के और लड़कियों की शादी न्यूनतम 23 साल की उम्र में और अधिकतम 25 साल की उम्र में करा देनी चाहिए. मनु चौधरी दांतल के मुताबिक आज के आधुनिक समाज में न केवल जाट समाज में बल्कि सभी समाजों में रिश्तों में आ रही खटास और दूरी की एक बड़ी वजह ये है कि शादी काफी उम्र बीतने पर हो रही है. दांतल ने कहा कि शादी देर से होने के चलते बच्चे भी देर से पैदा हो रहे हैं जिसका असर जाटों की आबादी पर पड़ रहा है. उनके मुताबिक यही कारण है कि राजनीतिक तौर पर भी जाट अपनी राजनीतिक ताकत खोते जा रहे हैं.














