'मैं उनलोगों में से नहीं, जो केस हटवा लूं...' : यौन शोषण मामले में FIR के आदेश के बाद अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके विरुद्ध शिकायत करने वाला व्यक्ति स्वयं एक 'हिस्ट्रीशीटर' है, जिसका नाम कई आपराधिक मामलों में दर्ज है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • प्रयागराज की पॉक्सो अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया.
  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए मामले की न्यायिक जांच की आवश्यकता पर बल दिया.
  • उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
वाराणसी:

प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी पुलिस थाने के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का शनिवार को आदेश दिया है. अब इस पूरे मामले पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया समाने आई है.  उन्होंने कहा कि न्यायालय पर मुझे पूरा यकीन है और मैं न्यायलय के आदेश का सम्मान करता हूं.'

यह उचित है. मामला दर्ज होने पर ही जांच और गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होगी. तभी हमारे खिलाफ दायर झूठे मामले की सच्चाई सबके सामने आएगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सकेगी. इसलिए यह आवश्यक है. हम केवल इतना कहना चाहेंगे कि अदालत को इस मामले में अधिक समय लिए बिना तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि बहुत से लोग इस मामले को देख रहे हैं. गवाही दर्ज की जानी चाहिए और जल्द से जल्द फैसला लिया जाना चाहिए. जो गलत है वह गलत ही रहेगा और दायर किया गया झूठा मामला अंततः झूठा ही साबित होगा.

अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके विरुद्ध शिकायत करने वाला व्यक्ति स्वयं एक 'हिस्ट्रीशीटर' है, जिसका नाम कई आपराधिक मामलों में दर्ज है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शामली जिले के संबंधित थाने की दीवार पर अपराधियों की सूची में 34वें नंबर पर उस व्यक्ति का नाम अंकित है. ऐसा दागी व्यक्ति अचानक जगतगुरु रामभद्राचार्य का शिष्य बन जाता है. शंकराचार्य ने आगे कहा, "हम उन लोगों में से नहीं हैं जो अपने ऊपर लगे आरोपों या मुकदमों को हटवा लें."

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य द्वारा बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल आवेदन पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने पिछले सप्ताह साक्ष्यों को देखने और पीड़ित बटुकों का बयान दर्ज करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

याचिकाकर्ता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बीएनएस की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/5/9 और 17 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए यह आवेदन दाखिल किया था. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए झूंसी के थाना प्रभारी को तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और कानून के मुताबिक मामले की जांच करने का आदेश दिया.

Featured Video Of The Day
Kasganj Case पर SC का बड़ा फैसला, इलाहाबाद HC का आदेश रद्द | BREAKING NEWS