- CM हिमंता ने बताया कि 2014 में सोनिया गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ की तारीख तय करने को कहा था
- राहुल गांधी के अमेरिका से फोन करने के बाद कांग्रेस में स्थिति बदल गई थी और हिमंता को CM बनने का मौका नहीं मिला
- 2015 में हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए थे
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को दावा किया कि 2014 में जब कांग्रेस के 58 विधायकों ने उनका समर्थन किया था, तब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनसे पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने की तारीख तय करने को कहा था. हालांकि, उस समय अमेरिका गए राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को फोन किया और स्थिति बदल गई.
हिमंता असम के 2011 के विधानसभा चुनावों के बाद के हालात के बारे में बता रहे थे. 2011 के चुनाव के बाद कांग्रेस में असंतोष देखा गया था, जब कई विधायकों ने तत्कालीन सीएम तरुण गोगोई की जगह हिमंता बिस्मा सरमा को मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन दिया था. 2015 में हिमंता कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.
राहुल के फोन के बाद बदल गई स्थिति!
सीएम हिमंता ने कहा, 'मैडम (सोनिया गांधी), जिन्हें मैं अब भी इसी तरह पुकारता हूं, ने मुझसे तारीख तय करने को कहा था और मैंने उनसे कहा था कि मैं जून (2014) में कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा.'
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के फोन करने के बाद स्थिति बदल गई. सरमा ने कहा, 'तब मुझे दुख हुआ था, लेकिन अब मेरा मानना है कि किसी की जिंदगी में जो भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है और कांग्रेस में रहने पर मुझे जो मिलता, भगवान ने उससे ज्यादा दिया.'
'शुक्रगुजार हूं कि ऐसा नहीं हुआ'
सरमा ने कहा, 'भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री बनने के बाद मुझे पूरे दिल से असम और सनातन धर्म दोनों की सेवा करने का मौका मिला, जो कांग्रेस में रहने पर मुमकिन नहीं होता.' उन्होंने कहा कि अगर वह कभी कोई किताब लिखेंगे तो इन घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बताएंगे.
उन्होंने दावा किया कि जब मल्लिकार्जुन खड़गे असम आए थे तो 58 कांग्रेसी विधायक ने मेरा साथ दिया था. उन्होंने कहा, 'मुझे इंसाफ नहीं मिला लेकिन खड़गे हमेशा पार्टी में मेरे विरोधियों से कहते थे, तुम हिमंता से लड़ रहे हो लेकिन विधायक उनके पास हैं.'
उन्होंने कहा, 'ये सच हैं और इसके कई गवाह हैं लेकिन मैं शुक्रगुजार हूं कि ऐसा नहीं हुआ क्योंकि मैं हमेशा के लिए दागी हो जाता.'
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इको-सिस्टम ऐसा है कि आम परिवारों के लोगों के लिए ज़िंदा रहना मुश्किल है, और पार्टी के पूर्व प्रमुख भूपेन बोरा ने लंबे समय तक संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार सोमवार को उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. बोरा के BJP में शामिल होने के बारे में सरमा ने कहा कि वह पहले उनसे बात करेंगे और फिर मीडिया को अपने फैसले के बारे में बताएंगे.














