- असम चुनाव से पहले कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा देकर कांग्रेस खेमे में हलचल मचा दी है.
- कांग्रेस के केंद्रीय और प्रदेशस्तरीय नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन बोरा ने 24 घंटे का समय मांगा.
- कांग्रेस के 35 साल पुराने सिपाही भूपेन बोरा की नाराजगी की वजह क्या है, आइए जानते हैं इनसाइड स्टोरी.
Bhupen Borah Resign Row: असम में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सोमवार को कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया. भूपेन बोरा के इस्तीफे की खबर सामने आते ही कांग्रेस में भूचाल मच गया. पार्टी के प्रदेशस्तरीय नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय नेताओं ने भी भूपेन बोरा को मनाने की कोशिश शुरू की. मान-मनोव्वल के बीच प्रभारी जितेंद्र सिंह ने भूपेन बोरा के साथ मीडिया के सामने आकर कहा कि उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया है. यह हमारे परिवार का मामला है. इसे हम आपस में सुलझा लेंगे. लेकिन बात इतनी तक नहीं है. भूपेन बोरा ने अभी इस्तीफा वापस नहीं लिया है.
भूपेन बोरा ने इस्तीफे पर मांगा 24 घंटे का समय
जितेंद्र सिंह, गौरव गोगोई के मनाने और राहुल गांधी से फोन पर हुई बातचीत के बाद भूपेन ने 24 घंटे का समय मांगा है. भूपेन बोरा इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं यह आने वाले दिनों में साफ होगा. लेकिन इतना तो तय है कि यदि भूपेन ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा. 35 साल से कांग्रेस के हाथ को मजबूत करने वाले भूपेन बोरा आखिर इतने नाराज क्यों है? आइए जानते हैं इनसाइड स्टोरी...
असम में BJP की हैट्रिक रोकने के लिए कांग्रेस ने कसी कमर
दरअसल असम में BJP को हैट्रिक लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने बीते साल पूर्व CM तरुण गोगोई के बेटे और सांसद गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. कुछ हफ्तों पहले प्रियंका गांधी को असम की स्क्रीनिंग कमिटी का प्रमुख नियुक्त किया और उनके साथ कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और छतीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक बनाया. कुल मिलाकर कांग्रेस ने संदेश दिया कि वो हिमंत बिस्वा सरमा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए पूरी ताक़त झोंकने वाली है. प्रियंका गांधी इसी हफ़्ते असम के पहले दौरे पर जाने वाली थीं. लेकिन उससे ठीक पहले भूपेन बोरा ने इस्तीफ़ा दे कर पार्टी को बड़ा झटका दिया.
भूपेन बोरा के इस्तीफे पर गुवाहटी से दिल्ली तक हरकत
आनन-फ़ानन में कांग्रेस आलाकमान दिल्ली से गुवाहाटी तक हरकत में आ गया. राहुल गांधी ने बोरा से फ़ोन पर बात की. प्रभारी जितेंद्र सिंह ने घर जा कर उन्हें मनाया और दावा किया कि बोरा ने इस्तीफ़ा वापस ले लिया है. लेकिन भूपेन बोरा ने अंतिम फ़ैसले के लिए एक दिन का समय मांगा है. सस्पेंस के बीच उनके क़रीबी सूत्रों का मानना है कि बोरा इस्तीफ़ा वापस नहीं लेंगे!
चुनाव हारने के बाद भूपेन बोरा को बनाया गया था प्रदेश अध्यक्ष
5 साल पहले 2021 में जब असम में लगातार दूसरी बार कांग्रेस को BJP से करारी हार का सामना करना पड़ा तो विधानसभा चुनाव के फौरन बाद जुलाई में दो बार के विधायक रह चुके भूपेन बोरा को असम प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. करीब चार साल सालों तक बोरा ने पूरी मेहनत की. उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर पूरे असम में पदयात्रा भी की और हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर नज़र आए.
लोकसभा चुनाव के बाद बोरा को किया जाने लगा साइडलाइन
लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद असम की बेहाली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस आलाकमान ने भूपेन बोरा की राय को दरकिनार कर उम्मीदवार तय कर दिया. इसके कुछ महीनों के बाद पिछले साल मई में बोरा की जगह गौरव गोगोई को असम कांग्रेस की कमान सौंप दी गई.
भूपेन बोरा के करीबी सूत्रों की मानें तो बोरा इस बात से आहत थे कि चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उनकी अब तक की मेहनत को अनदेखा कर दिया गया. हालांकि बोरा को गठबंधन की कमिटी की जिम्मेदारी दी गई लेकिन सारे अहम फैसले गौरव ही कर रहे थे.
गौरव गोगोई के काम-काज के तरीकों से भी नाराजगी
गौरव गोगोई के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर भूपेन बोरा समेत प्रदेश कांग्रेस के कई और नेता सहज नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक बीते दिनों माजुली में एक धार्मिक स्थल पर परंपरा के विपरीत गौरव गोगोई एक गैर हिंदू नेता को लेकर चले गए.
खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे भूपेन बोरा
इस घटना ने पहले से ही उपेक्षित महसूस कर रहे भूपेन बोरा को बड़ा मुद्दा दे दिया और उन्होंने पार्टी आलाकमान को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया. रोचक बात यह है भूपेन बोरा से ठीक पहले असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे रिपुन बोरा 2022 मे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे. हालांकि दो सालों में ही उन्होंने घर वापसी कर ली.
असम में जमीनी नेता हैं भूपेन बोरा
बहरहाल बोरा के आख़िरी फ़ैसले पर नज़रें टिकी हुई हैं. लेकिन उनके जाने से असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हिमंता सरकार के ख़िलाफ़ मुहिम चला रही कांग्रेस की रणनीतियों को बड़ा झटका तो लग ही गया है. बोरा की पहचान जमीन से जुड़े हुए नेता के साथ प्रभावशाली वक्ता की भी है. ख़ास तौर पर उनमें असम की संस्कृति का जानकार माना जाता है.
राहुल गांधी की न्याय यात्रा में भी सक्रिय थे बोरा
बीते लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली थी. यात्रा जब गुवाहाटी पहुंची तो प्रशासन ने राहुल गांधी को शहर के अंदर से गुजरने से रोक दिया और बाहर से निकालने को कहा. इससे नाराज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड पर आक्रामक प्रदर्शन किया जिसकी अगुवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा कर रहे थे. तब मैंने करीब से देखा कि बोरा महज प्रदर्शन की औपचारिकता नहीं कर रहे थे बल्कि वाक़ई में आरपार में मूड में थे.
क्या बीजेपी में शामिल होंगे बोरा?
कांग्रेस से क़रीब बत्तीस सालों के जुड़ाव के बाद अब भूपेन बोरा ने जब पार्टी से बाहर जाने के लिए कदम बढ़ा दिया है तो इस बार भी आरपार के मूड में ही हैं. माना जा रहा है कि वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.
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