यह सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाएगा... अरविंद केजरीवाल और CM भगवंत मान ने उठाए बजट पर सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि केंद्रीय बजट एक बार फिर पंजाब की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है. उन्होंने कहा कि बजट में किसानों के लिए एमएसपी  की कोई गारंटी नहीं है.

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  • निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और अत्याधुनिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी.
  • विपक्ष ने बजट को महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने वाला बताते हुए रोजगार और किसानों के लिए राहत न मिलने की आलोचना की.
  • दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बजट में रोजगार के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं होने की बात कही.
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किया गया. बजट 2026 विकास के बड़े दांव और राजनीतिक बहस के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है. सरकार ने इस बजट में भविष्य की तकनीक और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हुए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर निर्माण और बायोफार्मा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों के लिए खजाना खोल दिया है. हालांकि, एक तरफ जहां सरकार इन पहलों को 'विकसित भारत' की नींव बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर तीखे तेवर अपनाए हैं. आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस बजट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे महंगाई और बेरोजगारी को और अधिक बढ़ाने वाला करार दिया है.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक्स पोस्ट में बताया, 'देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी और महंगाई है. लेकिन आज के बजट में रोजगार देने का कोई ब्लूप्रिंट नहीं दिखता. ये बजट महंगाई और बेरोजगारी दोनों को और बढ़ाने वाला साबित होगा.'

वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि केंद्रीय बजट एक बार फिर पंजाब की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है. उन्होंने कहा कि बजट में किसानों के लिए एमएसपी  की कोई गारंटी नहीं है. युवाओं के लिए रोज़गार का कोई भरोसा नहीं है और उद्योगों या टैक्स प्रणाली को कोई राहत नहीं दी गई है. केंद्र ने पंजाब की आर्थिकता को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे राज्य और यहां के लोगों के साथ एक बार फिर नाइंसाफी हुई है.

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के किसानों की जायज चिंताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे उसके किसान-हितैषी होने के खोखले दावों की पोल खुल गई है. चीमा ने इशारा किया कि कृषि आधारभूत ढांचा फंड में कोई वृद्धि नहीं की गई और न ही मंडी के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस सहायता दी गई है, जिससे कृषि प्रधान राज्यों को अपने भरोसे छोड़ दिया गया है.


 

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