SC/ST एक्ट लगने मात्र से अग्रिम जमानत से इनकार नहीं... सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी मामलों को लेकर बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने कहा है कि सिर्फ इसलिए अग्रिम जमानत से इनकार नहीं कर सकते क्योंकि मामला SC-ST एक्ट का है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने भर से अग्रिम जमानत को मैकेनिकल रूप से खारिज नहीं किया जा सकता. अदालतों को हर मामले के तथ्यों, FIR  में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच करनी होगी.

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 18 का इस्तेमाल 'यांत्रिक तरीके' से नहीं किया जाना चाहिए. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि धारा 18 का लागू होना हर मामले के तथ्यों और एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर निर्भर करेगा. इसे बिना विचार के मैकेनिकल रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए.

दरअसल मामला गुजरात से जुड़ा है, जहां एक व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 तथा SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था. आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा कर संबंध बनाए और बाद में विवाह से इनकार कर दिया. शिकायतकर्ता महिला अनुसूचित जाति समुदाय से थी. एफआईआर में यह भी कहा गया कि आरोपी महिला की जाति जानता था और उसने उसे अपनी जाति छिपाने के लिए कहा था.

गुजरात हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोप गंभीर हैं. अदालत ने आरोपी की यह दलील भी नहीं मानी कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह शादी नहीं कर सका. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SC/ST एक्ट की धारा 18 अदालत की जांच-परख की शक्ति को पूरी तरह खत्म नहीं करती.

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अदालतों को यह देखना जरूरी है कि क्या प्रथम दृष्टया SC/ST एक्ट के तहत अपराध बनता भी है या नहीं. यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां SC/ST एक्ट के आरोप अन्य आपराधिक धाराओं के साथ लगाए जाते हैं, खासकर व्यक्तिगत संबंधों या विवाह विवादों से जुड़े मामलों में.

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