AMU में भी 'जंतर-मंतर', 17 दिन से भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं यासिर, जबरन हटाने की कोशिश पर रात भर हंगामा

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 21 सितंबर से छात्रों का प्रदर्शन 17वें दिन भी जारी है. उर्दू विभाग के यासिर फहद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और 18 छात्रों पर FIR दर्ज हुई है.

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AMU के छात्र यासिर फहद हंगर स्ट्राइक पर बैठे हैं. (Photo: NDTV)
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  • AMU में 2018-19 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुआ है, जिससे छात्रों में नाराजगी है.
  • छात्र यासिर फहद की हंगर स्ट्राइक जारी है. देर रात प्रॉक्टर और मेडिकल टीम ने ले जाने की कोशिश की.
  • कई प्रदर्शनकारी छात्रों पर एफआईआर भी दर्ज हुई हैं, जिनको रद्द करने की मांग की जा रही है.
अलीगढ़:

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कैंपस में 21 सितंबर से छात्रों का प्रोटेस्ट चल रहा है. आज यानी 7 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का 17वां दिन है. विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के छात्र यासिर फहद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. यासिर की हालत बिगड़ने पर यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करके रास्ता निकालने की कोशिशें तेज कर दी हैं, लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिल सकी है. देर रात धरना खत्म कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कैंपस पहुंचे, जिसके बाद छात्रों की तरफ से जोरदार नारेबाजी भी हुई. कैंपस के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया है. अनूपशहर रोड की तरफ स्थित हॉस्टलों से छात्रों को धरना स्थल की ओर आने से रोके जाने की बात भी सामने आई है. 

वहीं, छात्राओं के हॉस्टलों के बाहर भी नारेबाजी सुनी गई और बड़ी तादाद में छात्राएं हॉस्टल गेट पर इकट्ठा हुईं. प्रोटेस्ट वाली जगह पर और कैंपस के आसपास तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. छात्रों के मुताबिक, रात के वक्त भी करीब 100 प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स कैंपस में 'डक पॉइंट' पर मौजूद रहते हैं.

AMU के छात्र धरने पर क्यों बैठे हैं?

यूनिवर्सिटी में पिछले आठ साल से चुनाव नहीं हो रहा है और एएमयू छात्रसंघ (AMUSU) निष्क्रिय है. कैंपस में चुनाव नहीं करवाए जाने से छात्रों में भारी नाराजगी है. साल 2018-19 के बाद एएमयू में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुआ है. स्टूडेंट लीडर्स लगातार चुनाव करवाने की मांग करते रहे हैं. 

छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एएमयू में एक बार फिर स्टूडेंट्स विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. प्रोटेस्ट का मुख्य चेहरा छात्र नेता यासिर फहद हैं, जिनकी हंगर स्ट्राइक जारी है. वे उर्दू डिपार्टमेंट से एमए की पढ़ाई कर रहे हैं.

NDTV.in के साथ बातचीत में यासिर फहद कहते हैं, "6 और 7 अक्टूबर की दरमियानी रात 12 बजे के आस-पास प्रॉक्टर के साथ मेडिकल टीम भेजी गई थी. उन्होंने हमसे कहा कि तुम्हारी कंडीशन खराब है और इलाज के लिए हॉस्पिटल चलना पड़ेगा. इस पर मैंने कहा कि जो भी मेडिकल सुविधा देना है, आप यहीं प्रोटेस्ट साइट दे दीजिए. इस दौरान हमारे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रों को ह्यूमन चेन की वजह से वे मुझे ले नहीं जा सके.  

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छात्र यासिर आगे बताते हैं कि 28 सितंबर को कुछ ऐसे लोग प्रोटेस्ट में आए, जो यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र थे लेकिन उन्हें कैंपस बैन किया गया है. इसमें कुछ हिस्ट्रीशीटर भी शामिल थे. उन्होंने हमारे प्रोटेस्ट का माहौल खराब किया. इसके बाद आठ प्रदर्शनकारी छात्रों पर एफआईआर हुई. इसके बाद, प्रदर्शन के दौरान कुछ और छात्रों पर एफआईआर हुई, कुल 18 छात्रों पर केस दर्ज हुआ है.

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छात्रों की प्रमुख मांगे क्या हैं?

जब प्रोटेस्ट शुरू हुआ, उस वक्त छात्रों की सिर्फ एक मांग थी- छात्रसंघ चुनाव की बहाली. लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं के बाद अब छात्रों की तरफ से कुल चार मांगें की जा रही हैं.

  • छात्रसंघ चुनाव की तारीख तय की जाए और इलेक्शन ऑफिसर का अपॉइंटमेंट हो.
  • प्रॉक्टर का इस्तीफा हो.
  • प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई एफआईआर रद्द की जाए.
  • जिन प्रदर्शनकारी छात्रों को सस्पेंड किया गया है, उनका सस्पेंशन रद्द किया जाए.

'मांग पूरी होने तक चलेगा प्रोटेस्ट...'

बीटेक के छात्र मोहम्मद उमैश सिद्दीक़ी कहते हैं, "हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से AMUSU की बहाली को लेकर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया है. जब तक छात्रसंघ बहाली की दिशा में ठोस पहल नहीं होती, तब तक हमारा धरना जारी रहेगा. हमें पूरा यकीन है कि लोकतांत्रिक तरीके से चलाए जा रहे इस आंदोलन के जरिए हमारी मांग पर विचार किया जाएगा."

हमारी मांगों पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स न देते हुए इधर-उधर की बातें करके प्रोटेस्ट खत्म करवाना चाहते हैं. प्रशासन छात्रों की आवाज से डरा हुआ है, वे नहीं चाहते कि हमारी आवाज बुलंद हो. क्योंकि जब स्टूडेंट यूनियन आ जाएगा तो छात्रों की आवाज बुलंद होगी. यूनिवर्सिटी के अंदर पिछले 7-8 साल में घोटाले हुए हैं, उनका पर्दाफाश होगा और जवाबदेही तय होगी. प्रशासन चाहता है कि छात्रों की आवाज दबी रहे और उनकी तानाशाही चलती रहे.

यासिर फहद

प्रदर्शनकारी छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

एएमयू के अलावा दिल्ली के जेएनयू में भी प्रोटेस्ट चल रहा है. आए दिनों जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रोटेस्ट होता रहा है. इन छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए एएमयू छात्र नेता यासिर फहद कहते हैं, "ये तीन ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जिनको हमेशा टारगेट किया गया है, एंटी-नेशनल भी कहा गया है. क्योंकि इन विश्वविद्यालयों से जो लोग निकलते हैं, उनसे सरकार डरती है क्योंकि ये लोग सिस्टम पर सवाल खड़ा करते हैं. एएमयू पर इसलिए भी टारगेट होता है क्योंकि ये मुसलमानों के लिए एजुकेशन का सबसे बड़ा हब है."

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यूनिवर्सिटी प्रशासन का क्या कहना है?

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, विश्वविद्यालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि छात्र नेताओं के एक डेलिगेशन ने सोमवार देर रात कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि बातचीत से गतिरोध खत्म करने की शुरुआत हुई है लेकिन खबर छपने तक कोई फाइनल सॉल्यूशन नहीं निकल सका है. अधिकारी ने मुताबिक, कुलपति ने छात्रसंघ को जल्द बहाल करने की अपनी बातें दोहराई हैं लेकिन अगले तीन हफ्ते में चुनाव कराने की छात्रों की मांग को पूरा करना मुमकिन नहीं है. 

एएमयू के प्रॉक्टर नावेद खान ने मंगलवार को कहा कि भूख हड़ताल कर रहे छात्र की सेहत पर विश्वविद्यालय की नजर है और डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे उसकी निगरानी कर रही है. उन्होंने कहा, "हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि छात्र को कोई नुकसान न पहुंचे. छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए 'उचित और व्यावहारिक समय-सीमा' तय करने की कोशिश की जा रही है."

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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन, मोहम्मद हामिद अंसारी, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान और एसपी लीडर मोहम्मद आज़म ख़ान जैसे नेता एएमयू के प्रोडक्ट हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव कितना हो जाता है.

वहीं, हिंदी सिनेमा से जुड़े कई बड़े चेहरों ने भी एएमयू से अपनी पढ़ाई पूरी की है. इसमें नसीरुद्दीन शाह, सईद जाफ़री, कुलभूषण खरबंदा, अनुभव सिन्हा, मुज़फ्फ़र अली, ख्वाजा अहमद अब्बास, जावेद अख़्तर, मजरूह सुल्तानपुरी, बशीर बद्र, जां निसार अख़्तर, राही मासूम रज़ा और कैफ़ी आज़मी जैसे लोगों का नाम शामिल है.

(अलीगढ़ से अदनान ख़ान के इनपुट के साथ)

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