- देशभर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है, कई नक्सली आत्मसमर्पण या मुठभेड़ में मारे गए हैं
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल समस्या के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता 31 मार्च तक दोहराई है
- ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में सीआरपीएफ जवानों ने कठिन परिस्थितियों में नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त कर दिया था
देशभर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई लगातार जारी है. झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक बड़े पैमाने पर या तो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है या फिर वो सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए है. यही हाल देश के दूसरे राज्यों का भी है. जिस गति से सुरक्षाबलों की ये कार्रवाई चल रही है उसे देखते हुए लग रहा है कि नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय डेडलाइन के आते-आते हो जाएगा. केंद्रीय गृहमंत्राी अमित शाह ने एक बार नक्सलवाद के खात्मे को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोरहाया है.
परेड का नेतृत्व 225वीं बटालियन के कमांडेंट दीपक ढोंडियाल ने किया. परेड में भाग लेने वाले दस्ते में उत्तरी सेक्टर की महिला कर्मी, साथ ही उत्तर पश्चिमी सेक्टर, झारखंड, ओडिशा, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), कोबरा यूनिट और पश्चिमी और उत्तर पूर्वी सेक्टरों की टुकड़ियां शामिल थीं.सीआरपीएफ की पहली बटालियन का गठन 1939 में ब्रिटिश शासन के तहत क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस (सीआरपी) के रूप में किया गया था. स्वतंत्रता के बाद, 1949 में, प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया.
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