इलेक्शन कैंपेन देख रही I-PAC का चुनाव से पहले ही हुआ पैकअप, जानें TMC-DMK के अटकेंगे कौन-से काम और क्या है 'प्लान-B'

IPAC विवाद और एजेंसियों की कार्रवाई के बीच TMC और DMK ने स्पष्ट किया कि चुनावी अभियान प्रभावित नहीं होगा. दोनों दलों ने इन‑हाउस सिस्टम मजबूत किए हैं, थर्ड पार्टी पर निर्भरता घटाई है और चुनाव के इस अंतिम चरण में अभियान की गति बनाए रखने पर जोर दिया.

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चेन्नई:

चुनावी रणनीति की बड़ी कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) को लेकर उठे विवाद और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने साफ कर दिया है कि उनके चुनावी अभियान पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. दोनों पार्टियां अब I-PAC पर निर्भरता कम करते हुए अपने इन‑हाउस सिस्टम को मजबूत करने में जुटी हैं, ताकि अंतिम चरण में अभियान की रफ्तार बनी रहे.

TMC: भरोसा भी, तैयारी भी

पश्चिम बंगाल में TMC ने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही I-PAC पर अपनी निर्भरता को धीरे‑धीरे संतुलित करना शुरू कर दिया था. उस चुनाव में प्रशांत किशोर के नेतृत्व में I-PAC का पार्टी के मैसेजिंग और कैंपेन स्ट्रक्चर पर बड़ा नियंत्रण था. लेकिन बाद के वर्षों में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी ने डेटा, बूथ मैनेजमेंट और वोटर आउटरीच के लिए अपनी आंतरिक टीमें खड़ी कीं.

TMC सूत्रों के मुताबिक, 'यह चुनाव अभियान का आखिरी चरण है, हम पैनिक बटन नहीं दबा रहे. किसी भी हाल में अभियान को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा.' पार्टी का मानना है कि I-PAC को उसकी 'लाइफलाइन' बताना अतिशयोक्ति है. असर जरूर पड़ा है, लेकिन वैकल्पिक सिस्टम अब पूरी तरह काम कर रहे हैं.

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प्रतीक जैन की भूमिका रही अहम

हालिया घटनाक्रम के केंद्र में I-PAC की कोर लीडरशिप विनेश चंदेल, प्रतीक जैन और रिशिराज सिंह के हाथों में है. इनमें TMC के लिए सबसे अहम नाम प्रतीक जैन का माना जाता है. पार्टी के भीतर उन्हें डेटा और जमीनी राजनीति की गहरी समझ रखने वाला रणनीतिकार माना जाता है.

ममता बनर्जी का प्रतीक जैन को सपोर्ट

अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने वाली रणनीति, ‘नबो जोआर' यात्रा, 2023 के पंचायत चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव की प्लानिंग में उनकी बड़ी भूमिका रही. TMC नेताओं का कहना है कि 2024 में पार्टी का प्रदर्शन इसलिए बेहतर रहा क्योंकि 2018 की पंचायत हिंसा से मिले सबक को रणनीति में शामिल किया गया और इसमें जैन की अहम भूमिका थी.

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी I-PAC और प्रतीक जैन के पक्ष में खड़ी दिखी हैं. उन्होंने न सिर्फ हालिया कार्रवाई के बाद बल्कि पहले भी, प्रशांत किशोर से मतभेद के दौर में I-PAC का समर्थन किया था.

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DMK में भी ‘सेफ्टी नेट'

तमिलनाडु में DMK ने भी एहतियाती रवैया अपनाया है. यहां I-PAC के साथ‑साथ पार्टी की आंतरिक इकाई PEN (जिसकी निगरानी सीएम एम.के. स्टालिन के दामाद साबरीसन करते हैं) को पहले से ज्यादा सक्रिय किया गया है. DMK सूत्रों का कहना है कि I-PAC और PEN के बीच तालमेल है, निर्भरता नहीं.

I-PAC की ओर से रिशिराज सिंह DMK नेतृत्व से समन्वय की अहम कड़ी रहे हैं. कहा जाता है कि उन्हें सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच थी और वे डेटा‑ड्रिवन रणनीति और जमीनी मैसेजिंग के तालमेल में अहम भूमिका निभा रहे थे. इसके अलावा DMK, शोटाइम कंसल्टिंग के रॉबिन शर्मा के साथ भी काम कर रही है.

सियासी मैसेजिंग और सावधानी

पश्चिम बंगाल में इस पूरे मामले को लेकर TMC का राजनीतिक रुख भी साफ है. पार्टी नेताओं का कहना है कि I-PAC से जुड़े कई युवा पेशेवर बंगाल के हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई का राजनीतिक असर उल्टा पड़ सकता है. वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भी जोर दिया कि युवा प्रोफेशनल्स के करियर को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

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मैदान में सब कुछ ‘नॉर्मल'

भले ही ऊपर से हालात असहज दिखें, लेकिन जमीनी स्तर पर TMC और DMK दोनों का दावा है कि अभियान पूरी रफ्तार में है.I-PAC की शीर्ष लीडरशिप से संपर्क जरूर कम हुआ है, लेकिन पार्टियों की रणनीति साफ है,
जोखिम कम करना, अपनी क्षमता बढ़ाना और चुनावी इंजन को चालू रखना. राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर है, लेकिन फिलहाल संदेश साफ है कि कामकाज सामान्य है, अभियान जारी है.

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