'वी-बैट' रखेगा दुश्मन पर पल‑पल नजर, रूस यूक्रेन युद्ध में लोहा मनवा चुका है यह ड्रोन

भारतीय सेना अमेरिकी V‑BAT ड्रोन खरीदेगी, जिसने रूस‑यूक्रेन युद्ध में अपनी क्षमता साबित की थी. यह ड्रोन बिना रनवे उड़ान भर सकता है और 12 घंटे से अधिक निगरानी कर सकता है. हाइवमाइंड सॉफ़्टवेयर से यह GPS जाम होने पर भी काम करेगा. समझौते के तहत इसका निर्माण भारत में ही होगा, जिससे सेना की निगरानी और खुफिया क्षमता मजबूत होगी.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिकी V-BAT ड्रोन को भारतीय सेना ने खरीदा है, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करता है.
  • भविष्य में इन ड्रोन का निर्माण भारत में होगा, जिससे देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता बढ़ेगी.
  • ड्रोन के साथ Hivemind नामक ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर भी शामिल है, जो तकनीकी बाधाओं में मदद करता है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

रूस-यूक्रेन युद्ध में अपनी क्षमता साबित कर चुका अमेरिकी V‑BAT ड्रोन अब भारतीय सेना का हिस्सा बनने जा रहा है. सेना ने आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बड़ा कदम उठाते हुए इसे खरीदने का निर्णय लिया है.

देश में ही होगा निर्माण

सेना ने अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी शील्ड एआई के साथ समझौता किया है. इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा यह है कि भविष्य में इन ड्रोन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूती मिलेगी.

हाइवमाइंड सॉफ्टवेयर देगा AI की ताकत

डील में सिर्फ ड्रोन की खरीद नहीं, बल्कि अत्याधुनिक ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर ‘Hivemind' का लाइसेंस भी शामिल है. यह सॉफ्टवेयर ड्रोन को खुद निर्णय लेने, GPS जाम होने पर भी मिशन पूरा करने, तकनीकी खराबी आने पर भी अपना रास्ता खुद तय करने में सक्षम बनाता है. यानी दुश्मन तकनीकी बाधा डाले तो भी ड्रोन काम करता रहेगा.

यह भी पढ़ें- अमेरिका ने उतारा जंगी जहाज फिर भी ईरान डर क्यों नहीं रहा? ट्रंप की सेना के सामने 'सस्ते ड्रोन की आर्मी'

V‑BAT: बिना रनवे का ‘हाइब्रिड' ड्रोन

वी‑बैट की सबसे खास बात यह है कि यह हेलीकॉप्टर की तरह वर्टिकल टेक‑ऑफ कर सकता है. हवाई जहाज़ की तरह तेज और लंबी उड़ान भर सकता है. बिना रनवे पहाड़, जंगल, रेगिस्तान, समुद्री तट और जहाजों के डेक से भी उड़ान भर सकता है.

ऐसे क्षेत्रों में जहां रनवे उपलब्ध नहीं होते, यह ड्रोन गेम‑चेंजर सिद्ध होगा.

12 घंटे से ज़्यादा लगातार उड़ान

यह ड्रोन एक बार टेक‑ऑफ के बाद 12 घंटे से अधिक हवा में रह सकता है, जिससे सीमाओं पर दुश्मन की गतिविधियों की लगातार निगरानी संभव होगी.

Advertisement

यह भी पढ़ें- ईरान पर आखिर कितने यूटर्न लेंगे ट्रंप? तेहरान पर हमला करने और परमाणु हथियारों पर चल दी नई चाल

सेना को कैसे मिलेगा फायदा?

भारतीय सेना इसका उपयोग मुख्य रूप से इंटेलिजेंस (खुफिया जानकारी), सर्विलांस (निगरानी), रिकॉनिसेंस (टोही मिशन) के लिए करेगी.

यह ड्रोन सीमाओं, आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सेना की आंख और कान बन जाएगा, जिससे चीन और पाकिस्तान से आने वाली चुनौतियों का सामना और अधिक कारगर तरीके से किया जा सकेगा.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Delhi: SWAT कमांडो को पति ने डम्बल से मारकर उतारा मौत के घाट..| Breaking News | Crime