बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री को अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया ऑफर

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ऐसे निष्ठावान लोग विरले होते है और सनातन समाज उनके इस निर्णय का हृदय से स्वागत और अभिनंदन करता है.

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  • सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों में बदलाव, शंकराचार्य विवाद के विरोध में इस्तीफा दिया था.
  • इस्तीफा देने के बाद अग्निहोत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत की.
  • शंकराचार्य ने अग्निहोत्री के प्रशासनिक पद को त्यागकर धर्म और मर्यादा की रक्षा करने के कदम को मिसाल बताया.
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प्रयागराज:

यूजीसी नियमों में बदलाव और शंकराचार्य विवाद के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देकर चर्चा में आए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अब एक नए घटनाक्रम को लेकर सुर्खियों में हैं. इस्तीफा देने के बाद अग्निहोत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत की.

इस संवाद के दौरान शंकराचार्य ने न केवल अग्निहोत्री के साहसी निर्णय की सराहना की, बल्कि अपनी स्पष्ट और भावनात्मक प्रतिक्रिया भी व्यक्त की. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए प्रशासनिक पद का त्याग करने के इस कदम को एक मिसाल बताया. प्रशासनिक हलकों में इस बातचीत के कई मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि एक सरकारी अधिकारी का धार्मिक मान्यताओं के समर्थन में पद छोड़ना और सीधे शंकराचार्य से आशीर्वाद लेना बड़ी घटना मानी जा रही है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनसे कहा कि आपके इस्तीफे से मेरे मन में दो प्रकार की प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हुई है. पहली प्रतिक्रिया पीड़ा की है कि लोगो को सिटी मजिस्ट्रेट जैसे पद तक पहुंचने के लिए वर्षों की कठिन मेहनत, लगन और अनुशासित अध्ययन से गुजरना पड़ता है. अनेक परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद यह पद मिलता है और ऐसे में आपने एक झटके में उस पद को छोड़ दिया, निश्चित रूप से अत्यंत दुखद है.

वहीं, दूसरी प्रतिक्रिया गर्व और संतोष की है कि आपने जिस प्रकार सनातन धर्म के प्रति अपनी गहन निष्ठा और आस्था का परिचय दिया है. उससे समस्त सनातनी समाज स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ऐसे निष्ठावान लोग विरले होते है और सनातन समाज उनके इस निर्णय का हृदय से स्वागत और अभिनंदन करता है.

उन्होंने अलंकार अग्निहोत्री को कहा कि आप जैसे समर्पित और साहसी लोग जब धर्म की सेवा के लिए आगे आते है तो यह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता है. आपको सरकार द्वारा दिया गया पद भले ही आज न रहा हो. लेकिन धर्म के क्षेत्र में उससे भी बड़ा और अधिक सम्मानजनक दायित्व वाला पद मैं आपको सौंपने का प्रस्ताव देता हूं.

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