अजित पवार मुख्यमंत्री बनें...इसलिए बढ़ाए थे बाल: निधन के बाद समर्थक ने करवाया मुंडन, जानिए पूरा मामला

नागपुर के कार्यकर्ता विलास झोडापे ने अजीत पवार के मुख्यमंत्री बनने की आशा में बढ़ाए बाल उनके निधन के बाद मुंडन कर अर्पित कर दिए. बारामती में नीरा नदी के तट पर किया गया यह भावुक कदम दादा के प्रति उनकी गहरी निष्ठा का प्रतीक बन गया.

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  • नागपुर के कार्यकर्ता विलास झोडापे ने NCP नेता अजीत पवार के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है
  • विलास ने 2024 विधानसभा चुनाव से पहले संकल्प लिया था कि अजीत पवार जब तक सीएम नहीं बनेंगे वो बाल नहीं कटवाएंगे
  • अजीत पवार ने विलास को सलाह दी थी कि बाल बढ़ाने से मुख्यमंत्री नहीं बनते, संगठन मजबूत करना जरूरी है
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बारामती:

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजीत पवार के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए, नागपुर के एक कार्यकर्ता ने एक भावुक कदम उठाया है. नागपुर जिले की उमरेड तहसील के निवासी विलास झोडापे, जो अजीत पवार के कट्टर समर्थक माने जाते हैं, उन्होंने अनोखे अंदाज में अपने नेता को श्रद्धांजलि दी. बारामती की करीब नीरा नदी की तट पर मुंडन करवाया और बाल दादा की अर्पण कर दिये. विलास झोडापे की पहचान अजीत पवार के एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में है. 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले विलास ने संकल्प लिया था कि "जब तक अजीत पवार मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे, तब तक मैं अपने सिर के बाल नहीं कटवाऊंगा.

नागपुर के शीतकालीन सत्र के दौरान जब अजीत दादा को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने विलास को बड़े ही स्पष्ट अंदाज में सलाह दी थी. दादा ने कहा था: "विलास, तुम्हारे बाल बढ़ाने से मैं मुख्यमंत्री नहीं बनूँगा. लोकतंत्र में मुख्यमंत्री बनने के लिए संख्याबल चाहिए होता है. तुम्हारे जैसे कार्यकर्ताओं को विधायक बनना चाहिए. बाल बढ़ाने से तो यह भी पता नहीं चलेगा कि तुम स्त्री हो या पुरुष, ऊपर से तेल का खर्च बढ़ेगा... उससे अच्छा लोगों के काम करो और संगठन को मजबूत बनाओ."

अंतिम विदाई की और फिर करवाया मुंडन

अजीत दादा से मिलने के लिए विलास 28 तारीख की सुबह मुंबई पहुँचे थे, लेकिन पहुँचने के कुछ ही समय बाद दादा के निधन की दुखद खबर सामने आ गई. इसके बाद विलास मुंबई से सीधे बारामती पहुँचे. उन्होंने अपनी पत्नी और दो बच्चों को भी नागपुर से बारामती बुला लिया और पूरे परिवार के साथ अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

चूंकि अब अजीत दादा इस दुनिया में नहीं रहे, इसलिए उनके मुख्यमंत्री बनने के लिए बढ़ाए गए बालों को विलास ने उनकी याद में समर्पित करने का निर्णय लिया. दादा के अंतिम संस्कार के बाद, विलास ने बारामती में नीरा नदी के संगम पर मुंडन करवाया और अपने बाल अपने प्रिय नेता के कार्यों को श्रद्धांजलि स्वरूप अर्पित कर दिए.

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