चाचा शरद से सीखे राजनीति के गुर, कैसे महाराष्‍ट्र की राजनीति में छाए अजित पवार

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में विमान दुर्घटना में मौत हो गई. विमान में क्रैश लैंडिंग के बाद दुर्घटनाग्रस्त होकर आग लग गई.

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  • महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में विमान दुर्घटना के कारण मृत्यु हो गई है
  • अजित पवार ने महाराष्ट्र में पांच बार उपमुख्यमंत्री पद संभाला और लगातार बारामती विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे
  • वे शरद पवार के भतीजे थे और राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक के राजनीतिक मार्गदर्शन में अपनी पहचान बनाई
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बारामती:

महाराष्ट्र के उपमुख्‍यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) की विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. हादसा बारामती में हुआ है, जहां उनकी आज कई जनसभाएं होनी थी. विमान क्रैश लैंडिंग के बाद दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया, जिसके बाद इसमें आग लग गई. क्रैश होने के बाद विमान कई हिस्‍सों में टूट गया. महाराष्‍ट्र की राजनीति में पवार परिवार हमेशा से सत्‍ता के इर्दगिर्द रहा है. अजित पवार के चाचा शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नींव रखी थी. अजित पवार ने अपने चाचा से ही राजनीति के गुर सीखे थे. इसके बाद वह महाराष्‍ट्र की राजनीति में छा गए. 

रिकॉर्ड 5 बार बने उपमुख्‍य मंत्री 

साल 2010-12 के बीच अजित पवार पहली बार उपमुख्यमंत्री बने, तो कई विपक्षियों भौंहें चढ़ गईं. अजित तब सिर्फ सिर्फ 51 साल के थे. इसके बाद तो अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड कायम किया. इसके बाद पृथ्वीराज चव्हाण के ही कार्यकाल में दिसंबर 2012 से सितंबर 2014 तक उनका बतौर उपमुख्यमंत्री दूसरा कार्यकाल रहा. 2019 में नतीजों के बाद जब शिवसेना की कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाने को लेकर बात चल रही थी, तब अप्रत्याशित तरीके से अजित पवार, देवेंद्र फडणवीस के साथ नजर आए और उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद की तीसरी बार शपथ ली. हालांकि, बाद की राजनीतिक उथल-पुथल में वे वापस शरद पवार के साथ आ गए और फडणवीस को चंद दिनों में ही इस्तीफा देना पड़ा. उद्धव सरकार में भी उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया. शिंदे की बगावत के बाद जब सरकार गिर गई, तो 2023 में वे भी महायुति के साथ आ गए और पांचवीं बार उपमुख्यमंत्री बने थे.

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राजनीतिक सफर रहा शानदार

साल 1995 में अजित पवार महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव के लिए बारामती सीट से खड़े हुए और जीते. वह लगातार 7 बार इस सीट से विधानसभा चुनाव जीते. साल 2024 में उन्होंने अपने भाई के बेटे और NCP-समाजवादी पार्टी प्रत्याशी युगेंद्र पवार को हराया. 1999 में उन्हें विलासराव देशमुख की सरकार में अक्टूबर 1999 से दिसंबर 2003 तक सिंचाई मंत्रालय का प्रभार मिला. इसके बाद वे लगभग एक साल के लिए ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे. 2004 में जब दोबारा NCP-कांग्रेस की सरकार बनी, तो अजित पवार को जल संसाधन मंत्रालय दिया गया. उन्हें पुणे जिले का प्रभारी मंत्री भी बनाया गया. 2009 से 2014 के बीच पृथ्वीराज सरकार में भी उनके पास अलग-अलग मंत्रालय रहे.

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