पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन, जगुआर-मिराज और सुखोई-30 की सफल लैंडिंग

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना ने बड़ा अभ्यास किया. सुखोई-30, मिराज-2000, जगुआर, C-295 सहित कई विमानों ने दिन-रात लैंडिंग की. ELF ने आपात, युद्ध और आपदा में संचालन क्षमता मजबूत की. यह अभ्यास सुल्तानपुर में किया गया.

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सुल्तानपुर:

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना ने एक बड़े और अहम अभ्यास को अंजाम दिया. इस दौरान एक्सप्रेसवे पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) को सक्रिय कर दिन और रात, दोनों समय लड़ाकू और परिवहन विमानों की सफल लैंडिंग कराई गई. इस अभ्यास ने वायुसेना की रणनीतिक ताकत, तकनीकी क्षमता और हर परिस्थिति से निपटने की तैयारी को एक बार फिर साबित किया.

इस हाई-प्रोफाइल अभ्यास में वायुसेना के फ्रंटलाइन फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और जगुआर शामिल रहे. इनके अलावा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-295 और AN-32 ने भी एक्सप्रेसवे एयरस्ट्रिप पर सफल संचालन किया. एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर और गरुड़ कमांडो टीम ने भी अभ्यास में हिस्सा लेते हुए अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया.

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कम समय में सड़क से रनवे

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी को तेजी से चालू करने की प्रक्रिया को परखना था. इसमें यह देखा गया कि सामान्य यातायात के लिए इस्तेमाल होने वाले एक्सप्रेसवे को बेहद कम समय में एयरस्ट्रिप में कैसे बदला जा सकता है. अभ्यास के दौरान सुरक्षा, ट्रैफिक क्लीयरेंस, तकनीकी जांच और फाइटर जेट ऑपरेशन से जुड़े सभी पहलुओं को बारीकी से जांचा गया.

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बिना एयरबेस भी ऑपरेशन की क्षमता

वायुसेना अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के अभ्यास से यह स्पष्ट होता है कि जरूरत पड़ने पर बिना पारंपरिक एयरबेस के भी लड़ाकू और परिवहन विमान मिशन को अंजाम दे सकते हैं. युद्धकाल या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है.

क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)?

इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी सड़क का विशेष रूप से तैयार किया गया 3 से 4 किलोमीटर लंबा हिस्सा होता है, जहां फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर उतर सकते हैं. सामान्य दिनों में यह सड़क की तरह काम करता है, लेकिन संकट के समय पूरी तरह एयरस्ट्रिप में बदल जाता है.

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भारत में ऐसे करीब 28 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 15 पर यह सुविधा विकसित की जा चुकी है. इनमें 11 ELF राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित हैं.

कैसे बनते हैं ELF?

ELF का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और भारतीय वायुसेना के सहयोग से किया जाता है. इनमें सड़क को सीधा, चौड़ा और बेहद मजबूत बनाया जाता है, ताकि भारी लड़ाकू विमान भी सुरक्षित उतर सकें. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की करवल खेड़ी स्ट्रिप इसकी एक मिसाल है, जिसकी लंबाई करीब 3.2 किलोमीटर है.

पहले भी हो चुके हैं अहम परीक्षण

  • 2015 में यमुना एक्सप्रेसवे पर पहला रोड रनवे टेस्ट
  • 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर C-130J की लैंडिंग
  • 2023 में यहां बड़े स्तर पर फाइटर जेट अभ्यास
  • 2024 में आंध्र प्रदेश में ELF सक्रिय
  • 2025 में गंगा एक्सप्रेसवे पर रात में लैंडिंग सुविधा
  • 2026 में असम में पूर्वोत्तर भारत का पहला ELF शुरू

क्यों जरूरी हैं ELF?

आधुनिक युद्ध में दुश्मन का पहला निशाना एयरबेस होते हैं. ऐसे में ELF वायुसेना की ताकत को अलग-अलग स्थानों पर फैलाने में मदद करते हैं, जिससे दुश्मन के लिए हमला करना मुश्किल हो जाता है. साथ ही बाढ़, भूकंप और अन्य आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों में भी इनका अहम रोल होता है. कुल मिलाकर, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुआ यह अभ्यास देश की सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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