थलपति विजय की फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जानें क्‍या है विवाद

अभिनेता-राजनेता थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज से ठीक पहले सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. अब ये विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है.

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  • अभिनेता विजय की फिल्म जन नायकन के सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
  • मद्रास हाई कोर्ट ने अभिनेता विजय की फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट देने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है
  • 500 करोड़ के बजट से बनी जन नायकन फिल्म को 9 जनवरी को रिलीज़ किया जाना था लेकिन अभी तक सर्टिफिकेट नहीं मिला
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नई दिल्‍ली:

एक्टर थलपति विजय की फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. 'जन नायकन' की रिलीज के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में अभिनेता से राजनेता बने विजय की 'जन नायकन' को सेंसर सर्टिफिकेट देने के निर्देश वाले हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी थी.

500 करोड़ के बजट की फिल्‍म है 'जन नायकन'

दरअसल, विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज से ठीक पहले सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. फिल्म 9 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अभी तक फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट नहीं मिला है. इस मुद्दे पर फिल्म के प्रोडक्शन हाउस केवीएन प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कंपनी ने कोर्ट से सेंसर बोर्ड को फौरन सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया. यह फिल्म करीब 5 सौ करोड़ रुपये के बड़े बजट से बनी है और विजय की बतौर लीड एक्टर आखिरी फिल्म मानी जा रही है.

क्‍या है पूरा विवाद? 

'जन नायकन' प्रोडक्शन कंपनी के अनुसार, फिल्म को दिसंबर में ही सेंसर बोर्ड को सर्टिफिकेट के लिए सौंप दिया गया था. बोर्ड ने कुछ सीन काटने और कुछ डायलॉग म्यूट करने के सुझाव दिए, जिन्हें मानकर फिल्म को फिर से सब्मिट किया गया. दूसरी जांच के बाद बोर्ड ने इसे यू/ए सर्टिफिकेट के लिए उपयुक्त बताया. लेकिन एक शिकायत में आरोप लगाया गया कि फिल्म धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है. इस आधार पर बोर्ड ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया.

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फिल्‍म प्रोडक्शन कंपनी का तर्क

प्रोडक्शन कंपनी का तर्क है कि शिकायत करने वाले ने फिल्म देखी ही नहीं है, तो ऐसे आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं? इसलिए बिना देरी के सर्टिफिकेट जारी किया जाना चाहिए. वहीं, सेंसर बोर्ड की ओर से कहा गया कि शिकायत मिलने पर फिल्म को दोबारा जांचना जरूरी है और तय समय सीमा में सर्टिफिकेट जारी करने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता. बोर्ड ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है.

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