- आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने उप-नेता पद पर महत्वपूर्ण बदलाव किया है और राघव चड्ढा को हटाया है
- पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक मित्तल को आम आदमी पार्टी का नया डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया है
- आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर इस नेतृत्व परिवर्तन की जानकारी दी है
Raghav Chaddha: आम आदमी पार्टी (AAP) ने संसद के राज्यसभा में अपने नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है. पार्टी ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाकर उनकी जगह पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है. आम आदमी पार्टी ने इस फेरबदल के संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित कर दिया है. अब से डॉ. अशोक मित्तल राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता होंगे. डॉ. अशोक मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं. वे 'लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी' (LPU) के चांसलर भी हैं.
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आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व में बदलाव करते हुए राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया है और उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया है.पंजाब से राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल अब उच्च सदन में पार्टी के उपनेता के रूप में कार्य करेंगे। वहीं, राज्यसभा में पार्टी के नेता का पद संजय सिंह के पास ही बना रहेगा.पार्टी ने इस बदलाव की आधिकारिक जानकारी एक पत्र के माध्यम से राज्यसभा सचिवालय को दे दी है। इसी पत्र में AAP ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को अब राज्यसभा में पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए, जो पार्टी की संसदीय रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है.
राज्यसभा में AAP के कुल 10 सदस्य हैं, जिनमें से 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं। उच्च सदन में पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद चौथी सबसे बड़ी पार्टी है.राघव चड्ढा, जो पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं, पार्टी की स्थापना से ही AAP से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2012 में दिल्ली लोकपाल आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ काम करते हुए अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी.
राघव चड्ढा को हटाने की वजह?
पार्टी ने आधिकारिक तौर पर राघव चड्ढा को हटाए जाने की वजह नहीं बताई है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने से जुड़ी चिंताओं के कारण लिया गया हो सकता है. हाल के महीनों में चड्ढा ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी। खास तौर पर, आबकारी नीति से जुड़े मामलों में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को मिली राहत पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे पार्टी के भीतर सवाल उठे.
पार्टी की प्रमुख गतिविधियों से उनकी दूरी भी नजर आई. हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद न तो उन्होंने केजरीवाल से मुलाकात की और न ही सोशल मीडिया पर कोई प्रतिक्रिया दी, जिससे अंदरूनी मतभेदों की अटकलें तेज हो गईं.इस दौरान चड्ढा ने व्यापक जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें पेड पितृत्व अवकाश की मांग, हवाई अड्डों पर महंगे खाने का मुद्दा, गिग वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा और बड़े शहरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या शामिल हैं.
स्टार प्रचारकों की सूची में नहीं
उन्हें असम चुनाव के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से भी बाहर रखा गया था, जिससे मतभेदों की अटकलों को और बल मिला.हालांकि, इस फैसले के पीछे की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, एनडीटीवी ने इस नेतृत्व बदलाव पर प्रतिक्रिया के लिए राघव चड्ढा के कार्यालय से संपर्क किया है, लेकिन इस खबर के प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला है.














