ओडिशा से अयोध्या चला प्रभु राम का धनुष, 286 किलो के स्वर्ण 'कोदंड' का भव्य स्वागत

सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता और लोहे जैसी पांच धातुओं से निर्मित यह स्वर्ण धनुष भक्ति, शिल्प कौशल और राष्ट्रीय गौरव का संगम है.

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235 किलो वजनी स्वर्ण धनुष 'कोडंडा' ने ओडिशा से अयोध्या की यात्रा शुरू की, जो एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक घटना का प्रतीक है. राउरकेला स्थित हनुमान वाटिका से इस धनुष को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और यह अयोध्या पहुंचने से पहले ओडिशा के सभी 30 जिलों से होकर गुजरेगा.

सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता और लोहे जैसी पांच धातुओं से निर्मित यह स्वर्ण धनुष भक्ति, शिल्प कौशल और राष्ट्रीय गौरव का संगम है.  धनुष पर कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक भारत की सैन्य उपलब्धियों के साथ-साथ शहीद सैनिकों के नाम भी अंकित हैं. स्वर्ण धनुष के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हुए. =

8 फीट लंबा और साढ़े तीन फीट चौड़ा यह धनुष शक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है. तमिलनाडु के कांचीपुरम की 40 महिला कारीगरों द्वारा इसे अत्यंत कुशलता और समर्पण के साथ तैयार किया गया है. कार्यक्रम के अनुसार, यह स्वर्ण धनुष 22 जनवरी को अयोध्या पहुंचने वाला है.

राउरकेला के निवासी धनुष के प्रस्थान को देखने के लिए एकत्रित हुए और एक ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में योगदान देने पर गर्व व्यक्त किया. यह धनुष अयोध्या पहुंचेगा, जहां इसे भगवान राम को भेंट के रूप में अर्पित किया जाएगा. आयोजकों का मानना है कि यह स्वर्ण धनुष हजारों तीर्थयात्रियों में श्रद्धा का संचार करेगा और समकालीन समाज में सनातन धर्म के महत्व को सुदृढ़ करेगा.
 

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