- इस मामले में कुल पांच आरोपियों को दोषी पाया गया जबकि छह आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है
- हत्या की घटना 25 फरवरी 2020 को हुई थी जब अंकित शर्मा दंगों के बीच भीड़ को शांत कराने के प्रयास में निकले थे
- पुलिस जांच में ताहिर हुसैन को हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया गया और उनके घर से हिंसक सामग्री भी बरामद हुई थी
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा के मर्डर केस में दोषी करार दिया गया है. इस केस में कड़कड़डूमा कोर्ट ने कुल पांच लोगों को दोषी करार दिया है.वहीं 6 आरोपियों को बरी कर दिया है.कोर्ट ने 302, 165, 188,153A, 147, 148 सेक्शन के तहत सभी 5 लोगों को दोषी को ठहराया है.दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान अंकित शर्मा मारे गए थे. इस मामले में ताहिर हुसैन समेत 11 लोग आरोपी बनाए गए थे. 6 सालों के बाद अंकित शर्मा के परिवार को न्याय मिला है. यह वाकया 25 फरवरी 2020 का है, जब अंकित शर्मा ऑफिस से घर आए थे. किसी काम से वह फिर निकले तो वापस घर नहीं लौटे थे. इसके बाद परिवार ने उनकी तलाश की तो उनका शव पाया गया. उनका शव चांद बाग पुलिया इलाके में स्थित मस्जिद के पास एक नाले से मिला था.
क्या हुआ था 25 फरवरी 2020 को
- नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध और समर्थन को लेकर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली सुलग रही थी. चांद बाग, खजूरी खास, और मुस्तफाबाद जैसे इलाके हिंसा की आग में झुलस रहे थे. पथराव, आगजनी और गोलियों की आवाज के बीच चारों तरफ चीख-पुकार मची थी.
- इसी खौफ के बीच, 26 साल के अंकित शर्मा, जो आईबी में तैनात थे, 25 फरवरी की शाम को अपने दफ्तर से घर लौटे थे. घर के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण था. स्थानीय चश्मदीदों और पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, अंकित शर्मा गली में हिंसक भीड़ को शांत कराने और लोगों को समझाने-बुझाने के उद्देश्य से घर से बाहर निकले थे. वे चांद बाग पुलिया के पास पहुंचे थे, जहां उपद्रवियों का तांडव चल रहा था.
- शाम के वक्त अचानक चांद बाग पुलिया के पास स्थित एक मस्जिद और ताहिर हुसैन के घर के पास सक्रिय हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ हिंदू-हिंदू चिल्लाते हुए आगे बढ़ी. अंकित शर्मा ने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बेरहमी से घसीटते हुए ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाया गया. वहां उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए गए और हत्या के बाद उनकी लाश को पास के ही खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया.
लाश मिलने पर खुली क्रूरता की परतें
अगले दिन, यानी 26 फरवरी 2020 को अंकित के पिता रविंदर कुमार जो खुद पुलिस में रहे हैं ने दयालपुर थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. खोजबीन के दौरान स्थानीय लड़कों ने बताया कि एक युवक को मारकर नाले में फेंका गया है. जब पुलिस ने गोताखोरों की मदद से खजूरी खास नाले से अंकित का शव निकाला, तो पूरा देश दहल गया.
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए, वे इंसानियत को शर्मसार करने वाले थे. अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू और अन्य धारदार हथियारों से किए गए 51 गहरे चोटों के निशान थे. डॉक्टरों के मुताबिक, उनके फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार किए गए थे कि अत्यधिक खून बहने के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी. पहचान मिटाने और सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से शव को गंदे नाले के कीचड़ में धकेल दिया गया था.
ताहिर हुसैन और अन्य 10 आरोपी
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले की जांच की और चार्जशीट दाखिल की. पुलिस ने अपनी जांच में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को इस पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड बताया. पुलिस का दावा था कि ताहिर हुसैन का घर दंगाइयों का ठिकाना बना हुआ था, जहां से तेजाब की बोतलें, गुलेल और पत्थर बरामद हुए थे. मार्च 2023 में अदालत ने ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से हत्या, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश की धाराएं तय की थीं.
इस मामले के आरोपी जिन्हें आज सजा मिली
- ताहिर हुसैन
- नजीम
- कासिम
- अनस
- जावेद
आरोपी जो बरी हो गए
- हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान
- समीर खान
- फिरोज
- गुलफाम
- शोएब आलम उर्फ बॉबी
- मुंतजिम उर्फ मूसा
कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ
अदालत के भीतर यह मामला लंबे समय तक कानूनी दांव-पेचों से गुजरा. आरोपियों की तरफ से कई बार जमानत याचिकाएं दाखिल की गईं. हाल ही में, सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया था कि यह एक युवा खुफिया अधिकारी की बर्बर हत्या का बेहद चौंकाने वाला मामला है, जिसमें जमानत का कोई आधार नहीं बनता.
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कोर्ट रूम के भीतर दोनों पक्षों की मुख्य दलीलें
- अभियोजन पक्ष यानि सरकारी वकील की दलीलें: सरकारी वकील ने कोर्ट में साफ कहा कि यह अचानक हुई कोई वारदात नहीं थी. आरोपियों का साझा उद्देश्य और गहरी साजिश बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाना थी. चूंकि अंकित शर्मा वहां अकेले पड़ गए, इसलिए भीड़ ने उन्हें पहचानकर पकड़ लिया. अदालत ने आरोप तय करते समय भी टिप्पणी की थी कि ताहिर हुसैन ने भीड़ को उकसाया था. जब अंकित भीड़ की तरफ बढ़े, तो ताहिर हुसैन के इशारे पर ही उन्हें निशाना बनाया गया. पुलिस ने कोर्ट के सामने कई स्थानीय गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स पेश किए, जो यह साबित करते हैं कि वारदात के वक्त सभी आरोपी घटना स्थल के आसपास ही मौजूद थे और एक-दूसरे के संपर्क में थे.
- आरोपियों के वकील की दलीलें: ताहिर हुसैन के वकीलों ने लगातार दलील दी कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाया गया है. दंगों के वक्त वे खुद अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे और उन्होंने पुलिस को भी फोन किया था. बचाव पक्ष का कहना था कि पुलिस के पास ऐसा कोई सीधा वीडियो या कोई दूसरा सबूत नहीं है, जो यह दिखाए कि ताहिर हुसैन या अन्य आरोपियों ने अपने हाथों से अंकित शर्मा पर चाकू से वार किए थे. वे सिर्फ भीड़ का हिस्सा होने के आधार पर सभी को हत्यारा नहीं ठहरा सकते.
अदालत की पिछली महत्वपूर्ण टिप्पणियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में एडिशनल सेशंस जज ने आरोप तय करते हुए एक बेहद तल्ख टिप्पणी की थी, जिसने इस केस की दिशा तय कर दी. अदालत ने कहा, "यह जरूरी नहीं है कि साजिश विशेष रूप से केवल अंकित शर्मा को ही मारने की रची गई हो. जब आरोपी व्यक्ति हिंदुओं को मारने के सामान्य उद्देश्य और साजिश के तहत काम कर रहे थे, तो उसमें अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल हो गई. अंकित को इसलिए मारा गया क्योंकि वह हिंदू थे और उस वक्त वहां अकेले पड़ गए थे."
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