अजीत डोभाल की सऊदी, UAE और अमेरिका के NSA के साथ मीटिंग क्यों चर्चा में है? जानिए वजह

भारत, अमेरिका और खाड़ी देश सऊदी और यूएई मिलकर एक मेगा प्रोजेक्ट (Mega Project) पर काम करने की योजना बना रहे हैं जो मध्य-पूर्व को रेल नेटवर्क (Rail Network) के माध्यम से जोड़ेगा. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य मध्य-पूर्व को समुद्र के जरिए भारत सहित दक्षिण एशिया से भी जोड़ना है. यह मध्य-पूर्व में चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट को टक्कर देगा.

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एनएसए अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष जेक सुलिवन से सऊदी अरब में मुलाकात की है.
वाशिंगटन:

अमेरिका (America) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन ने रविवार को सऊदी अरब में अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल (Ajit Doval) से मुलाकात की. इसके बारे में व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस महीने के अंत में ऑस्ट्रेलिया में क्वाड शिखर सम्मेलन (Quad Summit) में फिर से मिलेंगे. दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात के बाद भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जल्द ही एक प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं, जो मध्य-पूर्व के देशों को रेल नेटवर्क के माध्यम से जोड़ेगा. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के जरिए मध्य-पूर्व को समुद्री लेन के माध्यम से दक्षिण एशिया से जोड़ने की योजना है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इसी संबंध में रविवार को अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अपने समकक्षों से सऊदी अरब में मुलाकात की.

जल्द  शुरू हो सकता है महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 
अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सिओस की खबर के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर चर्चा की. अमेरिका चाहता है कि इस प्रोजेक्ट में भारत की रेल नेटवर्क का जाल बिछाने की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाए. अमेरिका इस प्रोजेक्ट के जरिए मध्य-पूर्व  में चीन और उसके महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के बढ़ते प्रभाव को कम करना चाहता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट, जिसे ब्लू डॉट नेटवर्क कहा जा रहा है, की नींव पहली बार 18 महीने पहले I2U2 फोरम में बातचीत के दौरान पड़ी थी.

भारत- अमेरिका के प्रोजेक्ट से चीन क्यों हो रहा है परेशान?
इस फोरम में भारत, इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल है. भारत और अमेरिका के इस प्रोजेक्ट से चीन के हितों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए चीन इसे लेकर चिंतित है. 2021 के अंत में इस फोरम को मध्य-पूर्व में सामरिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर चर्च के लिए बनाया गया था. बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने गुरुवार को वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी में अपने एक भाषण के दौरान संकेत दिया था कि इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जा सकता है. 

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