World Cancer Day 2026: आज की जिंदगी मोबाइल स्क्रीन, प्लास्टिक की बोतलों और परफ्यूम की खुशबू के बिना अधूरी लगती है. सुबह मोबाइल अलार्म से उठना, पानी प्लास्टिक बोतल से पीना और बाहर निकलते वक्त परफ्यूम लगाना ये सब हमारी डेली रूटीन का हिस्सा हैं. लेकिन सोशल मीडिया और खबरों में बार-बार यह सवाल उठता है कि क्या यही आदतें धीरे-धीरे हमें कैंसर की ओर धकेल रही हैं? कहीं ये सब सिर्फ डर फैलाने वाली बातें तो नहीं, या सच में कोई खतरा छिपा है? आज वर्ल्ड कैंसर डे के मौके पर इस लेख में हम मिथ्स और फैक्ट्स के बारे में समझेंगे कि BPA, माइक्रोप्लास्टिक और केमिकल फ्रेगरेंस की सच्चाई क्या है.
मोबाइल, प्लास्टिक और परफ्यूम से जुड़े मिथ्स और फैक्ट्स | Myths and Facts Related to Mobile phones, Plastic, and Perfumes
मिथ: मोबाइल की रेडिएशन से सीधा कैंसर हो जाता है?
फैक्ट: अब तक की बड़ी स्टडीज के अनुसार मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होती है, जो DNA को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाती. WHO ने इसे संभावित जोखिम की कैटेगरी में रखा है, यानी पुख्ता सबूत अभी नहीं हैं.
सेफ टिप: लंबे समय तक कॉल पर रहने से बचें, ईयरफोन या स्पीकर का इस्तेमाल करें.
मिथ: हर तरह का प्लास्टिक कैंसर पैदा करता है?
फैक्ट: सभी प्लास्टिक एक जैसे नहीं होते. कुछ प्लास्टिक में पाया जाने वाला BPA (Bisphenol A) हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकता है. कई स्टडीज में इसे ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर जैसे जोखिमों से जोड़ा गया है, लेकिन यह सीधा कारण साबित नहीं हुआ है.
सेफ टिप: BPA-free बोतलें इस्तेमाल करें, गरम खाना प्लास्टिक में न रखें.
मिथ: माइक्रोप्लास्टिक तुरंत कैंसर कर देता है?
फैक्ट: माइक्रोप्लास्टिक बहुत छोटे प्लास्टिक कण होते हैं जो पानी, नमक और यहां तक कि हवा में भी पाए गए हैं. रिसर्च अभी शुरुआती स्टेज में है. वैज्ञानिक मानते हैं कि ये शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ा सकते हैं, लेकिन कैंसर से सीधा लिंक अभी साफ नहीं है.
सेफ टिप: फिल्टर्ड पानी पिएं, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक कम करें.
Add image caption here
मिथ: हर परफ्यूम कैंसरकारक है?
फैक्ट: कुछ सस्ते परफ्यूम और डियोड्रेंट्स में फ्थेलेट्स और सिंथेटिक फ्रेगरेंस होते हैं, जो हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं. लंबे समय तक ज्यादा एक्सपोजर नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन सीमित इस्तेमाल से बड़ा खतरा साबित नहीं हुआ है.
सेफ टिप: माइल्ड, नेचुरल या फ्रेगरेंस-फ्री प्रोडक्ट्स चुनें.
डर या समझदारी?
सच यह है कि हमारी रोजमर्रा की चीजें अकेले कैंसर का कारण नहीं बनतीं, लेकिन लंबे समय तक और जरूरत से ज्यादा एक्सपोजर जोखिम बढ़ा सकता है. घबराने की बजाय समझदारी से चुनाव करना जरूरी है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














