Nipah Virus Outbreak: जब भी निपाह वायरस का नाम सामने आता है, तो लोगों के मन में डर बैठ जाता है. भले ही इसके मामले बहुत ज्यादा न हों, लेकिन हर बार इसके जिक्र के साथ ही हेल्थ अलर्ट जारी हो जाते हैं, अस्पतालों में सतर्कता बढ़ा दी जाती है और सरकारें तुरंत एक्शन मोड में आ जाती हैं. सवाल यह है कि आखिर निपाह वायरस को लेकर डर इतना ज्यादा क्यों है? दरअसल, निपाह वायरस आम वायरल बीमारियों जैसा नहीं है. यह एक रेयर लेकिन बेहद खतरनाक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है और बहुत कम समय में जानलेवा रूप ले सकता है. इसके लक्षण शुरुआत में सामान्य लगते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह दिमाग पर हमला कर सकता है. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स निपाह वायरस को हल्के में लेने की गलती नहीं करते. आइए जानते हैं वो 5 बड़ी वजहें, जो निपाह वायरस को इतना खतरनाक बनाती हैं.
निपाह वायरस से क्यों डरना चाहिए? | Why Should We be Afraid of the Nipah Virus?
1. निपाह वायरस की मृत्यु दर बहुत ज्यादा है-
निपाह वायरस से होने वाली बीमारी की सबसे डरावनी बात है इसकी हाई डेथ रेट. कई मामलों में मृत्यु दर 40% से 75% तक बताई गई है. यानी संक्रमित होने वाले हर 2-3 मरीजों में से 1 की जान जाने का खतरा. इतनी ज्यादा मृत्यु दर इसे सामान्य फ्लू, डेंगू या कोविड जैसी बीमारियों से कहीं ज्यादा खतरनाक बनाती है.
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2. शुरुआत में लक्षण बहुत सामान्य होते हैं-
निपाह वायरस का दूसरा बड़ा खतरा यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बिल्कुल आम बीमारियों जैसे होते हैं बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द. अक्सर लोग इसे वायरल फीवर या फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन, कुछ ही समय में यह बीमारी एन्सेफलाइटिस (दिमाग की सूजन) में बदल सकती है, जो जानलेवा साबित होती है.
3. यह सीधे दिमाग पर हमला करता है-
निपाह वायरस सिर्फ फेफड़ों या गले तक सीमित नहीं रहता. यह दिमाग तक पहुंचकर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा करता है. मरीज को भ्रम, बेहोशी, झटके और कोमा तक हो सकता है.
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जब कोई वायरस सीधे ब्रेन को प्रभावित करता है, तो उसका इलाज और मैनेजमेंट बेहद मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि डॉक्टर निपाह को सबसे खतरनाक वायरसों में गिनते हैं.
4. इसका कोई पक्का इलाज या वैक्सीन नहीं है-
आज भी निपाह वायरस के लिए कोई स्पेसिफिक दवा उपलब्ध नहीं है, कोई अप्रूव्ड वैक्सीन नहीं है. इलाज सिर्फ सपोर्टिव केयर बेस्ड होता है, जैसे: ऑक्सीजन देना, ICU में निगरानी, दिमाग और सांस से जुड़ी जटिलताओं को संभालना. इलाज का यह सीमित विकल्प डर को और बढ़ा देता है.
5. इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता
निपाह वायरस सिर्फ जानवरों से ही नहीं, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड्स, नजदीकी संपर्क के जरिए मानव से मानव भी फैल सकता है. यही वजह है कि अस्पतालों में इसके मरीजों को अलग रखा जाता है और हेल्थ वर्कर्स को PPE किट पहननी पड़ती है. अगर समय रहते कंट्रोल न किया जाए, तो यह आउटब्रेक का रूप ले सकता है.
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निपाह वायरस कैसे फैलता है? | How Does the Nipah Virus Spread?
- फल खाने वाले चमगादड़ों से.
- संक्रमित फलों या जूस से.
- संक्रमित जानवरों (जैसे सूअर) से.
- संक्रमित इंसान के संपर्क से.
डर का मतलब घबराहट नहीं, सतर्कता है:
निपाह वायरस का डर इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह तेज, घातक और अनिश्चित है. लेकिन, डर का मतलब यह नहीं कि घबराया जाए. साफ-सफाई, संदिग्ध लक्षणों पर तुरंत जांच, संक्रमित स्रोतों से दूरी. इन उपायों से इस वायरस को फैलने से रोका जा सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














