कौन है 100 साल के जवान देवी प्रसाद बिदुआ? जानें उनकी डाइट और फिटनेस का राज

छतरपुर के देवी प्रसाद बिडुआ यह साबित करते हैं कि लंबी और हेल्दी जिंदगी किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि सादगी, मेहनत और देसी खानपान से मिलती है. दूध, घी, मोटे अनाज और रोज़ की शारीरिक मेहनत ने उन्हें 100 साल की उम्र में भी फिट और एक्टिव बनाए रखा है. उनकी लाइफस्टाइल आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.

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कौन है 100 साल के जवान देवी प्रसाद बिडुआ?

Live Long: आज के दौर में जहां 40–50 की उम्र में ही लोग बीमारियों से जूझने लगते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के देवी प्रसाद बिडुआ इस साल 2026 में 100 साल के होने जा रहे हैं और आज भी पूरी तरह हेल्दी हैं. उनकी लंबी उम्र का राज है सादा जीवन, मेहनत और देसी आहार. एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने जो बताया, वह आज के युवाओं के लिए किसी हेल्थ गाइड से कम नहीं है.

100 साल की उम्र में भी फुल एक्टिव

देवी प्रसाद बिडुआ आज भी अपने सारे काम खुद करते हैं. वो रोज अपने घर से खेतों तक पैदल जाते हैं, जानवरों के लिए हाथ से चारा काटते हैं, कपड़े धोते हैं, बिस्तर लगाते हैं और सीढ़ियां चढ़ते–उतरते हैं. नहाने के बाद भगवान शिव को जल अर्पित करना उनकी रोज की दिनचर्या है. इस उम्र में भी उनका चलना-फिरना, बोलना और देखना बिल्कुल सामान्य है. वह बिना किसी सहारे के अपना पूरा जीवन जी रहे हैं.

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बीमारियों से दूर और इम्यूनिटी मजबूत

देवी प्रसाद का कहना है कि वह आज तक किसी बड़ी बीमारी का शिकार नहीं हुए. उनकी सुनने, बोलने और देखने की क्षमता अब भी अच्छी है. डॉक्टरों के मुताबिक, इतनी उम्र में ऐसा स्वास्थ्य बहुत दुर्लभ है. यह उनकी मजबूत इम्यूनिटी और संतुलित जीवनशैली का नतीजा है.

क्या खाते हैं 100 साल के देवी प्रसाद?

उनका खानपान पूरी तरह देसी और प्राकृतिक है. बचपन से ही वे दूध और घी का सेवन करते आ रहे हैं. इसके अलावा उन्हें गेहूं की कटी दलिया पसंद है. देवी प्रसाद आज भी महुआ मुरक्का, महुआ लड्डू, महुआ डुबरी, ज्वार और कुदई जैसे मोटे अनाज खाते हैं. कम दांतों के कारण वह सब कुछ नहीं खा पाते, लेकिन फिर भी उनका खाना पोषण से भरपूर है. आज भी वह एक बार में 6 रोटियां और आधा किलो दूध आराम से ले लेते हैं, जो कई युवाओं की डाइट से कहीं ज्यादा है.

खेतों में करते हैं काम

एक ऐसी उम्र में जब ज्यादातर लोग बिस्तर पर होते हैं, देवी प्रसाद आज भी खेतों में काम करते हैं और जानवरों के लिए चारा काटते हैं. उनका कहना है कि शरीर को जितना चलाएंगे, वह उतना ही साथ देगा. यही सोच उन्हें आज भी जवान बनाए हुए है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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