How To Prevent Sports Injuries : खेलों में हिस्सा लेना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. यह न सिर्फ शरीर को चुस्त बनाता है, बल्कि मन को भी तरोताजा करता है. लेकिन खेलते समय चोट लगना एक आम बात है. ये चोटें कभी अचानक लगती हैं, तो कभी समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती हैं. ऐसे में जरूरी है कि हम इन चोटों को पहचानें, उनसे बचने के उपाय अपनाएं और समय पर इलाज कराएं. याद रखिए, एक चोट आपको खेल से दूर कर सकती है, लेकिन सही देखभाल से आप पहले से भी मजबूत होकर वापसी कर सकते हैं.
स्पोर्ट्स इंजरी से कैसे बचें? (How to prevent sports injuries?)
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खेल के दौरान चोट क्यों लगती हैं?
जब हम कोई खेल खेलते हैं या कोई शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर के कुछ हिस्सों पर ज्यादा दबाव पड़ता है. तेज़ दौड़ना, उछलना, टकराना, गिरना या अचानक मुड़ना . ये सब कारण बन सकते हैं चोट के. कभी-कभी बिना गर्म किए हुए शरीर से सीधा खेल शुरू कर देना भी परेशानी खड़ी कर सकता है. खासकर उन खेलों में जहां तेज़ गति और शरीर के संपर्क की ज़रूरत होती है, वहां चोट लगने का खतरा ज्यादा होता है. फुटबॉल, बास्केटबॉल, क्रिकेट, कुश्ती, और एथलेटिक्स जैसे खेलों में यह आम बात है.
चोटें किस तरह की होती हैं?
खेलों के दौरान लगने वाली चोटें कई प्रकार की हो सकती हैं:
मांसपेशियों में खिंचाव- जब किसी मांसपेशी पर ज़्यादा दबाव पड़ता है और वह खिंच जाती है. अधिकतर मामलों में यह चोट हल्की होती है, लेकिन अगर पूरी मांसपेशी फट जाए तो इलाज जरूरी हो जाता है.
मोच- जब जोड़ के आसपास की रगें या लिगामेंट खिंच जाते हैं. यह अधिकतर टखने, घुटने या कलाई में होती है.
हड्डी टूटना या चटकना- अचानक गिरने या टकराने से हड्डी पर ज़ोर पड़ता है, जिससे वह टूट सकती है या उसमें दरार आ सकती है.
जोड़ का अपनी जगह से हटना- . जैसे कंधे का जोड़ अपनी सामान्य स्थिति से बाहर निकल जाना.
कन्कशन- सिर पर तेज़ चोट लगने से दिमाग को झटका लग सकता है, जिसे कन्कशन कहा जाता है.
टेंडन या लिगामेंट की चोट- लंबे समय तक एक ही एक्टिविटी करने से रगों में सूजन या फटना हो सकता है. उदाहरण के लिए, टेनिस एल्बो या गोल्फर एल्बो.
शरीर के कौन से हिस्से ज़्यादा प्रभावित होते हैं?
- कुछ अंग ऐसे होते हैं जो खेल के दौरान बार-बार इस्तेमाल होते हैं और चोट के लिए अधिक संवेदनशील रहते हैं:
- घुटने- दौड़ने, कूदने और मुड़ने में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है. ACL और PCL जैसी चोटें आम हैं.
- टखने और एड़ियां . खासकर फुटबॉल और बास्केटबॉल जैसे खेलों में मोच और फ्रैक्चर आम हैं.
- कंधा- तैराकों, क्रिकेटरों और टेनिस खिलाड़ियों में कंधे की चोटें आम हैं.
- कोहनी- लंबे समय तक एक ही तरह की गति दोहराने से इसमें दर्द और सूजन आ सकती है.
- पिंडली और पैर की मांसपेशियां . ज़्यादा दौड़ने से थकान या चोट हो सकती है.
- सिर- टक्कर या गिरने से सिर में गहरी चोट लग सकती है, जो गंभीर भी हो सकती है.
लक्षण क्या होते हैं?
खेल में लगी चोट के कुछ आम संकेत ये हो सकते हैं:
- दर्द या जलन
- सूजन या रंग बदलना
- हड्डी का बाहर दिखना या जोड़ का टेढ़ा होना
- हिलाने-डुलाने में दिक्कत
- चलने या वजन डालने में तकलीफ़
अगर ये लक्षण गंभीर लगें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
इलाज कैसे किया जाता है?
अगर चोट हल्की हो तो घर पर भी उसकी देखभाल की जा सकती है. इसके लिए सबसे सामान्य तरीका है:
RICE तकनीक-
R-आराम
I-बर्फ लगाना
C-पट्टी बांधना
E-चोट वाले हिस्से को ऊंचाई पर रखना
अगर चोट ज़्यादा गंभीर हो तो डॉक्टर से मिलकर जांच करवानी चाहिए. कभी-कभी एक्स-रे, एमआरआई या स्कैन की ज़रूरत भी पड़ती है. डॉक्टर की सलाह पर दवाएं, फिजियोथेरेपी, या सर्जरी तक की ज़रूरत हो सकती है.
कैसे बचा जा सकता है?
हर खेल में जोखिम होता है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर चोट से बचा जा सकता है:
- खेलने से पहले हल्का व्यायाम और खिंचाव करें
- सही जूते और सुरक्षा उपकरण पहनें
- थके हुए शरीर से न खेलें
- ज़रूरत से ज़्यादा जोर न लगाएं
- शरीर की सीमाओं को पहचानें
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)