जिम नहीं, पहाड़ों की बर्फ और पेड़ों के बीच छिपा है Vidyut Jammwal की फिटनेस का राज, साल में एक बार करते हैं ये खास काम

अभिनेता विद्युत जामवाल अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए साल में एक बार 'सहज योग' का अभ्यास करते हैं. यह योग शरीर के न्यूरोरिसेप्टर्स को सक्रिय कर बैलेंस और मेंटल फोकस बढ़ाता है. कलरिपयट्टू के माहिर विद्युत इसे प्रकृति से जुड़ने और मानसिक शांति पाने का सबसे बेहतरीन तरीका मानते हैं.

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विद्युत ने इस योग के कई वैज्ञानिक और शारीरिक फायदे बताए हैं, जो इसे बाकी एक्सरसाइज से अलग बनाते हैं.

Sahaj yog ka hai :  एक्टर और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर खासा सजग रहते हैं. विद्युत जामवाल का मानना है कि प्रकृति के बीच समय बिताने से स्वास्थ्य और भी बेहतर हो जाता है. इसी वजह से वह हर साल एक बार सहज योग का अभ्यास करते हैं. यह अभ्यास उन्हें शारीरिक संतुलन, मानसिक एकाग्रता और प्रकृति से गहरा जुड़ाव देता है. जिसको लेकर हाल ही में अभिनेता ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक खास वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह सहज योग का अभ्यास करते नजर आए.

उन्होंने पोस्ट में बताया, "कलरिपयट्टू के प्रैक्टिशनर के रूप में मैं साल में एक बार सहज योग का अभ्यास करता हूं. सहज का मतलब है प्राकृतिक सहजता और सहज प्रवृत्ति की स्थिति में लौटना, जिससे प्रकृति और अंदरूनी जागरूकता से गहरा जुड़ाव बनता है."

विद्युत जामवाल ने सहज योग का अर्थ बताने के साथ ही उसके अभ्यास से मिलने वाले फायदों को भी गिनाया. जिसके बारे में हम आपको आगे आर्टिकल में विस्तार से बता रहे हैं.

सहज योग के फायदे

विद्युत ने इस योग के कई वैज्ञानिक और शारीरिक फायदे बताए हैं, जो इसे बाकी एक्सरसाइज से अलग बनाते हैं:


विद्युत जामवाल बताया कि यह अभ्यास शरीर की प्राकृतिक संवेदनाओं को जागृत करता है. इससे दिमाग और शरीर के बीच बेहतर कनेक्शन बनता है, और संतुलन बढ़ता है. उन्होंने बताया, "वैज्ञानिक रूप से यह कई न्यूरोरिसेप्टर्स और प्रोप्रियोसेप्टर्स को एक्टिवेट करता है, जिससे सेंसरी फीडबैक बेहतर होता है और बैलेंस और कोऑर्डिनेशन में सुधार होता है. इससे शरीर के बारे में ज्यादा जागरूकता और मानसिक फोकस बढ़ता है और प्रकृति से जुड़ाव का गहरा एहसास होता है."

वहीं, वीडियो में वह कभी पेड़ों पर चढ़ते तो कभी पहाड़ों पर घंटों बर्फ के अंदर ध्यान करते नजर आए.

कलरिपयट्टू भी विद्युत जानते हैं

आपको बता दें कि विद्युत कलरिपयट्टू भी जानते हैं, जो केरल की प्राचीन मार्शल आर्ट है. इसे दुनिया की सबसे पुरानी लड़ाई की कला माना जाता है. इसका नाम 'कलरी' और 'पयट्टू' से मिलकर बना है. यह तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से चली आ रही है. इसमें मुक्के, लात, कुश्ती, हथियारों का इस्तेमाल (जैसे तलवार, भाला, उरुमी), और पहले से तय फॉर्म शामिल हैं. साथ ही इसमें आयुर्वेदिक मसाज भी हैं. योद्धाओं को लचीलापन, ताकत और फोकस सिखाने के लिए यह बहुत प्रभावी है. विद्युत कई फिल्मों में भी कलरिपयट्टू करते नजर आए.

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कलरिपयट्टू में योग के तत्व मिलते हैं, जैसे जानवरों से प्रेरित मुद्राएं और सांस नियंत्रण. विद्युत जामवाल कलरिपयट्टू के माहिर हैं और अपनी फिल्मों में स्टंट खुद करते हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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