Two successful births from placenta-derived stem cell therapy In India: प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सर गंगा राम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से पीड़ित महिलाओं का नाल से प्राप्त स्टेम सेल (Stem Cell) के माध्यम से उपचार कर दो सफल जीवित जन्म की रिपोर्ट दी है. यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आई है जो बांझपन (Infertility) के सबसे कठिन कारणों में से एक से जूझ रही हैं. यह शोध अस्पताल के सेंटर ऑफ आईवीएफ एंड ह्यूमन रिप्रोडक्शन द्वारा अस्पताल के बायोटेक्नोलॉजी एवं रिसर्च विभाग के सहयोग से किया गया है. यह अध्ययन अस्पताल की रिसर्च सेल के अंतर्गत पंजीकृत एक चल रहे क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा है, जिसे संस्थान द्वारा आंतरिक रूप से वित्तीय सहायता दी जा रही है.
गंभीर गर्भाशय क्षति से जूझ रही महिलाओं के लिए उम्मीद
एशरमैन सिंड्रोम (Asherman Syndrome) एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की गुहा (Uterine Cavity) आंशिक या पूरी तरह से बंद हो जाती है. यह समस्या आमतौर पर बार-बार डाइलेशन (Dilation) और क्यूरेटेज संक्रमण (Curettage Infection) या गर्भाशय की सर्जरी (Surgery) के बाद होती है. गंभीर मामलों में गर्भाशय इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि गर्भधारण करना लगभग असंभव हो जाता है. इस चुनौती से निपटने के लिए डॉक्टरों ने नाल के व्हार्टन जेली (Wharton Jelly) से प्राप्त मेसेनकाइमल स्टेम सेल (Mesenchymal Stem cell) का उपयोग किया. यह स्रोत अपनी उच्च पुनर्योजी क्षमता, आसान उपलब्धता, कम प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और बिना आक्रामक प्रक्रिया के प्राप्त होने के लिए जाना जाता है.
भारत से पहली तरह की तकनीक
इस अभिनव प्रक्रिया में नाल से प्राप्त मेसेनकाइमल स्टेम सेल को हिस्टेरोस्कोपिक मार्गदर्शन में आईवीएफ ओवम पिक-अप नीडल की सहायता से सीधे एंडोमेट्रियम के नीचे इंजेक्ट किया गया. इस तकनीक की विशेषताएँ:
- स्टेम सेल को सीधे बेसल लेयर में सब-एंडोमेट्रियल (Sub-Endometrial) तरीके से इंजेक्ट किया गया, जो गर्भाशय की परत के पुनर्जनन के लिए जिम्मेदार होती है.
- इस प्रक्रिया में उन स्कैफोल्ड (Scaffold) या बायोमैटेरियल (Biometrial) का उपयोग नहीं किया गया जो पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में इस्तेमाल किए गए थे.
- यह तकनीकी रूप से सरल और अधिक लक्षित है, जिससे पुनर्जनन के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह भारत से इस तकनीक की पहली रिपोर्ट है और वैश्विक स्तर पर भी ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है.
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अब तक दो सफल जन्म
पायलट क्लिनिकल ट्रायल में कुल 10 मरीजों को शामिल किया गया है, जो सभी गंभीर और उपचार-प्रतिरोधी एशरमैन सिंड्रोम से पीड़ित हैं.
अब तक:
- दो मरीजों ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है.
- आठ मरीज अभी फॉलो-अप और मूल्यांकन के चरण में हैं.
केस की मुख्य झलक
केस 1:
39 वर्षीय महिला, जिनमें गर्भपात के उपचार के बाद गंभीर गर्भाशय चिपकाव विकसित हो गया था, को स्टेम सेल थेरेपी दी गई. मासिक धर्म के प्रवाह और एंडोमेट्रियल मोटाई में सुधार के बाद एम्ब्रियो ट्रांसफर (Embryo Transfer) किया गया, जिससे 35 सप्ताह में 2.0 किलोग्राम वजन वाले स्वस्थ पुत्र का जन्म हुआ.
केस 2:
40 वर्षीय महिला, जिन्हें बार-बार गर्भपात और गंभीर इंट्रा-यूटेरिन एडहेशन (Intra Uterine Adhesions) की समस्या थी, ने भी यह प्रक्रिया कराई. गर्भाशय के पुनर्जनन और एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद उन्होंने 31 सप्ताह में 1.8 किलोग्राम वजन की बेटी को एलएससीएस (सी-सेक्शन) के माध्यम से जन्म दिया.
गर्भाशय स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार
डॉक्टरों ने स्टेम सेल थेरेपी के बाद कई महत्वपूर्ण सुधार देखे, जिनमें शामिल हैं:
- एंडोमेट्रियल मोटाई में वृद्धि
- मासिक धर्म के प्रवाह में सुधार
- इंट्रा-यूटेरिन एडहेशन स्कोर में कमी
इन सुधारों के कारण सफल फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर और गर्भधारण संभव हो सका.
सीमित विकल्पों में संभावित नया समाधान
गंभीर एशरमैन सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं के पास अक्सर बहुत कम प्रजनन विकल्प होते हैं और कई मामलों में उन्हें सरोगेसी या गोद लेने का सहारा लेना पड़ता है. भारत में सरोगेसी से संबंधित कड़े नियमों के बीच, नाल से प्राप्त स्टेम सेल पर आधारित यह पुनर्योजी उपचार उन महिलाओं के लिए एक संभावित समाधान बन सकता है जिनके गर्भाशय को पहले लगभग अनुपचार्य माना जाता था.
अध्ययन के बारे में
यह शोध वर्तमान में हॉस्पिटल में क्लिनिकल ट्रायल के रूप मे 10 मरीजों पर चल रहा है , जिनमें से दो में सफल जीवित जन्म हो चुके हैं.
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि चल रहा ट्रायल सकारात्मक परिणाम देता रहता है, तो स्टेम सेल थेरेपी भविष्य में गंभीर एशरमैन सिंड्रोम के इलाज में एक परिवर्तनकारी उपचार बन सकती है.
सेंटर ऑफ आईवीएफ एंड ह्यूमन रिप्रोडक्शन की निदेशक डॉ. आभा मजूमदार ने कहा कि यह उपलब्धि गंभीर एशरमैन सिंड्रोम के इलाज में एक महत्वपूर्ण प्रगति है. नाल से प्राप्त स्टेम सेल का उपयोग कर गर्भाशय की परत को पुनर्जीवित किया जा सकता है, जिससे महिलाओं को मातृत्व का अवसर मिल सकता है. उनकी विकसित की गई सब-एंडोमेट्रियल इंजेक्शन तकनीक प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाती है, जो भविष्य में इस उपचार को वैश्विक स्तर पर अपनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














