मुंह के बैक्टीरिया से मल्टीपल स्क्लेरोसिस की समस्या और बढ़ सकती है- स्टडी में हुआ खुलासा

Oral Bacterium: रिसर्च में पाया गया कि एमएस मरीजों में इस बैक्टीरिया की अधिक मात्रा होने पर विकलांगता स्कोर (ईडीएसएस) ऊंचा होता है, जो सूजन और न्यूरोडीजेनेरेशन को बढ़ावा दे सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Oral Bacterium: मुंह के बैक्टीरिया.

मसूड़ों की गंभीर बीमारी (पेरियोडोंटाइटिस) का असर मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) से पीड़ित लोगों पर ज्यादा पड़ता है. एमएस, सेंट्रल नर्वस सिस्टम की एक पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है. पिछले अध्ययनों से पता चला है कि पेरियोडोंटाइटिस, पुरानी सूजन के जरिए सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर डाल सकता है. हालांकि, मल्टीपल स्क्लेरोसिस में इसकी भूमिका स्पष्ट नहीं है.

साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में छपी नई रिसर्च में पाया गया कि मुंह में पाए जाने वाले बैक्टीरिया फ्यूसोबैक्टीरियम न्यूक्लियेटम का बढ़ा स्तर मल्टीपल स्क्लेरोसिस पीड़ितों में विकलांगता को लगभग दस गुना बढ़ा सकता है. एमएस में लोगों को चलने-फिरने में दिक्कत आ सकती है और दृष्टिबाधिता की शिकायत भी हो सकती है.

हिरोशिमा यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में एसोसिएट प्रोफेसर और लेक्चरर मासाहिरो नाकामोरी ने कहा, "मल्टीपल स्क्लेरोसिस में गट माइक्रोबायोम की बड़े पैमाने पर जांच की गई है, लेकिन ओरल माइक्रोबायोम की भूमिका को ज्यादातर नजरअंदाज किया गया है. ओरल कैविटी पुरानी सूजन का एक बड़ा सोर्स है, इसलिए मल्टीपल स्क्लेरोसिस के गंभीर प्रभाव और बचाव के नए तरीके इजाद करने के लिए इनके बीच के संबंधों को समझने की जरूरत है."

ये भी पढ़ें- New Year 2026: इन 5 अंगों को बर्बाद कर देती है खाली पेट शराब पीने की गलती, सिर्फ नशा नहीं, बॉडी शॉक है ये 

Advertisement

टीम ने देखा कि फ्यूसोबैक्टीरियम न्यूक्लियेटम की ज्यादा मात्रा वाले मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लगभग दो-तिहाई (61.5 प्रतिशत) मरीजों का रोग मध्यम से गंभीर श्रेणी में पहुंच गया.

न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर या माइलिन ऑलिगोडेंड्रोसाइट ग्लाइकोप्रोटीन एंटीबॉडी से जुड़ी बीमारी वाले मरीजों में ऐसा कोई संबंध नहीं देखा गया. फ्यूसोबैक्टीरियम न्यूक्लियेटम और कम से कम एक दूसरे पेरियोडोंटल पैथोजन वाले एमएस मरीजों की स्थिति और बिगड़ी हुई पाई गई.

Advertisement

मुंह के बैक्टीरिया मल्टीपल स्क्लेरोसिस के मरीजों के हालात और बिगाड़ सकते हैं. रिसर्च में पाया गया कि एमएस मरीजों में इस बैक्टीरिया की अधिक मात्रा होने पर विकलांगता स्कोर (ईडीएसएस) ऊंचा होता है, जो सूजन और न्यूरोडीजेनेरेशन को बढ़ावा दे सकता है. यह बैक्टीरिया पीरियोडॉन्टाइटिस (मसूड़ों की बीमारी) से जुड़ा है और एमएस के लक्षणों को बिगाड़ सकता है.

हालांकि, कुछ अध्ययन इस लिंक को पूरी तरह पुष्ट नहीं करते और कहते हैं कि कोई सीधा संबंध नहीं मिला. एमएस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, और ओरल हेल्थ का इससे कनेक्शन नई रिसर्च का विषय है.

World Heart Day: दिल की बीमार‍ियां कैसे होंगी दूर, बता रहे जाने-माने पद्मभूषण डॉक्‍टर TS Kler

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

Featured Video Of The Day
Donald Trump का 48 Hours Ultimatum: Iran का पलटवार, Dimona Nuclear Site पर हुआ भयंकर हमला