Nipah Virus Alert: भारत से आने वालों पर म्यांमार की कड़ी नजर, यांगून एयरपोर्ट पर कसी नकेल

Nipah Virus Update: यांगून एयरपोर्ट पर भारत से आने वाले यात्रियों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. यात्रियों में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत और अन्य निपाह से जुड़े लक्षणों की जांच की जा रही है.

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Nipah Virus Alert: पड़ोसी देश म्यांमार ने भी निपाह को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है.

Nipah Virus Outbreak: दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है और इसी बीच निपाह वायरस को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामलों के सामने आने के बाद पड़ोसी देश म्यांमार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है. इसी कड़ी में म्यांमार के यांगून इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी को और सख्त कर दिया गया है, ताकि निपाह वायरस के संभावित प्रवेश को रोका जा सके.

म्यांमार के सरकारी अखबार द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है. खासतौर पर भारत से आने वाले यात्रियों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. यात्रियों में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत और अन्य निपाह से जुड़े लक्षणों की जांच की जा रही है. यह सारी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के अनुसार की जा रही है, ताकि किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके.

एयरपोर्ट पर क्या-क्या कदम उठाए गए हैं?

हेल्थ चेकअप के साथ-साथ यात्रियों को जागरूक करने के लिए एयरपोर्ट पर जानकारी से भरे पर्चे (लीफलेट्स) बांटे जा रहे हैं और जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं. इनमें निपाह वायरस के लक्षण, बचाव के उपाय और सतर्कता से जुड़ी जानकारी दी जा रही है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर काम कर रहे कई विभागों के साथ मिलकर रोग नियंत्रण और रोकथाम के उपाय भी लागू किए जा रहे हैं.

यांगून के अलावा मांडले इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी इसी तरह की कड़ी निगरानी और हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है. हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक म्यांमार में निपाह वायरस का कोई संदिग्ध मामला सामने नहीं आया है.

निपाह वायरस क्या है और कितना खतरनाक है? | What is the Nipah Virus and How Dangerous Is It?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकती है और कुछ मामलों में इंसान से इंसान में भी फैलती है. यह वायरस इतना गंभीर है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे प्रायोरिटी पैथोजन की सूची में रखा है.

निपाह वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 में मलेशिया में हुई थी, जहां सूअर पालने वाले किसानों में इसका प्रकोप देखा गया. इसके बाद 1999 में सिंगापुर में भी इसके मामले सामने आए. साल 2001 से भारत और बांग्लादेश में इसके प्रकोप दर्ज किए जाने लगे. बांग्लादेश में तो लगभग हर साल इसके मामले सामने आते हैं, जबकि भारत में भी समय-समय पर इसके प्रकोप देखे जाते हैं, जिनमें 2026 का ताज़ा मामला शामिल है.

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इलाज और बचाव की स्थिति:

फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई पक्का टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है. अस्पतालों में यह वायरस करीबी संपर्क, भीड़भाड़ और खराब वेंटिलेशन के कारण तेजी से फैल सकता है. इसलिए संक्रमण से बचाव, साफ-सफाई, हाथ धोना और समय पर जांच बेहद जरूरी है.

म्यांमार द्वारा एयरपोर्ट पर की गई सख्त निगरानी यह दिखाती है कि निपाह वायरस को हल्के में नहीं लिया जा रहा. सतर्कता, जागरूकता और समय पर जांच ही इस खतरनाक वायरस से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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