भारत में अब बच रही लाखों मासूम जिंदगियां, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, मृत्यु दर में आई गिरावट

2000 में जहां हर 1,000 बच्चों में 92 की मौत हो जाती थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर लगभग 32 रह गई है. दक्षिण एशिया में 1990 से अब तक 76% और 2000 के बाद 68% की कमी दर्ज की गई है.

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2000 में जहां हर 1,000 बच्चों में 92 की मौत हो जाती थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर लगभग 32 रह गई है.

भारत ने पिछले कुछ दशकों में बच्चों की मौत को कम करने में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुकी है. संयुक्त राष्ट्र की UNIGME Report 2025 के अनुसार, देश में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में तेज गिरावट आई है. नवजात मृत्यु दर में 1990 से अब तक 70% की गिरावट दर्ज की गई है. 1990 में भारत की NMR 57 थी, जो अब 2024 में घटकर 17 रह गई है. 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 1990 के आंकड़ों की तुलना में 79% की भारी गिरावट देखी गई है. 1990 में U5MR 127 थी, जबकि 2024 में यह घटकर 27 रह गई.

2000 में जहां हर 1,000 बच्चों में 92 की मौत हो जाती थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर लगभग 32 रह गई है. दक्षिण एशिया में 1990 से अब तक 76% और 2000 के बाद 68% की कमी दर्ज की गई है. इस बदलाव में भारत का योगदान सबसे अहम रहा है, जो स्ट्रॉन्ग हेल्थ स्कीम और जागरूकता का नतीजा है.

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भारत में यह सुधार अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई प्रयास हैं:

1. टीकाकरण का बड़ा अभियान

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) ने लाखों बच्चों को खतरनाक बीमारियों से बचाया. समय पर लगने वाले टीकों ने निमोनिया, डायरिया और मलेरिया जैसी बीमारियों को काफी हद तक रोका.

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2. अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी

पहले ज्यादातर डिलीवरी घरों में होती थी, जिससे जोखिम ज्यादा रहता था. अब अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव बढ़ने से माँ और बच्चे दोनों की जान बच रही है.

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3. नवजात शिशु की बेहतर देखभाल

जन्म के तुरंत बाद बच्चों की देखभाल में सुधार हुआ है. Special Newborn Care Units (SNCU) और ट्रेंड स्टाफ की वजह से नवजात की जान बचाना आसान हुआ है.

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4. IMNCI जैसी योजनाएं

IMNCI नवजात एवं बाल्यकालीन बीमारियों का एकीकृत प्रबंधन (Integrated Management of Neonatal and Childhood Illness) जैसी योजनाओं ने बच्चों की बीमारियों की जल्दी पहचान और इलाज को बढ़ावा दिया है.

किन बीमारियों से मौत कम हुई?

सरकारी प्रयासों से कई जानलेवा बीमारियों पर कंट्रोल पाया गया है:

  • निमोनिया
  • डायरिया
  • मलेरिया
  • जन्म के समय होने वाली जटिलताएं

इन बीमारियों का समय पर इलाज और रोकथाम ही बच्चों की जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी वजह बनी है.

नवजात और छोटे बच्चों में बड़ा सुधार

  • 2000 के बाद नवजात बच्चों की मौत में लगभग 60% की कमी
  • 1 से 5 साल के बच्चों की मौत में 75% से ज्यादा गिरावट
  • 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 1990 के आंकड़ों की तुलना में 79% की भारी गिरावट देखी गई है. 

सरकार ने क्या बड़े कदम उठाए?

भारत सरकार ने इस दिशा में कई मजबूत कदम उठाए:

  • ट्रेंड डॉक्टर और नर्स की मदद से डिलीवरी.
  • नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल इकाइयां (Special Newborn Care Units) की संख्या बढ़ाना
  • गर्भावस्था के दौरान रेगुलर जांच.
  • जन्म के बाद माँ और बच्चे की देखभाल को मजबूत करना.

इन प्रयासों ने स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया.

अभी क्या चुनौतियां बाकी हैं?

हालांकि प्रगति शानदार है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी सामने हैं:

  • नवजात बच्चों की मौत अभी भी ज्यादा है.
  • समय से पहले जन्म (Premature Birth) बड़ी समस्या बना हुआ है.
  • गांव और शहर के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं का अंतर.
  • इन समस्याओं पर काम करना बेहद जरूरी है.

आगे का लक्ष्य क्या है?

  • 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को 25 से कम करना
  • नवजात मृत्यु दर को 12 से कम लाना.

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार और हेल्थ सिस्टम लगातार काम कर रहे हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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