Covid Dementia Risk: कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में लाखों लोग संक्रमण से ठीक तो हो गए, लेकिन कई लोगों को महीनों तक थकान, ब्रेन फॉग, याददाश्त की कमी और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत जैसी समस्याएं झेलनी पड़ीं. इसे ही आम भाषा में लॉन्ग कोविड कहा जाता है. अब एक नई स्टडी ने इस स्थिति को एक और गंभीर बीमारी से जोड़कर देखा है, वह है अल्जाइमर डिजीज. अमेरिका की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि लॉन्ग कोविड और अल्जाइमर्स के पीछे दिमाग में होने वाले कुछ जैविक बदलाव समान हो सकते हैं. यह अध्ययन जर्नल अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया में प्रकाशित हुआ है.
क्या कहती है नई रिसर्च?
शोध में 179 प्रतिभागियों के दिमाग का MRI स्कैन किया गया. इनमें 86 लोग लॉन्ग कोविड के न्यूरोलॉजिकल लक्षणों से जूझ रहे थे. 67 लोग कोविड से पूरी तरह ठीक हो चुके थे. 26 लोग जिन्हें कभी कोविड नहीं हुआ. रिसर्च में पाया गया कि लॉन्ग कोविड वाले मरीजों में Choroid Plexus (ChP) नामक हिस्से का आकार लगभग 10% बड़ा था.
Choroid Plexus क्या है और क्यों है अहम?
Choroid Plexus दिमाग में मौजूद ब्लड वेसल्स का एक नेटवर्क है, जो Cerebrospinal Fluid (मस्तिष्कमेरु द्रव) बनाता है. यह फ्लूइड दिमाग को सुरक्षा देता है और कचरे (waste) को साफ करने में मदद करता है.
- यह हिस्सा सूजन (inflammation) को कंट्रोल करता है.
- इम्यून सिस्टम के संकेतों को बैलेंस करता है.
- दिमाग से टॉक्सिन हटाने में मदद करता है.
अगर इसमें गड़बड़ी होती है, तो दिमाग में कचरा जमा हो सकता है, जो डिमेंशिया और अल्जाइमर्स जैसी बीमारियों से जुड़ा माना जाता है.
कौन से संकेत मिले?
- ChP का बढ़ा हुआ आकार अल्जाइमर्स से जुड़े ब्लड प्रोटीन pTau217 लेवल से संबंधित पाया गया.
- ब्रेन की चोट से जुड़े प्रोटीन (जैसे GFAP) भी बढ़े हुए मिले.
- जिन लोगों में ChP बड़ा था, उन्होंने मिनि मेंटल स्टेट एग्जाम में औसतन 2% कम स्कोर किया.
सीनियर रिसर्चर यूलिन गे के अनुसार, यह बदलाव भविष्य में अल्जाइमर्स जैसे लक्षणों का शुरुआती संकेत हो सकता है.
लॉन्ग कोविड और ब्रेन फॉग का कनेक्शन | Connection Between Long Covid And Brain Fog
लॉन्ग कोविड में अक्सर लोग याददाश्त कमजोर होना, ध्यान की कमी और मानसिक थकान की शिकायत करते हैं. रिसर्च के अनुसार, सूजन के कारण ChP में vascular remodelling यानी ब्लड वेसल्स की संरचना में बदलाव हो सकता है.
- इससे ब्लड फ्लो कम हो सकता है.
- CSF का उत्पादन घट सकता है.
- दिमाग में कचरा जमा हो सकता है.
अभी क्या साफ नहीं है?
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अभी तय नहीं है कि ChP में बदलाव बीमारी का कारण है या परिणाम. इसके लिए लंबी अवधि की और बड़ी स्टडी की जरूरत है.
यह अध्ययन एक बड़ा संकेत देता है कि लॉन्ग कोविड केवल अस्थायी समस्या नहीं हो सकती, बल्कि यह दिमाग के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर डाल सकती है. हालांकि, अभी घबराने की जरूरत नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की रिसर्च से यह साफ होगा कि इन बदलावों को कैसे रोका या कम किया जा सकता है. फिलहाल, हेल्दी लाइफस्टाइल, रेगुलर चेकअप और मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना सबसे अच्छा कदम है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














