Mobile Tower Cancer Risk: पिछले कई सालों से मोबाइल फोन रेडिएशन को लेकर डर और आशंकाएं इंटरनेट के कुछ कोनों तक ही सीमित थीं. लेकिन, इस हफ्ते यह मुद्दा सीधे अमेरिका की फेडरल सरकार के केंद्र में आ गया. अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) के सचिव Robert F. Kennedy Jr. ने सार्वजनिक रूप से 5G टावरों और मोबाइल फोन रेडिएशन को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (EMR) से कैंसर, ट्यूमर और डीएनए डैमेज जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का रिस्क हो सकता है.
यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके विभाग ने मोबाइल फोन रेडिएशन पर एक नई स्टडी शुरू की है. इससे वह बहस फिर से तेज हो गई है, जिसे वैज्ञानिक पहले ही कई बार विस्तार से जांचा जा चुका मानते हैं.
"मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूं"
USA TODAY को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में Robert F. Kennedy Jr. ने कहा कि 5G और मोबाइल रेडिएशन को लेकर उनकी चिंता केवल अनुमान या डर नहीं है.
उन्होंने कहा, "सामान्य तौर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन एक बड़ा हेल्थ कंसर्न है." जब उनसे खास तौर पर 5G टावरों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा, "मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूं."
USA TODAY की "Extremely Normal" सीरीज में बात करते हुए केनेडी ने यह भी दावा किया कि उनके नजरिए के सपोर्ट में व्यापक वैज्ञानिक सबूत मौजूद हैं. उनके अनुसार, "10,000 से ज्यादा स्टडीज" ऐसी हैं जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के हानिकारक प्रभावों को दिखाती हैं, जिनमें कैंसर, ट्यूमर की बढ़त और डीएनए को नुकसान शामिल है.
उनका कहना था, "EMF पल्स रेट और वेवलेंथ पर निर्भर करता है. इनमें से कुछ बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं.”
स्कूलों में मोबाइल बैन, लेकिन वजह कुछ और...
इससे पहले स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) ने स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को सीमित करने को "अमेरिका को फिर से स्वस्थ बनाएं" अभियान का हिस्सा बताया था. विभाग के मुताबिक, अमेरिका के 22 राज्यों में स्कूलों में मोबाइल फोन पर पाबंदियां लगाई गई हैं.
हालांकि, ये पॉलिसीज बच्चों को रेडिएशन से बचाने के लिए नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर, साइबर बुलिंग और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं. साल 2022 के बाद से अमेरिका के K-12 स्कूलों में क्लासरूम में फोन बैन करने का चलन व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से बढ़ा है, न कि रेडिएशन की वजह से.
FDA ने क्यों हटाई पुरानी गाइडलाइन?
इसी बीच, फेडरल एजेंसियों के रुख में भी बदलाव दिखने लगा है. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA), जो केनेडी के नेतृत्व में काम करता है, उसने अपनी कुछ पुरानी वेबपेज हटा दी हैं, जिनमें कहा गया था कि मोबाइल फोन खतरनाक नहीं हैं.
HHS के प्रवक्ता एंड्रयू निक्सन के अनुसार, “FDA ने पुराने निष्कर्षों वाले पेज इसलिए हटाए हैं क्योंकि HHS अब इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन और हेल्थ पर नई स्टडी कर रहा है, ताकि नई तकनीकों से जुड़े संभावित जोखिमों और जानकारी की कमी को समझा जा सके.”
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, HHS अब मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन के स्वास्थ्य प्रभावों पर रिसर्च का प्लान बना रहा है. हालांकि, सरकार ने अभी तक ऐसा कोई नया वैज्ञानिक सबूत जारी नहीं किया है, जिसके चलते यह बदलाव किया गया हो.
तो मौजूदा विज्ञान क्या कहता है?
सबसे अहम सवाल यही है कि अब तक की साइंटिफिक रिसर्च क्या बताती है? बड़े पैमाने पर की गई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में बार-बार यही सामने आया है कि मोबाइल फोन इस्तेमाल और कैंसर के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला है.
सितंबर 2024 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने जर्नल एनवायरमेंटल इंटरनेशनल में एक व्यापक रिव्यू प्रकाशित किया. इसमें नौ देशों के एक्सपर्ट्स ने 1994 से 2022 के बीच की गई 63 स्टडीज़ का विश्लेषण किया.
WHO के अनुसार, “शोधकर्ताओं को मोबाइल फोन इस्तेमाल और ब्रेन कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं मिला.”
यह निष्कर्ष पहले की ग्लोबल स्टडीज़ से भी मेल खाता है. साल 2011 में WHO से जुड़ी संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने रेडियोफ्रीक्वेंसी वेव्स को “मनुष्यों के लिए संभवतः कैंसरकारी” की कैटेगरी में रखा था. हालांकि, इसमें किसी सीधे कारण–परिणाम संबंध की पुष्टि नहीं की गई थी. उस समय इस कैटेगरी में अचार वाली सब्जियां और कॉफी जैसी चीजें भी शामिल थीं.
कुछ लैब स्टडीज में चूहों पर किए गए प्रयोगों में रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन और कैंसर के बीच संभावित संबंध दिखा है. लेकिन, वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नतीजों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता. इंसानों पर की गई स्टडीज अभी भी सीमित, असंगत और दोहराने में कठिन रही हैं, खासकर वास्तविक जीवन में होने वाले एक्सपोज़र लेवल पर.
फिलहाल, वैज्ञानिक समुदाय में यह सहमति बनी हुई है कि मोबाइल फोन रेडिएशन और कैंसर के बीच कोई ठोस और स्पष्ट सबूत नहीं है. फिर भी, नई स्टडीज़ और बदलते सरकारी रुख के चलते यह बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। ऐसे में डर की बजाय भरोसेमंद वैज्ञानिक रिसर्च और संतुलित जानकारी पर ध्यान देना सबसे समझदारी भरा कदम होगा.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














