TT की जगह Td वैक्सीन को प्राथमिकता, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अहम बदलाव, जानें क्या हैं इसके मायने

Td vaccine over TT: स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल को बेहतर सुरक्षा की दिशा में कदम बताया जा रहा है. हालांकि  ये बदलाव पूरी तरह से नया नहीं है, बल्कि पहले से चल रही व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू करने की प्रक्रिया है. ऐसे में इस अपडेट के पीछे की पूरी तस्वीर समझना जरूरी है.

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TT की जगह Td वैक्सीन को प्राथमिकता, जानें क्यों किया गया बदलाव

Td vaccine over TT: भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अब टेटनस टॉक्सॉइड यानी TT वैक्सीन की जगह Td  वैक्सीन  (टेटनस और डिप्थीरिया) को प्राथमिकता दी जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल को बेहतर सुरक्षा की दिशा में कदम बताया जा रहा है. हालांकि  ये बदलाव पूरी तरह से नया नहीं है, बल्कि पहले से चल रही व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू करने की प्रक्रिया है. ऐसे में इस अपडेट के पीछे की पूरी तस्वीर समझना जरूरी है. आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं. 

क्या बदला है?

सरकारी जानकारी के मुताबिक अब TT की जगह Td वैक्सीन को शामिल किया जा रहा है. Td वैक्सीन टेटनस के साथ साथ डिप्थीरिया से भी सुरक्षा देती है. यानी जहां TT केवल टेटनस से बचाव करता था, वहीं Td दो बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा देता है. इस बदलाव को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत लागू किया जा रहा है.

किन लोगों को दी जाती है Td वैक्सीन

गाइडलाइन के अनुसार यह वैक्सीन खास तौर पर गर्भवती महिलाओं, 10 और 16 साल के किशोरों और जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज लेने वाले वयस्कों को दी जाती है. चोट या घाव की स्थिति में भी डॉक्टर जरूरत के हिसाब से Td लगाने की सलाह दे सकते हैं. खास बात यह है कि वैक्सीनेशन का शेड्यूल पहले जैसा ही रखा गया है.

सरकार ने क्यों जरूरी माना

भारत में डिप्थीरिया के मामले पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और कई वयस्कों में इसके खिलाफ पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं मिलती. ऐसे में Td वैक्सीन को शामिल करने से मातृ और सामुदायिक सुरक्षा मजबूत करने का मकसद बताया गया है. इसे ड्यूल प्रोटेक्शन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

क्या यह पूरी तरह नया कदम है

इस मुद्दे पर अलग अलग राय सामने आ रही हैं. कुछ लोगों का मानना है कि Td वैक्सीन को देश के वैक्सीनेशन प्रोग्राम में पहले ही धीरे धीरे शामिल किया जा चुका था और कई जगह इसका इस्तेमाल पहले से हो रहा था. वहीं अब सरकार इसे पॉलिसी लेवल पर और स्पष्ट रूप से लागू कर स्टैंडर्डाइजेशन पर जोर दे रही है.

कुल मिलाकर TT से Td की ओर बढ़ना सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है. हालांकि इसे पूरी तरह नई शुरुआत के बजाय पहले से चल रही व्यवस्था के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है. आम लोगों के लिए जरूरी यही है कि वे निर्धारित टीकाकरण शेड्यूल का पालन करें और किसी भी भ्रम की स्थिति में स्वास्थ्यकर्मी या डॉक्टर से सलाह लें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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