डायबिटीज का महाविस्फोट! भारत बनता जा रहा है दुनिया की Diabetes Capital, नेचर जर्नल की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 30 सालों में भारत, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका डायबिटीज के ऐसे टाइम बम पर खड़े हैं, जिसका असर सिर्फ स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि इन देशों की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ने वाला है.

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Global Diabetes Crisis: नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है.

डायबिटीज (Diabetes) अब सिर्फ एक बीमारी नहीं रही, बल्कि यह एक वैश्विक संकट का रूप ले चुकी है. बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने इस बीमारी को घर-घर तक पहुंचा दिया है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि प्रतिष्ठित नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है. रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 30 सालों में भारत, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका डायबिटीज के ऐसे टाइम बम पर खड़े हैं, जिसका असर सिर्फ स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि इन देशों की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ने वाला है.

डायबिटीज क्यों बन रही है सबसे बड़ी चुनौती?

रिपोर्ट बताती है कि इन तीनों देशों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या आने वाले दशकों में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच सकती है. खासकर भारत में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि यहां युवा और मध्यम आयु वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है. पहले डायबिटीज को उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 25-35 साल के लोग भी इससे जूझ रहे हैं.

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शहरों में फास्ट फूड, शुगरी ड्रिंक्स, देर रात तक जागना और घंटों मोबाइल-लैपटॉप पर बैठे रहना इस बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं. वहीं गांवों में भी खानपान के पैटर्न बदलने और शारीरिक मेहनत कम होने से डायबिटीज तेजी से फैल रही है.

भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना बड़ा असर?

रिपोर्ट के मुताबिक अगले 30 सालों में डायबिटीज भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दूसरा सबसे बड़ा बोझ बन सकती है. इलाज, दवाइयों, अस्पताल में भर्ती और काम करने की क्षमता में कमी इन सबका सीधा असर देश की प्रोडक्टिविटी पर पड़ेगा. अनुमान है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर डायबिटीज के कारण लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है, जिसमें बड़ा हिस्सा भारत जैसे विकासशील देशों से आएगा.

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डायबिटीज सिर्फ शुगर नहीं, कई बीमारियों की जड़:

डायबिटीज अगर कंट्रोल न रहे तो यह दिल की बीमारी, किडनी फेल्योर, आंखों की रोशनी कम होना, नसों की कमजोरी और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देती है. यही कारण है कि इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं.

बचाव ही सबसे बड़ा इलाज:

अच्छी बात यह है कि टाइप-2 डायबिटीज को काफी हद तक रोकना और कंट्रोल करना संभव है. इसके लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं:

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  • रोज कम से कम 30 मिनट तेज चलना या व्यायाम.
  • मीठा, जंक फूड और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम करना.
  • हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाना
  • वजन को कंट्रोल में रखना.
  • रेगुलर ब्लड शुगर जांच कराना.
  • तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान.

अब भी समय है संभलने का:

भारत अगर सच में दुनिया की डायबिटीज कैपिटल बनने से बचना चाहता है, तो सरकार, समाज और हर व्यक्ति को मिलकर कदम उठाने होंगे. जागरूकता, समय पर जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल ही इस बढ़ते खतरे को रोक सकती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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