अमेरिका में नवजात बच्चों को 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-B का टीका जरूरी नहीं, जानिए भारत के नियम

Hepatitis B Vaccine Rules: अमेरिका में टीकाकरण को लेकर बहस तेज हो गई है. अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था CDC (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) ने बच्चों के टीकाकरण से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव मंजूर किया है.

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Hepatitis B Vaccine Rules in India: इस फैसले के बाद अमेरिका में टीकाकरण को लेकर बहस तेज हो गई है.

US vs India Hepatitis B Vaccine Policy: अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था CDC (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) ने बच्चों के टीकाकरण से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव मंजूर किया है. अब CDC ने वह पुरानी सिफारिश हटा दी है, जिसमें कहा जाता था कि हर नवजात बच्चे को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-B का टीका लगना जरूरी है. मंगलवार को CDC ने अपने सलाहकार पैनल की सिफारिश को स्वीकार करते हुए यह बदलाव किया. इसके तहत अब जिन बच्चों की मां का हेपेटाइटिस-B टेस्ट नेगेटिव आता है, उनके माता-पिता डॉक्टर से सलाह लेकर इस टीके की पहली खुराक 2 महीने की उम्र तक टाल सकते हैं.

क्यों बदला गया नियम?

CDC के कार्यवाहक निदेशक जिम ओ नील ने कहा कि यह फैसला उपलब्ध वैज्ञानिक सबूतों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है. उनका कहना है कि जिन नवजात बच्चों को हेपेटाइटिस-B का खतरा बहुत कम है, उनके माता-पिता को अब ज्यादा जानकारी और सहमति के साथ फैसला लेने का अधिकार मिलेगा.

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लेकिन विवाद क्यों?

इस फैसले के बाद अमेरिका में टीकाकरण को लेकर बहस तेज हो गई है. कई बाल रोग विशेषज्ञ, राज्य स्वास्थ्य विभाग और बड़े मेडिकल संगठन इस बदलाव के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि जन्म के समय दी जाने वाली यह वैक्सीन बहुत जरूरी है और इसे टालने का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है.

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) की अध्यक्ष सूसन क्रेस्ली ने चिंता जताई कि इस फैसले के बाद कई माता-पिता अपने बच्चों को यह जरूरी टीका लगवाने से मना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह दिल तोड़ने वाला है, क्योंकि यह वैक्सीन कई गंभीर संक्रमणों से बच्चों की जान बचा सकती है.

CDC ने कौन-सा सुझाव खारिज किया?

CDC ने अपने सलाहकार पैनल के एक और सुझाव को अभी मंजूरी नहीं दी है. उस सुझाव में कहा गया था कि बच्चों के खून की जांच करके यह देखा जाए कि शरीर में हेपेटाइटिस-B से बचाने वाली एंटीबॉडी हैं या नहीं और उसी आधार पर आगे की खुराक दी जाए.

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बाल रोग विशेषज्ञों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है. उनका कहना है कि शिशुओं से खून लेना मुश्किल और दर्दनाक होता है और इस तरह की जांच के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं.

किन बच्चों को अब भी जन्म पर टीका लगेगा?

नए नियम के अनुसार जिन बच्चों की मां हेपेटाइटिस-B पॉजिटिव हैं या जिनकी मां की जांच की स्थिति पता नहीं है. उन बच्चों को अब भी जन्म के तुरंत बाद हेपेटाइटिस-B का टीका लगाना जरूरी रहेगा.

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कई राज्य अब भी पुराने नियम के साथ

कोलोराडो, न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स समेत कई अमेरिकी राज्यों और बड़े स्वास्थ्य संगठनों ने साफ कहा है कि वे अब भी हर नवजात को हेपेटाइटिस-B का टीका देने की सिफारिश जारी रखेंगे.

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इसके अलावा बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने भी कहा है कि वे 2026 तक हेपेटाइटिस-B के जन्म वाले टीके का खर्च कवर करती रहेंगी.

डॉक्टरों की चिंता

ग्रामीण अलबामा की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नोला जीन अर्नेस्ट का कहना है कि जन्म पर टीका टालने का कोई सबूत नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी स्वस्थ बच्चे में हेपेटाइटिस-B एंटीबॉडी टेस्ट नहीं किया और न ही उन्हें पता है कि उसके नतीजों को कैसे समझा जाए.

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भारत में नवजात बच्चों के लिए हेपेटाइटिस-B वैक्सीन के नियम क्या हैं?

भारत में हेपेटाइटिस-B वैक्सीन यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) का हिस्सा है. इसका मतलब है कि यह टीका सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य रूप से दिया जाता है.

जन्म के कितने समय में देना जरूरी है?

भारत में हेपेटाइटिस-B की पहली खुराक (Birth Dose). जन्म के 24 घंटे के भीतर देना जरूरी माना जाता है. WHO और भारत सरकार दोनों का मानना है कि जितनी जल्दी टीका लगे, उतनी बेहतर सुरक्षा.

24 घंटे के भीतर क्यों जरूरी है?

  • डॉक्टरों के अनुसार, हेपेटाइटिस-B वायरस मां से बच्चे में जन्म के समय फैल सकता है.
  • अगर बच्चा संक्रमित हुआ तो.
  • 90% मामलों में बीमारी क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) बन सकती है.
  • आगे चलकर लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

इसलिए भारत में जन्म के तुरंत बाद टीका देने पर जोर दिया जाता है.

भारत में हेपेटाइटिस-B टीकाकरण का पूरा शेड्यूल

भारत में आमतौर पर यह टीका इस तरह दिया जाता है:

  • पहली खुराक - जन्म के 24 घंटे के भीतर
  • दूसरी खुराक - 6 हफ्ते की उम्र में
  • तीसरी खुराक - 10 हफ्ते
  • चौथी खुराक - 14 हफ्ते

अमेरिका और भारत के नियमों में बड़ा फर्क क्यों?

  • अमेरिका में इंफेक्शन रेट कम है.
  • मां की स्क्रीनिंग पहले से होती है.
  • भारत में हेपेटाइटिस-B एक मेजर पब्लिक हेल्थ प्रॉब्लम
  • कई मामलों में मां को खुद पता नहीं होता.

CDC का यह फैसला अमेरिका में शिशु टीकाकरण नीति का बड़ा मोड़ माना जा रहा है. जहां एक ओर इसे माता-पिता की सहमति और विकल्प से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों को डर है कि इससे बच्चों की सेहत को लंबे समय में नुकसान हो सकता है. आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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