Alzheimer's Prevention Tips: बढ़ती उम्र के साथ सबसे बड़ा डर क्या होता है? बहुत से लोगों के लिए जवाब है, याददाश्त का कमजोर पड़ना. जब नाम, चेहरे और रोजमर्रा की बातें याद न रहें, तो जिंदगी की आजादी भी कम होने लगती है. यही वजह है कि अल्जाइमर डिजीज को लेकर चिंता दुनिया भर में बढ़ रही है. यह डिमेंशिया का सबसे आम कारण है और अल्जाइमर एसोसिएशन के अनुसार 60–80 प्रतिशत मामलों में यही बीमारी जिम्मेदार होती है.
अल्जाइमर में दिमाग में एमाइलॉइड-बीटा प्लाक और टाउ टेंगल्स का असामान्य जमाव पाया जाता है, जो धीरे-धीरे मेमोरी और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करता है. अभी तक इसका पक्का कारण और इलाज स्पष्ट नहीं है. लेकिन, एक नई उम्मीद सामने आई है सीखते रहने की आदत.
नई रिसर्च क्या कहती है?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में करीब 2,000 बुजुर्गों (औसत आयु 80 साल) को शामिल किया गया. शुरुआत में किसी को डिमेंशिया नहीं था. शोधकर्ताओं ने उनसे बचपन (18 साल से पहले), मध्य आयु (40 साल) और वृद्धावस्था (80 साल के आसपास) में की गई ब्रेन-एंगेजिंग एक्टिविटीज जैसे किताबें पढ़ना, लिखना, अखबार-पत्रिकाएं पढ़ना और विदेशी भाषा सीखना के बारे में जानकारी ली. पार्टिसिपेंट्स को औसतन 8 साल तक फॉलो किया गया.
अध्ययन की लीड ऑथर एंड्रिया जम्मिट ने कहा, "उम्र बढ़ने का सबसे बड़ा डर कॉग्नेटिव कमजोरी है. अगर हम ऐसे लाइफस्टाइल फैक्टर पहचान लें जिन्हें बदला जा सकता है, तो लोग अपनी आदतों के जरिए दिमाग को मजबूत रख सकते हैं."
सीखते रहना क्यों फायदेमंद?
- जिन लोगों ने जीवनभर ज्यादा पढ़ाई-लिखाई और सीखने की एक्टिविटीज कीं, उनमें अल्जाइमर की शुरुआत औसतन 5 साल देर से हुई.
- माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) की शुरुआत भी 7 साल देर से हुई.
- हाई लाइफटाइम एन्फ्रिचमेंट स्कोर वालों में अल्ज़ाइमर का जोखिम 38% कम और MCI का जोखिम 36% कम पाया गया.
डॉ. जैमिट के अनुसार, "5-7 साल की देरी का मतलब है कई अतिरिक्त साल स्वतंत्र जीवन के जो बुजुर्गों के लिए बेहद कीमती हैं."
दिमाग कैसे मजबूत होता है? | How Does the Brain Become Stronger?
विशेषज्ञ इसे कॉग्निटिव रिजर्व कहते हैं, यानी दिमाग की वह क्षमता जो नुकसान के बावजूद काम जारी रख सके.
- पढ़ना नई जानकारी और शब्दावली से न्यूरल कनेक्शन बढ़ाता है.
- लिखना विचारों को व्यवस्थित करने और स्मृति को सक्रिय रखने में मदद करता है.
- नई भाषा सीखना दिमाग के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करता है सुनना, बोलना, याद रखना.
लंबे समय तक ये एक्टिविटीज दिमाग में मजबूत नेटवर्क बनाती हैं, जो उम्र के असर को धीमा कर सकती हैं.
क्या सिर्फ बुजुर्गों के लिए?
नहीं. अध्ययन बताता है कि सीखने की आदत बचपन से शुरू हो तो असर ज्यादा होता है. सिर्फ देर से शुरू करने से नहीं, बल्कि जीवनभर की निरंतरता से लाभ मिलता है. यानी 20, 40 या 60 किसी भी उम्र में शुरू करें, पर रुकें नहीं.
भारत के लिए क्या मायने?
भारत में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है और अनुमान है कि लगभग 90 लाख से ज्यादा लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं, जिनमें बड़ी हिस्सेदारी अल्ज़ाइमर की है. ऐसे में यह शोध उम्मीद देता है कि महंगे इलाज के बजाय सस्ती और सरल आदतें किताब पढ़ना, डायरी लिखना, नई भाषा या कौशल सीखना लंबे समय में बड़ा फर्क डाल सकती हैं.
अपनाने योग्य आसान कदम:
- रोज 20-30 मिनट पढ़ने की आदत
- हफ्ते में कुछ दिन जर्नल या नोट्स लिखना
- नई भाषा/संगीत/ऑनलाइन कोर्स सीखना
- किताबों और चर्चाओं के जरिए सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना
अल्जाइमर का पूरी तरह इलाज अभी संभव नहीं, लेकिन यह अध्ययन बताता है कि दिमाग की सेहत किस्मत नहीं, आदतों से भी बनती है. लाइफस्टाइल सीखते रहने की आदत चाहे किताबों से हो, लेखन से या नई भाषा से दिमाग के लिए एक सुरक्षा कवच बन सकती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














