Breast Cancer Detection: ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम और जानलेवा कैंसरों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती है समय पर पहचान. कई बार स्क्रीनिंग के बावजूद कैंसर पकड़ में नहीं आता और बाद में एडवांस स्टेज में सामने आता है. अब स्वीडन से आई एक बड़ी स्टडी ने इस दिशा में उम्मीद की नई किरण दिखाई है. स्वीडन में की गई इस रिसर्च के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से बाद में पता चलने वाले कैंसर की संख्या में 12% तक कमी आई है. यह स्टडी प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेंट में प्रकाशित हुई है.
स्टडी में कौन-कौन शामिल था?
यह रिसर्च अप्रैल 2021 से दिसंबर 2022 के बीच की गई, जिसमें लगभग 1 लाख (100,000) महिलाएं शामिल थीं. इन सभी महिलाओं ने रूटीन मैमोग्राफी स्क्रीनिंग करवाई थी.
खास बात यह है कि यह पहला बड़ा रैंडम ट्रायल है, जिसमें यह जांचा गया कि AI असल दुनिया (Real-world Setting) में ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग में कितना कारगर साबित होता है.
कैसे की गई स्क्रीनिंग? दो ग्रुप, दो तरीके
महिलाओं को रैंडम तरीके से दो ग्रुप में बांटा गया. स्टैंडर्ड स्क्रीनिंग ग्रुप मैमोग्राम को दो रेडियोलॉजिस्ट ने पढ़ा बिना किसी AI सपोर्ट के पारंपरिक तरीका अपनाया गया.
AI-सपोर्टेड स्क्रीनिंग ग्रुप
- पहले AI सिस्टम ने स्कैन का विश्लेषण किया
- कम जोखिम वाले मामलों को एक रेडियोलॉजिस्ट ने देखा
- ज्यादा जोखिम वाले मामलों को दो रेडियोलॉजिस्ट ने जांचा
- AI ने संदिग्ध हिस्सों को पहले ही फ्लैग कर दिया
नतीजे क्या कहते हैं?
स्टडी के नतीजे बेहद अहम और चौंकाने वाले रहे AI ग्रुप में बाद के वर्षों में कम महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर पाया गया, AI-सपोर्टेड ग्रुप में, प्रति 1,000 महिलाओं पर 1.55 कैंसर केस, स्टैंडर्ड ग्रुप में, प्रति 1,000 महिलाओं पर 1.76 कैंसर केस. यानी AI के इस्तेमाल से ऐसे कैंसर की संख्या घटी, जो स्क्रीनिंग के समय छूट जाते हैं.
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जल्दी पहचान, कम खतरनाक कैंसर
AI ग्रुप में कैंसर की जल्दी पहचान भी ज्यादा हुई. AI ग्रुप में 81% कैंसर स्क्रीनिंग के दौरान ही पकड़ में आ गए. स्टैंडर्ड ग्रुप में यह आंकड़ा 74% था. इतना ही नहीं, AI ग्रुप में 27% कम एग्रेसिव (ज्यादा तेजी से फैलने वाले) कैंसर सब-टाइप पाए गए, जो इलाज के लिहाज से एक बड़ी राहत है.
रिसर्च लीडर ने क्या कहा?
इस स्टडी का नेतृत्व करने वाली डॉ. क्रिस्टीना लैंग (लुंड यूनिवर्सिटी) ने कहा कि AI शुरुआती पहचान को बेहतर बनाते हुए रेडियोलॉजिस्ट पर काम का दबाव कम कर सकता है.
हालांकि उन्होंने साफ किया कि AI डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकता. इसका काम डॉक्टरों को सपोर्ट करना है और इसके इस्तेमाल पर लगातार निगरानी जरूरी है.
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स ने इस रिसर्च का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि AI को बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले अलग-अलग देशों, अलग हेल्थकेयर सिस्टम और अलग आबादी में और स्टडी की जरूरत है.
यह स्टडी दिखाती है कि AI ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग को ज्यादा सटीक, तेज और सुरक्षित बना सकता है. अगर सही तरीके से लागू किया गया, तो यह लाखों महिलाओं की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














