एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के संकट से उभरने के लिए 4 नई टेक्नोलॉजी बनेंगी ढाल, जगी नई उम्मीदें

Antibiotic Resistance: दुनिया भर के वैज्ञानिक एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से लड़ने के लिए नई-नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इनमें से 4 नई टेक्नोलॉजी ऐसी हैं, जो भविष्य के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं.

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Antibiotic Resistance: एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का मतलब है दवाइयों का बैक्टीरिया पर असर न होना.

Antibiotic resistance Solutions: एक समय था जब एंटीबायोटिक दवाइयां जान बचाने का सबसे भरोसेमंद हथियार मानी जाती थीं. मामूली संक्रमण से लेकर गंभीर बीमारियों तक, डॉक्टर बेझिझक एंटीबायोटिक लिख देते थे. लेकिन, आज हालात बदल चुके हैं. दुनिया एक ऐसी खामोश महामारी की ओर बढ़ रही है, जिसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है. सरल शब्दों में समझें तो एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का मतलब है दवाइयों का बैक्टीरिया पर असर न होना. यानी जो दवाइयां पहले काम करती थीं, अब बेअसर हो रही हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा और गलत इस्तेमाल. नतीजा यह कि मामूली इंफेक्शन भी जानलेवा बन सकता है.

लेकिन, अच्छी खबर यह है कि विज्ञान ने हार नहीं मानी है. दुनिया भर के वैज्ञानिक एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से लड़ने के लिए नई-नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इनमें से 4 नई टेक्नोलॉजी ऐसी हैं, जो भविष्य के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं.

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से निपटने के 4 तरीके | 4 Ways to Combat Antibiotic Resistance

1. बैक्टीरियोफेज थेरेपी

यह तकनीक सुनने में अजीब लग सकती है, लेकिन बेहद प्रभावशाली है. बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो सिर्फ बैक्टीरिया पर हमला करते हैं, इंसानों पर नहीं. ये वायरस सीधे बैक्टीरिया के अंदर जाकर उसे नष्ट कर देते हैं. खास बात यह है कि ये सिर्फ हानिकारक बैक्टीरिया को ही मारते हैं, अच्छे बैक्टीरिया सुरक्षित रहते हैं.

यह थेरेपी उन मामलों में खास तौर पर उपयोगी मानी जा रही है, जहां एंटीबायोटिक पूरी तरह फेल हो चुके हैं.

2. CRISPR टेक्नोलॉजी

CRISPR एक जीन-एडिटिंग तकनीक है, जिसे अब एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खिलाफ भी आजमाया जा रहा है. इस तकनीक से बैक्टीरिया के उस जीन को ही काट दिया जाता है, जो उसे दवाओं के खिलाफ मजबूत बनाता है. जब वह जीन खत्म हो जाता है, तो बैक्टीरिया दोबारा कमजोर पड़ जाता है. यह तरीका भविष्य में बेहद सटीक और टारगेटेड इलाज का रास्ता खोल सकता है.

3. AI और मशीन लर्निंग

अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी इस लड़ाई में उतर चुका है. AI हजारों केमिकल कंपाउंड्स का विश्लेषण करके यह अनुमान लगा सकता है कि कौन-सी नई दवा बैक्टीरिया पर असरदार होगी, जो काम पहले सालों में होता था, वह अब महीनों में संभव हो रहा है. AI की मदद से पूरी तरह नई तरह की एंटीबायोटिक खोजी जा रही हैं, जिन पर बैक्टीरिया ने अभी तक रेजिस्टेंस डिवेलप नहीं किया है.

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4. एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स

एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स छोटे प्रोटीन होते हैं, जो हमारे शरीर की नेचुरल डिफेंस सिस्टम का हिस्सा हैं. वैज्ञानिक अब इन्हें लैब में तैयार कर बैक्टीरिया के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं. ये बैक्टीरिया की बाहरी झिल्ली को ही तोड़ देते हैं, जिससे उसे बचने का मौका नहीं मिलता. इस तकनीक में रेजिस्टेंस विकसित होने की संभावना भी कम मानी जाती है.

हालांकि ये सभी तकनीकें अभी पूरी तरह आम इलाज का हिस्सा नहीं बनी हैं, लेकिन ये साफ संकेत देती हैं कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खिलाफ लड़ाई हारी नहीं गई है. साथ ही यह भी जरूरी है कि हम खुद जिम्मेदारी लें:

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  • बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें.
  • दवा का पूरा कोर्स पूरा करें.
  • वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक की मांग न करें.

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक गंभीर वैश्विक चुनौती है. लेकिन, विज्ञान लगातार इसके समाधान खोज रहा है. बैक्टीरियोफेज, CRISPR, AI और एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स जैसी तकनीकें यह दिखाती हैं कि उम्मीद अभी बाकी है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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