Chandigarh News: हरियाणा को देश और दुनिया के निवेशकों की पहली पसंद बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक (Haryana Cabinet Meeting) में नई औद्योगिक नीति मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 (Make in Haryana Industrial Policy 2026) को हरी झंडी दे दी गई है.
10 लाख नौकरियों का लक्ष्य
यह नई नीति राज्य में पुरानी साल 2020 की नीति की जगह लेगी और अगले 5 सालों के अंदर प्रदेश का नक्शा बदलने का काम करेगी. मुख्यमंत्री सैनी, जो राज्य का वित्त मंत्रालय भी संभाल रहे हैं, उन्होंने बताया कि इस नई नीति के जरिए सरकार ने प्रदेश में 5 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश को आकर्षित करने, 10 लाख नए रोजगार पैदा करने और राज्य के एक्सपोर्ट (निर्यात) को कई गुना बढ़ाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है.
उद्योगों को 5% से 30% तक सब्सिडी
इस बार सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अपने पुराने वर्गीकरण के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. नए फ्रेमवर्क के तहत अब पुराने A, B, C और D ब्लॉक आधारित वर्गीकरण को खत्म करके कोर, इंटरमीडिएट, सब-प्राइम और प्राइम या फोकस एरिया की एक नई व्यवस्था लागू की गई है. इसके तहत राज्य के हर एक ब्लॉक तक वित्तीय प्रोत्साहन का लाभ पहुंचाया जाएगा. बड़े उद्योगों के लिए 5 से 20 प्रतिशत तक की कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जबकि प्राइम और फोकस एरिया में लगने वाले मेगा और अल्ट्रा-मेगा प्रोजेक्ट्स को 30 प्रतिशत तक की भारी कैपिटल सब्सिडी मिलेगी. इसके अलावा इन कंपनियों को 30 से 70 प्रतिशत तक नेट एसजीएसटी (SGST) रिइम्बर्समेंट का फायदा भी 7 से 12 साल तक की लंबी अवधि के लिए दिया जाएगा.
स्थानीय युवाओं, महिलाओं और अग्निवीरों को नौकरी देने पर बंपर मदद
स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने एक बेहद आकर्षक योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत एम्प्लॉयमेंट जनरेशन सब्सिडी को 48 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 1 लाख रुपये प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष कर दिया गया है और यह मदद कंपनियों को 10 साल तक मिलेगी. अगर कोई कंपनी महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगों, अग्निवीरों या पूर्व सैनिकों को नौकरी पर रखती है, तो यह वित्तीय सहायता बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये प्रति कर्मचारी कर दी जाएगी. इसके साथ ही, हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) पोर्टल के माध्यम से युवाओं को भर्ती करने वाली कंपनियों के ईपीएफ (EPF) योगदान की पूरी रकम सरकार खुद वहन करेगी. निवेशकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा नियम भी बनाया गया है कि 1 अप्रैल 2026 के बाद यदि किसी प्रोत्साहन राशि के भुगतान में देरी होती है, तो सरकार उस पर 8 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देगी.
गुरुग्राम बनेगा ग्लोबल AI हब
कैबिनेट ने इस मुख्य नीति के साथ-साथ उभरती हुई टेक्नोलॉजी को रफ्तार देने के लिए 10 अन्य बड़ी सेक्टोरल पॉलिसियों को भी मंजूरी दी है. इसके तहत 'हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2026' को मंजूरी दी गई है, जिसके अंतर्गत आईएमटी सोहना में 500 एकड़ में एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है. सरकार जल्द ही सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए भी एक अलग नीति लेकर आ रही है.
वहीं, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में गुरुग्राम को दुनिया की राजधानी बनाने के मकसद से 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी' और 'आईटी/एआई पॉलिसी 2026' लागू की गई है. इसके तहत गुरुग्राम में एक ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर और पंचकूला में हरियाणा एडवांस्ड कंप्यूटिंग फैसिलिटी की स्थापना की जाएगी. साथ ही, एनिमेशन और गेमिंग (AVGC-XR) को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के सहयोग से तीन सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस भी बनाए जाएंगे.
फार्मा, खिलौना उद्योग और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'एग्रो बिजनेस नीति'हरियाणा को मेडिकल और खिलौना निर्माण का हब बनाने के लिए भी बड़ा दांव खेला गया है. 'फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल डिवाइस पॉलिसी 2026' के जरिए दवाइयों और क्लिनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में 10,000 करोड़ का निवेश और 20,000 नौकरियां लाने का लक्ष्य है, जिसके लिए कंपनियों को 200 करोड़ रुपये तक की कैपिटल असिस्टेंस दी जाएगी. इसके साथ ही इको-फ्रेंडली खिलौने और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट बनाने के लिए भी नई नीति लाई गई है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय दोगुनी करने के मकसद से 'हरियाणा एग्रो बिजनेस एंड एग्रो प्रोसेसिंग पॉलिसी 2026' को मंजूरी मिली है, जिसके तहत 5000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और फूड टेस्टिंग लैब्स बनाए जाएंगे. डेटा सेंटर्स और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को लेकर बनी नीतियां भी राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और ग्रीन इंडस्ट्री के एक नए युग की शुरुआत करेंगी.
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