बेसहारा पशुओं से निपटने पर हिमाचल सरकार का खास फोकस, करोड़ों का फंड जारी

आवारा पशुओं से खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ. इसके चलते किसानों ने खेती कम कर दी या पूरी तरह छोड़ दी. यही वजह है कि सरकार ने इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी है.

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ‘गोपाल योजना' के तहत 14.68 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है. यह राशि राज्यभर में परित्यक्त गायों के देखभाल, आश्रय और कल्याण के लिए रखरखाव अनुदान के रूप में दी गई है. सरकार का कहना है कि आवारा पशुओं से खड़ी फसलों को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए सरकार ने इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी है. कई क्षेत्रों में किसान फसलों के नुकसान से इतना परेशान थे कि उन्हें खेती कम करनी या पूरी तरह छोड़नी पड़ी. 

मासिक अनुदान भी बढ़ा

पशुओं की देखभाल को और मजबूत बनाने के लिए एक अक्टूबर 2025 से प्रति गाय मासिक अनुदान 700 रुपए से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दिया गया है. यह बढ़ी हुई सहायता हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग के माध्यम से पंजीकृत गौशालाओं और गौ अभयारण्यों को दी जा रही है. 

सड़क सुरक्षा और किसानों की राहत

आवारा पशुओं के उचित पुनर्वास से न सिर्फ किसानों की समस्याएं कम होंगी. साथ ही वे खेती की ओर लौट सकेंगे. जबकि इससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी, क्योंकि कई हादसे आवारा पशुओं के कारण होते हैं. 

सरकार ने हाल के वर्षों में कई गौ अभयारण्य और बड़े गौसदन स्थापित किए हैं. साथ ही स्वैच्छिक संगठनों, एनजीओ और व्यापारिक संस्थानों को इन गौशालाओं को गोद लेने की अनुमति भी दी गई है. 

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