भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के आठ वरिष्ठ अधिकारी आगामी दो रातें पाकिस्तान बॉर्डर से लगते गांवों में गुजारेंगे. गुजरात सरकार की इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे 16 गांवों में सुरक्षा तैयारियों की जमीनी हकीकत जानना और सीमावर्ती निवासियों से सीधा संवाद स्थापित करना है.
गुजरात से लगती पाकिस्तान की सीमा
गुजरात की करीब 512 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से लगती है, जो कच्छ, बनासकांठा और पाटन जिलों से होकर गुजरती है. अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके तहत आठ आईपीएस अधिकारी 11 और 12 जून 2026 को सीमावर्ती 16 गांवों का दौरा करेंगे.
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी की देखरेख में वाव-थराद सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ पाटन और कच्छ के इन 16 गांवों के लिए यह विशेष योजना तैयार की गई है. इसके अंतर्गत आईपीएस अधिकारी सरहदी गांवों में जाकर सीमा पर गश्त का निरीक्षण करेंगे. रात में गांवों में रुककर समीक्षा बैठकें लेंगे और वहां तैनात पुलिसकर्मियों व स्थानीय ग्रामीणों से सीधा संवाद करेंगे.
किस आईपीएस अधिकारी को मिला कौन सा गांव?
1. ADGP वाबांग ज़मीर: वाव-थराद ज़िले के असारागम और राचेना गांव.
2. ADGP अजय कुमार चौधरी: कच्छ ज़िले के शिरानी वंध और जटावाड़ा गांव.
3. IGP बिपिन शंकरराव अहीरे: पाटन ज़िले के धोकवाड़ा और चारंका गांव.
4. DIGP ए.एम. मुनिया: वाव-थराद इलाके के रादोसन और गोलाप गांव.
5. DIGP के.एन. दामोर: कच्छ ज़िले के जूना और डेडिया गांव.
6. DIGP लीना पाटिल: कच्छ ज़िले के उधमो और पटागर गांव.
7. ACP आर.टी. सुसारा: कच्छ ज़िले के पुनराजपार और गुनाऊ गांव.
8. DIGP सुधा एस. पांडे: कच्छ ज़िले के दिनारा और भितारा मोटा गांव.
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