- गुजरात हाई कोर्ट की डबल बेंच ने साबरमती नदी के किनारे स्थित आसाराम आश्रम की अपील खारिज कर दी है.
- गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि आश्रम ने सरकारी शर्तों का उल्लंघन और साबरमती नदी की जमीन पर अवैध कब्जा किया है.
- आश्रम 45 वर्षों से अस्तित्व में है. जिला कलेक्टर ने आदेश दिया था कि आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया गया है.
अहमदाबाद में साबरमती के किनारे पर स्थित आसाराम आश्रम को लेकर कानूनी लड़ाई अब अंतिम मोड़ पर पहुंच गई है. गुजरात हाई कोर्ट की डबल बेंच ने आश्रम की अपील को खारिज कर दिया है, जिससे इसे किसी भी वक्त तोड़े जाने का रास्ता साफ हो गया है. हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल जज के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कलेक्टर के जमीन वापस लेने के आदेश को सही ठहराया गया था.
इस मामले में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आश्रम ने न केवल सरकारी शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि साबरमती नदी की जमीन पर भी अवैध कब्जा किया है. अदालत ने साफ किया कि नदी की जमीन का नियमितीकरण किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता.
आश्रम ने की थी 4 हफ्ते के 'स्टे' की मांग
इस मामले में आश्रम ने 4 हफ्ते के 'स्टे' की मांग की थी ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें. हालांकि, कोर्ट ने शर्त रखी थी कि अगर वे जमीन खाली करने का हलफनामा दें तभी राहत मिलेगी.
सरकारी वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 202 के तहत आश्रम को नया नोटिस दिया जाएगा, जिसके बाद जमीन का कब्जा वापस लिया जाएगा.
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साबरमती के किनारे 45 सालों से चल रहा आश्रम
साबरमती नदी के किनारे स्थित यह आश्रम पिछले 45 वर्षों से अस्तित्व में है. जिला कलेक्टर ने पहले ही आदेश दिया था कि आश्रम ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसके बाद से यह कानूनी विवाद चल रहा था.














