Ramadan 2026: रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही इबादत, संयम और आध्यात्मिकता का माहौल बन जाता है. सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखने के बाद जब इफ्तार का वक्त आता है, तो सबसे पहले जिस चीज से रोजा खोला जाता है, वह है खजूर. यह सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सेहत का प्रतीक बन चुका है. यही वजह है कि रमजान में खजूर की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है और बाजार में इसकी कीमत में भी उतार चढ़ाव देखने को मिलता है.
रमजान के महीने में खजूर से रोजा इफ्तार की परंपरा के चलते इस फल की बिक्री बढ़ गई है और बाजार में 80 रुपये से लेकर 2200 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अलग-अलग किस्मों की खजूर उपलब्ध हैं. फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने पीटीआई-भाषा से कहा कि पैगंबर मोहम्मद खजूर का ज्यादा इस्तेमाल करते थे और रोजा इफ्तार में भी इसी फल का सेवन किया करते थे.
खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोजा?
मुफ्ती के मुताबिक, पैगंबर ने फरमाया है कि अगर खजूर, पानी या दूध से रोजेदार को इफ्तार कराया जाए तो इसका बहुत पुण्य मिलता है. उन्होंने कहा कि खजूर पैगंबर मोहम्मद के पसंदीदा फलों में शामिल है और सभी मुस्लिमों की कोशिश रहती कि वे खजूर से रोजा खोलें. इस धार्मिक मान्यता के कारण हर घर में इफ्तार की थाली में खजूर की खास जगह होती है.
शरीर को तुरंत एनर्जी देता है खजूर:
धार्मिक महत्व के साथ-साथ खजूर का न्यूट्रिशन वैल्यू भी इसे खास बनाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरे दिन रोजा रखने के बाद शरीर को तुरंत एनर्जी की जरूरत होती है. नोएडा स्थित मेदांता अस्पताल में डायबिटीज विभाग की प्रमुख निधि सहाय ने पीटीआई-भाषा से कहा कि पूरे दिन व्रत रखने के बाद, शरीर को कुछ एनर्जी तुरंत चाहिए होती है और जब रोजेदार खजूर खाते हैं, तो यह शरीर में जरूरी एनर्जी वापस लाने का एक आसान तरीका है.
पोषक तत्वों से भरपूर है खजूर:
उन्होंने बताया कि खजूर फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, थोड़ी मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है. इसमें विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं.
हार्ट, पाचन और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद
दिल की सेहत, पाचन तंत्र और इम्यूनिटी पावर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. डॉ. सहाय का सुझाव है कि इफ्तार के समय एक से तीन खजूर खाना पर्याप्त होता है, ताकि शरीर को तुरंत एनर्जी मिल सके.
इसी बढ़ती मांग के कारण रमज़ान की शुरुआत के साथ ही बाजार में खजूर की बिक्री लगभग 80 फीसदी तक बढ़ जाती है. आजादपुर मंडी के व्यापारी अब्दुल गफ्फार के अनुसार, रमजान के महीने में खजूर की बिक्री 70-80 फीसदी तक बढ़ जाती है और हर किस्म की खजूर की मांग रहती है.
100 रुपये से लेकर 2200 रुपये तक खजूर की कीमत:
पूर्वी दिल्ली के खुदरा व्यापारी राजा बताते हैं कि बाजार में 100 रुपये से लेकर 2200 रुपये प्रति किलो तक की खजूर उपलब्ध है. लोग अपनी जेब और पसंद के अनुसार खरीदारी करते हैं. आमतौर पर 300 से 500 रुपये प्रति किलो की ट्यूनेशियन, बाम, मरयम और कलूट जैसी किस्में ज्यादा बिकती हैं. मदनी की खजूर कलमी 500-700 रुपये प्रति किलो में मिलती है और यह भी काफी पसंद की जाती है.
Photo Credit: रमजान के महीने में खजूर की बिक्री 70-80 फीसदी तक बढ़ जाती है.
खजूर की सबसे महंगी किस्मों के दाम हाई:
महंगी किस्मों में अंबर, अजवा, बर्नी और मेदजोल शामिल हैं, जिनकी कीमत 1000 से 2200 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है. सबसे महंगी मेदजोल खजूर मानी जाती है, जो मदीना की 2000-2200 रुपये किलो और जॉर्डन की 1600 रुपये किलो के आसपास बिकती है. इसकी खासियत यह है कि एक खजूर लगभग ढाई-तीन इंच लंबी होती है और उसका वजन 100 से 150 ग्राम तक होता है.
ओखला निवासी अदील बताते हैं कि वे 300-400 रुपये किलो वाली मध्यम श्रेणी की खजूर लेना पसंद करते हैं और उनके तीन लोगों के परिवार में रमजान के दौरान करीब दो किलो खजूर का उपयोग हो जाता है.
देश में 19 फरवरी से रमजान की शुरुआत हो चुकी है. अगले 30 दिनों तक मुस्लिम समुदाय के लोग सूरज निकलने से पहले से लेकर सूरज डूबने तक रोजा रखते हैं और ज्यादा से ज्यादा इबादत में समय बिताते हैं. ऐसे में खजूर न केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, बल्कि यह सेहत और बाजार दोनों की धड़कन बन चुका है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














