पेट में गैस बनना और पेट फूलना नॉर्मल नही है? इसमें छुपा है एक बड़ा खतरा!

Cause Of Gas and Bloating: जब रोज-रोज पेट में गैस बनती है, पेट फूल जाता है, कपड़े टाइट लगने लगते हैं, तो हम सोचते हैं कि कोई बात नहीं गैस ही तो है. लेकिन क्या सच में रोज गैस और पेट फूलना एक नॉर्मल डाइजेशन का पार्ट है, या फिर गैस के बहाने हमारी बॉडी हमें कोई बड़ा सिग्नल दे रहा है.

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गैस और ब्लोटिंग दे रही है शरीर में किसी खराबी का सिग्नल.

Cause Of Gas and Bloating: जब रोज-रोज पेट में गैस बनती है, पेट फूल जाता है, कपड़े टाइट लगने लगते हैं, तो हम सोचते हैं कि कोई बात नहीं गैस ही तो है. लेकिन क्या सच में रोज गैस और पेट फूलना एक नॉर्मल डाइजेशन का पार्ट है, या फिर गैस के बहाने हमारी बॉडी हमें कोई बड़ा सिग्नल दे रहा है. बहुत से लोग गैस को एक मामूली सी प्रॉब्लम समझकर इग्नोर कर देते हैं. लेकिन कई बार जिसे हम सिर्फ गैस समझ रहे होते हैं, वो आगे चलकर एक सीरियस डाइजेस्टिव प्रॉब्लम बन जाती है. इसलिए आज के इस आर्टिकल को बहुत ध्यान से पढ़िएगा क्योंकि आज हम सिर्फ गैस का इलाज नहीं गैस के पीछे छुपे हुए एक बड़े खतरे को समझने वाले हैं. इसके साथ ही इस समस्या को दूर करने के लिए ऐसी सिंपल डेली हैबिट्स और सेफ रेमेडीज के बारे में बताएंगे जिसकी मदद से अपने पेट को एकदम हल्का-फुल्का और तरोताजा कर सकते हैं.

गैस क्या होती है?

सबसे पहले समझते हैं एक बहुत ही बेसिक सी बात. गैस क्या होती है? गैस का मतलब होता है डाइजेस्टिव ट्रैक्ट के अंदर हवा या फिर गैस का जमा हो जाना. या इसके दो मेन सोर्सेज होते हैं. पहला सोर्स होता है स्मेलोड एयर जो कि खाते वक्त हमारे मुंह के जरिए हमारे पेट के अंदर चली जाती है. और दूसरा है फर्मेंटेशन इनसाइड द गट. यानी जब खाने में मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट्स स्मॉल इंटेस्टाइन में पूरी तरह डाइजेस्ट नहीं होते हैं और अधपची हालत में ही लार्ज इंटेस्टाइन तक पहुंच जाते हैं. तो वहां पर गुड बैक्टीरिया इनको फर्मेंट करते हैं. इससे हाइड्रोजन, मिथेन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसेस बनने लगती हैं. यहां एक इंपॉर्टेंट बात समझना बहुत ही जरूरी है कि पेट में गैस बनना बिल्कुल नॉर्मल होता है. प्रॉब्लम तब होती है जब गैस जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगे या गैस पेट में अटक जाए बाहर ना निकले या फिर आगे की तरफ मूव ना हो पाए. 

ब्लोटिंग क्या होती है?

अब बात करते हैं ब्लोटिंग की, ब्लोटिंग दरअसल एक फीलिंग है जिसमें पेट भराभरा लगता है. टमी में टाइटनेस फील होती है और पेट फूला हुआ सा भारी-भारी सा महसूस होता है. एक अनकंफर्टेबल एहसास आपको होता है. और यहां एक शॉकिंग फैक्ट भी है जो कि बहुत कम लोग जानते हैं और वो यह कि बहुत से लोगों में बिना ज्यादा गैस के भी ब्लोटिंग हो सकती है. मतलब प्रॉब्लम सिर्फ यह नहीं है कि आपको कितनी गैस बनती है. प्रॉब्लम यह होती है कि आपकी गट की सेंसिटिविटी और मूवमेंट कैसा है. ब्लोटिंग ज्यादातर इसलिए फील होती है क्योंकि गट स्लो चल रहा होता है. फूड और गैस ज्यादा देर तक पेट में रुके रहते हैं. नर्व्स ज्यादा सेंसिटिव हो जाती हैं या कब्ज की वजह से अपर एब्डोमेन में प्रेशर बना रहता है. इसलिए याद रखिएगा कि गैस वो चीज है जो कि आपके अंदर एक्चुअली बनती है और ब्लोटिंग वो रिएक्शन है वो एहसास है जो आपकी बॉडी आपको देती है.

अगर कभी-कभी गैस हो जाए तो तो बिल्कुल ठीक है. कोई प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन अगर रोजाना पेट फूलता है. रोजाना गैस बनती है. फार्ट बहुत ज्यादा आते हैं या उनमें बदबू बहुत ज्यादा आती है तो ये नॉर्मल डाइजेशन नहीं है. रोज-रोज गैस होना अक्सर कुछ हिडन प्रॉब्लम्स की तरफ इशारा करता है. आइए जानते हैं इसके कारण. 

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खाने का गलत तरीका

तेज-तेज खाना, बहुत ज्यादा खाना, रात को हैवी डिनर करना, हर थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाते रहना, मुंह चलाते रहना या खाली पेट चाय कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल करना. इससे हमारे पेट को रेस्ट ही नहीं मिल पाता है और डाइजेशन डिस्टर्ब होकर गैस ज्यादा बनने लगती है.

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कॉन्स्टिपेशन

जी हां, कब्ज यानी पेट का साफ ना होना. जब स्टूल बड़ी आत में ज्यादा देर तक रहता है, टिकता है, बाहर नहीं निकलता है, तो इससे फर्मेंटेशन बढ़ जाता है, गैस ज्यादा बनती है और पेट हार्ड और फूला हुआ महसूस होता है. और बड़ी अजीब सी बात यह है कि बहुत से लोग रोजाना मोशन ना आने को भी नॉर्मल समझ लेते हैं. इसके अलावा कुछ लोगों को दूध से गैस बनता है. कुछ लोगों के अंदर गेहूं जो है वह सूट नहीं करता है. उससे गैस बन जाता है और कुछ फ़ूड्स जैसे कि राजमा, छोले, गोभी, प्याज, लहसुन खाने से भी गैस ज्यादा बन सकता है. एक और बहुत जरूरी चीज जिसकी तरफ अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है वो है आर्टिफिशियल स्वीटनर्स. जी हां, अगर आप आर्टिफिशियल स्वीटनर्स को इस्तेमाल करते हैं चाहे चाय में या फिर इसको मीठे वगैरह में डाल के खाते हैं आप शुगर की वजह से या किसी और वजह से तो ऐसे केसेस में भी आपके अंदर ब्लोटिंग और गैस ज्यादा हो सकती है. 

स्ट्रेस

गैस का एक और बहुत बड़ा इंपॉर्टेंट रीजन होता है स्ट्रेस. स्ट्रेस सिर्फ आपके दिमाग को ही नहीं बल्कि आपके पेट को भी अफेक्ट करता है. स्ट्रेस से गट की मूवमेंट स्लो हो जाती है. डाइजेशन डिले हो जाता है और गैस ज्यादा फील होती है. इसीलिए एंग्जायटी, ट्रैवल के टाइम पे या फिर इमोशनल टेंशन के टाइम पेट की प्रॉब्लम्स अचानक से बढ़ जाती हैं. आपने नोटिस किया होगा जब हम छोटे थे, एग्जाम्स दिया करते थे और एग्जाम से पहले हमें स्ट्रेस होती थी, टेंशन होती थी तो पेट में गुड गुड गुड और ऐसा टॉयलेट जाने वाला प्रेशर फील होता था. 

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वह बेसिकली इसी वजह से होता है. इसी तरह से अगर कोई एकदम से बहुत बैड न्यूज़ मिल जाए तो उससे भी पेट में कुछ-कुछ गुड गुड गुड जिसे हम शायद बटरफाइस इन द स्टमक भी कहते हैं. ऐसे ही सेंसेशन होने लगता है. तो ये सारी चीजें जो हैं आपके ब्रेन से कनेक्टेड हैं. अभी तक हमने जितने भी कारण देखे हैं बताए हैं इनके बारे में लोग आमतौर पे जानते हैं. लेकिन कुछ ऐसे हिडन कॉसेस भी हैं जिनके बारे में लोग ना तो जानते हैं ना सुनते हैं और ना ही समझते हैं. और ज्यादातर डॉक्टर्स भी इनको मिस कर जाते हैं. आइए जानते हैं उन कारणों के बारे में. 

आईबीएस यानी इरिटेबल बावल सिंड्रोम

एक कॉमन हिडन कॉज होता है आईबीएस यानी इरिटेबल बावल सिंड्रोम. आईबीएस बहुत कॉमन प्रॉब्लम है. इसमें मरीज को कभी गैस होती है, कभी ब्लोटिंग होती है, कभी पेट दर्द होता है और कभी कब्ज और कभी-कभी लूज मोशन भी हो जाता है. एक और कॉमन प्रॉब्लम होती है.

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स्मॉल इंटेस्टाइनल बैक्टीरियल ओवर ग्रोथ

ये एक बहुत ही अनडायग्नोस्ड कंडीशन है जिसके बारे में बहुत कम लोग बात करते हैं और इसके अंदर होता क्या है कि लार्ज इंटेस्टाइन के जो बैक्टीरिया है वो स्मॉल इंटेस्टाइन तक आ जाते हैं. और वहां पर ग्रो करने लगते हैं. इससे खाने के थोड़ी देर के बाद आपको ब्लोटिंग होती है. बहुत ज्यादा गैस बनती है या फिर डायरिया भी आपके अंदर हो सकता है. और जानते हैं ज्यादातर इसे सिर्फ हम लोग गैस बोलकर इग्नोर कर देते हैं जो कि बहुत ही मिसअंडरस्टुड प्रॉब्लम है और इसकी वजह से सारी तरह की दवाइयां लेने के बावजूद भी पेशेंट को आराम नहीं मिल पाता है. 

सिलियक डिजीज

यह कुछ-कुछ ग्लूटिन एलर्जी की तरह होता है. लेकिन यह एक ऑटोइ्यून डिजीज है. जिसमें गैस, ब्लोटिंग, लूज मोशन और कभी-कभी कॉन्स्टिपेशन के साथ-साथ थकान, एनीमिया यानी खून की कमी और वेट लॉस या फिर स्किन और जॉइंट्स के इश्यूज भी आपके अंदर हो सकते हैं. जब हमें गैस और ब्लोटिंग होती है, तो ज्यादातर केसेस में हम इसे घरेलू नुस्खों या फिर आम किचन में पाई जाने वाली चीजों की मदद से ठीक करने की कोशिश करते हैं. जिसमें कोई बुराई भी नहीं है. 

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लेकिन ध्यान से सुनिए क्योंकि अगर गैस और ब्लोटिंग के साथ-साथ कुछ सिम्टम्स जो अब आपको बताने वाले हैं, वो आपके अंदर है, तो सेल्फ ट्रीटमेंट को आपको तुरंत बंद कर देना चाहिए. बिना वजह वेट लॉस होना, स्टूल में खून या फिर काले रंग का स्टूल आना, बार-बार वोमिटिंग का होना, सीवियर एनीमिया होना यानी खून की कमी हो जाना, पेट का साइज धीरे-धीरे बढ़ते रहना, तेज दर्द या फिर बुखार का आ जाना या फिर रात को गैस की वजह से नींद से जाग जाना. अगर ऐसी प्रॉब्लम्स आप फेस कर रहे हैं तो यहां आपको होम रेमेडीज नहीं बल्कि एक प्रॉपर इवैल्यूएशन डॉक्टर से कराने की जरूरत होती है. 

क्या है सॉल्यूशन

आइए अब जानते हैं कि इसका सॉल्यूशन क्या है. बहुत ही सिंपल सी कुछ चीजें हैं जो कि अगर आप फॉलो करना शुरू कर देंगे तो इनसे आपको जरूर फायदा मिलेगा. 

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आराम से खाना खाएं

सबसे पहले तो आपको धीरे-धीरे यानी इत्मीनान से खाना खाने की आदत डालनी है. हर मील को आराम से बैठकर कम से कम 15 से 20 मिनट दीजिए और अच्छी तरह से चबा चबा कर खाइए. जितना ज्यादा अच्छे से आप अपने खाने को चबा कर खाएंगे उतनी ही जल्दी वो डाइजेस्ट होगा और उतनी ही कम गैस वगैरह उससे आपको बनेगी. 

ओवर ईटिंग ना करना

हमेशा अपनी भूख से थोड़ा सा कम खाना खाइए. एक रोटी की गुंजाईश छोड़ दीजिए क्योंकि ओवर ईटिंग गैस बनाने का सबसे ज्यादा तेज और सबसे ज्यादा कॉमन कारण होता है. 

फिजिकल एक्टिविटी

तीसरा अगर आपको कॉन्स्टिपेशन रहता है या फिर पेट आपका खुलकर साफ नहीं हो पाता है तो इसके लिए अपनी फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाइए. पानी सही मात्रा में पीजिए. अपने खाने में फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश कीजिए. एकदम से मत बढ़ाइएगा. धीरे-धीरे बढ़ाएंगे तो प्रॉब्लम नहीं होगी.

डिनर टाइम

चौथा डिनर बिल्कुल सोते टाइम नहीं कीजिए बल्कि सोने से कम से कम 3 घंटा पहले अपना लास्ट मील फिनिश कर लीजिए. इससे सोने से पहले आपका डाइजेशन पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और आपको नींद भी अच्छी आएगी और रात को आपको गैस भी नहीं बनेगी. 

एयर फ्लो 

पांचवा ऐसी चीजें अवॉइड कीजिए जिनसे पेट में एयर ज्यादा चली जाती है. आप ज्यादा एयर फॉलो कर लेते हैं. फॉर एग्जांपल स्ट्रॉ से नहीं बल्कि ग्लास से पानी पिएं. या जो भी ड्रिंक आप पी रहे हैं उसको पीजिए और सोडा या फिर फिजी ड्रिंक्स को बिल्कुल भी मत लीजिए. पान मसाला, छाली, पान या फिर चुइंगम वगैरह जिनको बहुत ज्यादा चबाना पड़ता है बहुत देर तक उनसे भी आप बचिए क्योंकि इनके साथ-साथ बहुत सारी एयर आपके पेट में चली जाती है और जो कि बाद में आपको गैस और ब्लोटिंग कर सकती है. 

गैस और ब्लोटिंग के घरेलू उपाय

सौंफ

अगर आपने खाना खाया है और खाने के 30-40 मिनट के बाद आपको पेट भारी-भारी लगने लगता है. डकारें आने लगती हैं. गैस पेट में ऊपर नीचे घूमने लगती है. बाहर नहीं निकलती है. ऐसे में सबसे पहली और सबसे सिंपल चीज जो आप ले सकते हैं वो है सौंफ. सौंफ डाइजेशन के एंजाइम्स को एक्टिवेट करती है और गैस को जेंटली आगे बढ़ाने में हमारी मदद करती है. खाने के बाद आधा चम्मच सौंफ चबाने की आदत डाल लीजिए. आप खुद महसूस करेंगे कि आपका पेट धीरे-धीरे हल्का हो रहा है. 

अजवाइन

दूसरी रेमेडी है अजवाइन. बहुत से लोगों को गैस इसलिए होती है क्योंकि पेट के अंदर डाइजेशन वीक हो चुका होता है. अजवाइन उस वीक डाइजेशन को जगाने का काम करती है. रात को या जब भी आपको ज्यादा गैस बने तो बस आधा चम्मच अजवाइन तवे पर थोड़ा सा भून लीजिए और फिर उसे आप आधा कप गुनगुने पानी के साथ खा लीजिए. अजवाइन गैस को तोड़ती है. क्रैंपिंग को कम करती है और पेट को भी रिलैक्स करती है. 

अदरक

तीसरी चीज है अदरक. अदरक स्टमक और इंटेस्टाइन के बीच के कोऑर्डिनेशन को इंप्रूव करता है. बस थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा ले लीजिए लगभग 1/2 इंच का. उसे कुचल लीजिए और गर्म पानी में उसको 5 मिनट उबालकर छानकर हल्का गर्म होने के बाद खाना खाने के तुरंत बाद आप उसको पी लीजिए. आप चाहे तो इसमें एक छोटी इलायची भी कूट कर मिला सकते हैं. इससे इसका टेस्ट है वो भी अच्छा हो जाएगा और जो असर है वो भी बढ़ जाएगा. 

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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