How to do Shiv puja on Monday: सनातन परंपरा में भगवान शिव की साधना अत्यंत ही सरल और शीघ्र फलदायी मानी गई है. हिंदू मान्यता के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ जो साधक सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि वाले दिन औघड़दानी शिव की पूजा विधि-विधान से करता है, उसके सभी मनोरथ शीघ्र ही पूरे होते हैं. तमाम देवी-देवताओं की तरह भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए भी शास्त्रों में कुछेक नियम बताए गये हैं, जिनकी अनदेखी करने पर साधक को पुण्य की जगह पाप लगता है. आइए शिव पूजा से जुड़े उन 7 जरूरी नियमों के बारे में जानते हैं, जिनका पालन करने पर शीघ्र ही देवों के देव महादेव का आशीर्वाद बरसता है.
1. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा करने वाले साधक को प्रात:काल स्नान के बाद सफेद या पीले वस्त्र धारण करके महादेव की साधना करनी चाहिए. यदि संभव हो तो शिव की साधना बगैर सिले हुए सफेद वस्त्र पहनकर ही करें.
2. भगवान शिव की पूजा घर के ईशान कोण में या फिर शिवालय में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए. भगवान शिव की पूजा हमेशा किसी आसन पर बैठकर करें. शिव पूजा के लिए उनी आसन का प्रयोग करें.
3. भगवान शिव की पूजा में जिन दो चीजों का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है उनमें जल और पत्र हैं. ऐसे में आज शिव की साधना करते समय साधक को अत्यंत प्रिय गंगाजल और बेलपत्र अवश्य अर्पित करना चाहिए. भगवान शिव को गंगाजल तांबे के लोटे से अर्पित करें और बेलपत्र की डंठल को तोड़कर उलट कर चढ़ाएं.
4. शिव साधना में गंगाजल और बेलपत्र की तरह धतूरा, बेल का फल, भांग, सफेद पुष्प, सफेद चंदन, आक का पुष्प आदि करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है, लेकिन ध्यान रहे कि शिव पूजा में भूलकर भी तुलसी, केतकी का फूल, सिंदूर, शंख आदि का प्रयोग न करें.
5. भगवान शिव की पूजा में गंगाजल और बेलपत्र की तरह भस्म और रुद्राक्ष का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में सोमवार के दिन शिव पूजा करते समय महादेव को इन दोनों चीजें अर्पित करने के साथ स्वयं भी प्रसाद स्वरूप माथे पर भस्म से त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें.
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6. सोमवार के दिन गाय के कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है, लेकिन कभी भी प्लास्टिक के पैकेट से साीधे शिव को न अर्पित करें और न ही पका हुआ दूध भगवान शिव को अर्पित करें. भगवान शिव की पूजा के अंत में उनकी आधी परिक्रमा करें और भूलकर भी शिवलिंग की जलहरी को न डांकें.
7. यदि आपने अपने घर में पारद या नर्मदेश्वर शिवलिंग को स्थापित कर रखा है तो बार-बार उसका स्थान न बदलें. यदि किसी कारणवश कभी स्थान बदलना पड़े तो महादेव से क्षमा मांगते हुए किसी योग्य पुजारी की मदद से विधि-विधान से पूजा करते हुए दूसरी जगह स्थापित करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














