काशी का जल घर लाना चाहिए या नहीं? जानिए कारण और मान्यता

Kashi Se Gangajal Kyon Nahi Late: मान्यता है कि काशी मोक्ष नगरी है, जहां मणिकर्णिका जैसे घाटों पर अनवरत शवों का दाह संस्कार होता है, इसलिए काशी से गंगाजल घर लेकर नहीं आना चाहिए.

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Kashi Se Gangajal Kyon Nahi Late
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Kashi Se Gangajal Kyon Nahi Late: काशी (वाराणसी/बनारस) भारत के उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे स्थित विश्व का सबसे प्राचीन, जीवित और पवित्र शहर है, जिसे 'शिव की नगरी' के रूप में जाना जाता है. 3000 साल से अधिक पुराना यह शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा माना जाता है और यहां विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर व गंगा आरती (असी घाट) मुख्य आकर्षण हैं, लेकिन काशी का जल घर लाना चाहिए. धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी (वाराणसी) से गंगाजल घर नहीं लाना चाहिए, क्योंकि काशी मोक्ष नगरी है. ऐसे में माना जाता है कि काशी से घर में जल नहीं लेकर आना चाहिए.

काशी से गंगाजल न लाने के मुख्य कारण और मान्यताएं

मान्यता है कि काशी मोक्ष नगरी है, जहां मणिकर्णिका जैसे घाटों पर अनवरत शवों का दाह संस्कार होता है. जल में मृतक की राख व अस्थियां मिलने से वह घर में रखने योग्य नहीं रहता. इसे लाने से मुक्ति की यात्रा में बाधा व दोष लग सकता है.

मोक्ष नगरी व दाह संस्कार- काशी को भगवान शिव की मोक्ष नगरी कहा जाता है, जहां मृत्यु के बाद आत्मा को मुक्ति मिलती है. यहां के घाटों पर हर समय चिता की राख व अस्थियां गंगा में विसर्जित होती रहती हैं.

अशुद्धि का दोष- जानकार मानते हैं कि अनजाने में ही सही, उस पवित्र जल में मृत आत्माओं के अवशेष आ सकते हैं, जिसे घर के पूजा स्थल पर रखना उचित नहीं माना जाता है.

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मोक्ष में बाधा- मान्यता है कि जब आप काशी से गंगाजल लाते हैं, तो आप उन आत्माओं की मोक्ष यात्रा में बाधा डालते हैं.

कहां से लाएं जल- हरिद्वार या ऋषिकेश के गंगाजल को पवित्र मानकर घर में रखा जाता है, लेकिन काशी के जल को केवल वहीं उपयोग करने की सलाह दी जाती है.

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काशी का पौराणिक महत्व

काशी को भगवान शिव का त्रिशूल पर स्थित शहर माना जाता है, जो मोक्षदायिनी नगरी है. यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसे गोल्डन टेम्पल के नाम से भी जाना जाता है.यहां मणिकर्णिका (महाश्मशान) और असी घाट सबसे प्रमुख हैं, जहां सायंकाल में विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती होती है. यह दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे शहरों में से एक है. प्राचीन काल से ही यह शिक्षा और संस्कृति का बड़ा केंद्र रहा है.

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