Shattila Ekadashi 2026: 13 या 14 जनवरी, षटतिला एकादशी कब है? जानें पूजा एवं पारण का शुभ मुहूर्त और विधि

Shattila Ekadashi 2026 Date: सनातन परंपरा माघ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) के नाम से जाना जाता है. सभी पापों और दोषों को दूर करके सुख-सौभाग्य बरसाने वाली षटतिला एकादशी का व्रत कब पड़ेगा? इस व्रत की पूजा एवं पारण की विधि और धार्मिक महत्व को जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

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Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी व्रत की पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त 
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Shattila Ekadashi Kab Hai: हिंदू धर्म में हर महीने कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यधिक शुभ मानी गई है, लेकिन जब यह एकादशी माघ के कृष्णपक्ष में पड़ती है और षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) कहलाती है तो उसका महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. षटतिला एकादशी के व्रत में तिल की बहुत ज्यादा महत्ता मानी गई है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस पावन एकादशी में श्री हरि को तिल से बने भोग अर्पित करने और तिल का दान करने पर साधक के सभी दोष और पाप दूर होते हैं और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. आइए लक्ष्मी संग नारायण की कृपा बरसाने वाले और सुख-समृद्धि को बढ़ाने वाले षटतिला एकादशी व्रत की सही तारीख, पूजा एवं पारण का सही समय और धार्मिक महत्व विस्तार से जानते हैं. 

षटतिला एकादशी का शुभ मुहूर्त 

श्री हरि की कृपा बरसाने वाली षटतिला एकादशी 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि 13 जनवरी 2026 को दोपहर 03:17 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 14 जनवरी 2026 को सायंकाल 05:52 बजे तक रहेगी. वहीं इस व्रत का पारण 15 जनवरी 2026 को प्रात:काल 7:15 से 09:21 बजे तक रहेगी. 

षटतिला एकादशी पूजा विधि 

षटतिला एकादशी व्रत को करने के लिए साधक को इस पावन दिन सूर्यादय से पहले उठकर यदि संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए. यदि गंगातट पर न जा पाएं तो घर में नहाने के पाने में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. तन और मन से पवित्र होने के बाद सबसे पहले सूर्य नारायण को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए षटतिला एकादशी व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प करें. इसके बाद अपने पूजा घर मंदिर आदि में श्री हरि को सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें. इसके बाद चंदन, पुष्प, फल, मिष्ठान, धूप, दीप आदि अर्पित करें. इसके बाद श्री हरि का गुणगान करने वाली एकादशी व्रत की कथा का पाठ करें और पूजा के अंतम में भगवान विष्णु की आरती करें. फिर पंजीरी और पंचामृत आदि का भोग लगाने के बाद सभी को प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें. 

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षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार षटतिला एकादशी व्रत को विधि-विधान से करने पर साधक पर श्री हरि की पूरी कृपा बरसती है और उसके जीवन से जुड़ा हर दु:ख, दारिद्रय और दुर्भाग्य दूर हो जाता है. यह व्रत सभी पापों का नाश करके व्यक्ति को सभी सुख प्रदान करता है. षटतिला एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से साधक सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में विष्णु लोक को प्राप्त होता है.  भगवान विष्णु के इस पावन व्रत में दोषों को दूर करने और मनोकामना को पूरा करने के लिए तिल का छह तरीके - (स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन और दान) से प्रयोग किया जाता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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