Rudraksha Mala Puja Vidhi: सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को अत्यधिक पवित्र माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस रुद्राक्ष का प्राकट्य भगवान शिव के आंसुओं से हुआ है, उसे धारण करने वाले व्यक्ति पर हर समय शिव कृपा बनी रहती है. रुद्राक्ष शब्द की बात करें तो इसमें रुद्र का अर्थ भगवान शिव और अक्ष का अर्थ आंखें या फिर वह जो सब कुछ देख सकता है. जिस रुद्राक्ष को सभी शोक को दूर करके सुख-सौभाग्य दिलाने वाला माना गया है उसे यदि आप धारण करने की सोच रहे हैं तो आपको इससे पहले उसकी पूजा और धारण करने का पूरा नियम अवश्य जान लेना चाहिए. आइए महादेव का मनका कहे जाने वाले रुद्राक्ष की पूजा की पूरी विधि जानते हैं.
रुद्राक्ष माला की पूजा विधि
हिंदू मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष को मार्केट से खरीदते समय सबसे पहले उसके सभी दाने चेक कर लें. खंडित दाने या फिर 108 दाने से कम वाली माला न खरीदें. इसके बाद रुद्राक्ष की माला को किसी भी मास के शुक्लपक्ष के सोमवार वाले दिन किसी पात्र में सबसे पहले गंगाजल से धुलें. इसके बाद माला को पंचगव्य में डुबाएं. फिर एक बार फिर उसे गंगाजल या शुद्ध जल से धुलें. फिर उसे एक स्वच्छ सफेद कपड़े से पोंछ लें. इसके बाद रुद्राक्ष की माला को किसी एक पात्र में पीले या लाल रंग का आसन बिछाकर रखें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष की माला को शिवलिंग पर अर्पित करते हुए उसकी पुष्प, धूप, दीप, अक्षत आदि से षोडशोपचार पूजा करें.
इसके बाद रुद्राक्ष की माला के हर मनके को स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का उच्चारण अपने मन में कहें. पूजन के बाद यदि आप उस रुद्राक्ष की माला को देवों के देव महादेव का प्रसाद मानते हुए गले में धारण करना चाहते हैं तो उसे शिव का ध्यान करते हुए पहन लें और उसके बाद उसकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए सभी नियमों का पालन करें. यदि आप पूजित रुद्राक्ष की माला को जप माला के रूप में प्रयोग लाना चाहते हैं तो आपको उसे एक चांदी के डिब्बी में रखकर प्रतिदिन अथवा महीने में एक बार उसमें इत्र की दो बूंद डालना चाहिए और उसकी पूजा करने के बाद इच्छित मंत्र का जप करना चाहिए.
रुद्राक्ष की माला के नियम
- यदि आप रुद्राक्ष की माला को गले में धारण करना चाहते हैं तो उसे हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में बनवाकर ही धारण करें. रुद्राक्ष की माला या ब्रेसलेट के लिए कभी भूलकर भी काले धागे का प्रयोग न करें.
- अगर आप रुद्राक्ष की माला को चांदी और सोने से कवर करवा रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि उसमें इतना स्थान अवश्य रहे कि वह आपके शरीर की त्वचा को स्पर्श करें.
- अपवित्र अवस्था में भूलकर भी रुद्राक्ष न धारण करें. अंतिम संस्कार में शामिल होने से पहले या फिर शौच आदि के लिए जाते समय रुद्राक्ष की माला उतार कर पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए.
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- यदि आप रुद्राक्ष की माला को जप माला के रूप में प्रयोग करना चाहते हैं तो उसे हमेशा किसी गोमुखी में डालकर दाहिने हाथ के अंगूठे और मध्यमा या फिर अनामिका उंगली का प्रयोग करते हुए जप करें.
- भगवान शिव की पूजा में हमेशा नई रुद्राक्ष की माला ही अर्पित करनी चाहिए. कभी भी दूसरों या फिर स्वयं की पहनी हुई रुद्राक्ष की माला को शिव पूजन या फिर स्वयं के पहनने के लिए प्रयोग में नहीं लाना चाहिए.
- रुद्राक्ष की माला को हमेशा किसी पवित्र स्थान पर रखना चाहिए. भूलकर भी रुद्राक्ष को सीधे जमीन पर न रखें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)











